एक बेड पर दो गर्भवती महिलाओं का इलाज, हाई रिस्क बताकर रेफर हुईं 732 महिलाएं
समझें क्या है पूरा मामला
- धार में गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है।
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसूति सेवाएं उपलब्ध हैं।
- कई महिलाओं को हाई रिस्क बताकर रेफर किया गया।
- रेफरल सिस्टम की जांच में कई खामियां सामने आईं।
- जिला स्तर पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है।
चार महीने में 732 से ज्यादा महिलाएं रेफर
धार जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क बताकर जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। पिछले चार महीने में 732 से ज्यादा महिलाएं रेफर हुई हैं। इनमें से 80 प्रतिशत महिलाओं की बिना ऑपरेशन के सामान्य डिलीवरी हुई। जिला अस्पताल के प्रसूति विभाग में 100 बेड की क्षमता पर 150 से ज्यादा महिलाएं भर्ती हैं। इस वजह से एक बेड पर दो-दो गर्भवती महिलाओं का इलाज करना पड़ रहा है।
कहां से सबसे ज्यादा रेफर
सबसे ज्यादा रेफर सरदरपुर, तिलेरा, अमझेरा, बदनावर, नालछा और बाखड़ी स्वास्थ्य केंद्रों से हो रहा है। यहां से पिछले चार महीनों में 732 से अधिक गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल भेजा गया। इनमें से 80 प्रतिशत की सामान्य प्रसूति हुई। जबकि इन ज्यादातर केंद्रों पर स्क्रीनिंग विशेषज्ञ पहले से मौजूद हैं।
यानी जिन महिलाओं को गंभीर बताकर रेफर किया गया, उनमें से ज्यादातर को किसी बड़ी शल्य चिकित्सा की जरूरत ही नहीं पड़ी। यह सवाल खड़ा करता है कि रेफरल का फैसला किस आधार पर लिया जा रहा है।
मरीजों की आपबीती
केस 1: तिलेरा की मंजू और तंजु
गुरुवार को तिलेरा प्रसूति केंद्र पहुंची मंजू को यह कहकर रेफर किया गया कि बच्चे की धड़कन कम-ज्यादा हो रही है। सुबह 8 बजे मंजू जिला अस्पताल पहुंची और सुबह 10 बजे उसकी सामान्य डिलीवरी हो गई। इसी तरह तंजु नाम की गर्भवती को भी हाई रिस्क बताकर रेफर किया गया। रात 1:30 बजे वह अस्पताल पहुंची और करीब 2 घंटे बाद 3:30 बजे उसकी भी सामान्य डिलीवरी हो गई।
केस 2: मधु को देर रात किया रेफर
29 जुलाई को मधु नाम की गर्भवती महिला प्रसूति के लिए जिला अस्पताल पहुंची थी। यहां देर रात उसे यह कहकर रेफर कर दिया गया कि यहां डिलीवरी कराने में खतरा है। इस तरह के फैसलों से मरीज और परिजन असमंजस में पड़ जाते हैं।
केस 3: सरदरपुर से अनीता का मामला
25 जुलाई को सरदरपुर से अनीता नाम की गर्भवती महिला को हाई रिस्क बताकर रेफर किया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर परिजन ने पानी की समस्या को लेकर नाराजगी जताई। परिजन अस्पताल स्टाफ पर भरोसा नहीं कर पा रहे थे। बाद में स्टाफ ने भरोसा दिलाया और अनीता की सामान्य डिलीवरी करा दी गई।
एक बेड पर दो का खतरा
जिला अस्पताल के प्रसूति विभाग में गुरुवार को 100 बेड की क्षमता पर 150 से ज्यादा गर्भवती और प्रसूता महिलाएं भर्ती थीं। इस वजह से एक बेड पर दो-दो महिलाओं का इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक इससे कई तरह के खतरे पैदा होते हैं।
एक बेड पर दो होने से महिलाओं को जगह कम मिलती है। ऐसे में अगर संतुलन बिगड़ जाए और महिला गिर जाए तो यह मां और बच्चे दोनों की जान के लिए खतरनाक हो सकता है। प्रसूति के तुरंत बाद महिला को आराम और शांति की जरूरत होती है। बेड शेयर करने से यह आराम नहीं मिल पाता और मानसिक तनाव बढ़ता है।
नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता वैसे भी कमजोर होती है। एक बेड पर दो नवजात साथ रहने से एक-दूसरे में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनके पास संसाधन सीमित हैं। इसी वजह से एक बेड पर दो मरीजों का इलाज करने की स्थिति बन रही है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक डिलीवरी का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और सीमित संसाधनों में बेहतर सेवा देने की कोशिश की जा रही है।
धार जिले के रेफरल सिस्टम की वजह से जिला अस्पताल के प्रसूति विभाग पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होने वाली महिलाओं की संख्या कम नहीं हो रही, जबकि जिला अस्पताल में बेड की संख्या सीमित ही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
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