फिर टला प्रमोशन में आरक्षण का मामला, अब सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग SLP बनी कारण

Neel Tiwari | Aug 03, 2026, 13:09 IST
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प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले की सुनवाई एक बार फिर टल गई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि पहले सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी पर फैसला होना जरूरी है। इसके बाद ही हाईकोर्ट में चल रही रिट अपील पर आगे सुनवाई होगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर कई साल से कानूनी विवाद चल रहा है।
  • राज्य सरकार ने 2025 में नए प्रमोशन नियम लागू किए हैं।
  • इन नियमों का संबंध सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी 13954/2016 से जुड़ा है।
  • हाई कोर्ट को आशंका है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी बाद की पदोन्नतियों पर असर डालेगा।
  • अब दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग करेंगे। उसके बाद हाई कोर्ट आगे बढ़ेगा।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई सोमवार को एक बार फिर आगे बढ़ गई। करीब एक घंटे तक चली बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अहम याचिका का मुद्दा सामने आया। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 18 अगस्त तक टाल दी।



अब दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका की जल्द सुनवाई कराने की कोशिश करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही हाईकोर्ट में इस मामले पर आगे की कार्रवाई होगी।



सुनवाई से पहले जस्टिस विवेक अग्रवाल ने किया खुलासा

सुनवाई शुरू होने से पहले जस्टिस विवेक अग्रवाल ने खुद इस मामले से जुड़ा एक अहम तथ्य रिकॉर्ड पर रखा। उन्होंने बताया कि सी.पी. माथुर मामले में वह पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से केंद्रीय और राज्य प्रशासनिक अधिकरण, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में भी अधिवक्ता के रूप में पेश हो चुके हैं।



इसके बाद दोनों पक्षों से इस पर राय मांगी गई। राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं, दोनों ने साफ कहा कि उन्हें जस्टिस विवेक अग्रवाल की सुनवाई पर कोई आपत्ति नहीं है। दोनों पक्षों ने पीठ पर पूरा भरोसा जताया। इसके बाद न्यायालय ने सभी की सहमति से मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई।



सुनवाई के दौरान कोर्ट ने किया सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से अहम सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि 2025 के नए प्रमोशन नियम लागू करने से पहले क्या सुप्रीम कोर्ट से कोई अनुमति या आवेदन दिया गया था। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने बताया कि कई राज्यों से जुड़ी एक याचिका पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उसकी सुनवाई अभी तक नहीं हो सकी है।



सुप्रीम कोर्ट की लंबित याचिका बनी बड़ी वजह

बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने साल 2025 के नियमों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इन नियमों के प्रस्तावना में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी नंबर 13954/2016 का भी उल्लेख किया गया है।



उन्होंने कहा कि इस मामले (प्रमोशन में आरक्षण का मामला) में सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2016 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने भी माना कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद ही यह तय होगा कि साल 2025 के नियमों का असर किस तरह पड़ेगा।



हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को दिए निर्देश

कोर्ट ने कहा कि विरोधाभासी फैसलों से बचना जरूरी है। इसलिए राज्य सरकार और याचिकाकर्ता मिलकर सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त आवेदन लगाएंगे। इसमें मामले (प्रमोशन में आरक्षण अपडेट) की जल्द सुनवाई की मांग की जाएगी। हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सभी पक्षों को आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट हो सकेगी।



18 अगस्त को क्या होगा?

एमपी हाईकोर्ट ने मामले (reservation in promotion mp) की अगली सुनवाई 18 अगस्त तय की है। उस दिन दोनों पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे। उन्हें कोर्ट को बताना होगा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लगाए जाने वाले आवेदनों पर अब तक क्या प्रगति हुई है। इसके बाद मामले के मूल मुद्दे (मेरिट) पर सुनवाई की अगली तारीख तय की जाएगी।



सुनवाई से पहले सामान्य वर्ग ने क्या दलील दी?

सुप्रीम कोर्ट की लंबित याचिका का मुद्दा सामने आने से पहले सामान्य वर्ग की ओर से विस्तार से बहस हुई। कोर्ट को बताया गया कि कई विभागों में आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व पहले से पूरा है। इसके बाद भी प्रमोशन में आरक्षण दिया जा रहा है। इस पर आपत्ति दर्ज कराई गई।



मेरिट में चयनित आरक्षित वर्ग अभ्यर्थियों को लेकर भी उठे सवाल

सामान्य वर्ग की ओर से यह दलील भी दी गई कि मेरिट के आधार पर चयनित आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को प्रमोशन के समय दोबारा पिछड़े वर्ग की सूची में शामिल किया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे प्रमोशन प्रक्रिया का संतुलन प्रभावित हो रहा है। इस मुद्दे को भी पक्षकारों ने कोर्ट के सामने रखा।



कोर्ट ने किन फैसलों का उल्लेख किया?

सुनवाई के दौरान जरनैल सिंह और एम. नागराज के मामलों का भी उल्लेख हुआ। दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई कानूनी सवाल स्पष्ट कर चुका है। यह भी कहा गया कि एम. नागराज फैसले का प्रभाव भविष्य की पदोन्नतियों पर लागू माना गया है। इसलिए 2016 के बाद की पदोन्नतियों पर अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तय होगी।



अब आगे क्या होगा?

फिलहाल प्रमोशन में आरक्षण पर अंतिम बहस आगे नहीं बढ़ेगी। सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी की जल्द सुनवाई कराने की कोशिश होगी। उसके बाद हाई कोर्ट पूरे मामले की मेरिट पर सुनवाई करेगा। इसलिए अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर रहेगी।



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