10 साल बाद एमपी में नए फार्मूले से होगा प्रमोशन, पदोन्नति का रास्ता साफ!
समझें क्या है पूरा मामला...
- सरकार ने कर्मचारियों के प्रमोशन पर लगी 10 साल पुरानी रोक हटानी शुरू की है।
- नए नियम के तहत खाली पदों को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा।
- एससी (अनुसूचित जाति) को 16% और एसटी (अनुसूचित जनजाति) को 20% हिस्सा मिलेगा।
- बाकी पद अनारक्षित वर्ग के लिए रखे जाएंगे।
- इस फॉर्मूले से 2 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की पदोन्नति शुरू हो सकेगी।
प्रमोशन का नया फॉर्मूला आया सामने
सरकारी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। पिछले 10 साल से अटकी पदोन्नति अब आगे बढ़ने वाली है। राज्य सरकार ने इसके लिए नया फॉर्मूला तैयार किया है। भर्ती पदोन्नति नियम 2025 के तहत यह काम होगा। इसमें 2024 से 2029 तक के पांच साल का प्लान बनाया गया है।
हर विभाग को खाली होने वाले पदों की सूची तैयार करनी होगी। साथ ही पदोन्नति के लिए योग्य कर्मचारियों की लिस्ट भी बनानी होगी। इस लिस्ट के साथ कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) भी रखनी होगी। यह नियम अफसर से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक सभी पर लागू होगा।
सरकार का कहना है कि पदोन्नति पर अभी कोई कोर्ट रोक नहीं है। इसलिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने सोमवार, 29 जून को बड़ी बैठक की। इस बैठक में 20 विभागों के अफसर शामिल हुए। बैठक में ही नया आरक्षण फॉर्मूला सामने रखा गया। मकसद यह था कि पदोन्नति की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाए।
कैसे बंटेंगे खाली पद, समझें गणित
नए फॉर्मूले के तहत जितने भी पद खाली होंगे, उन्हें तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। पहला हिस्सा एससी यानी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए होगा। इसमें 16% पद आरक्षित रहेंगे। दूसरा हिस्सा एसटी यानी अनुसूचित जनजाति वर्ग का होगा। इसमें 20% पद रखे जाएंगे। बाकी बचे पद अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों को मिलेंगे। सरकार का तर्क है कि इस तरीके से फिलहाल पदोन्नति शुरू हो सकेगी। बाद में सुप्रीम कोर्ट जो भी अंतिम फैसला देगा, उसी के अनुसार बाकी पद भरे जाएंगे।
हालांकि इस मामले में एक पेच भी है। सरकार ने हाईकोर्ट में पहले एक आश्वासन दिया था। उस आश्वासन में कहा गया था कि अंतिम फैसला आने तक 2025 के नियमों से पदोन्नति (एमपी के पदोन्नति नियम 2025) नहीं होगी। वहीं, अब सरकार का रुख बदला हुआ नजर आ रहा है। सरकार साफ कह रही है कि ऐसा कोई औपचारिक आश्वासन कोर्ट में नहीं दिया गया था। इस बदले रुख से कुछ कर्मचारी संगठनों में नाराजगी भी है।
सामान्य वर्ग के कर्मचारियों की चिंता क्या है
सामान्य वर्ग से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने इस फॉर्मूले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नए नियम सामान्य वर्ग के लिए नुकसानदायक हैं। उनके मुताबिक इससे होने वाला नुकसान आगे 15 से 20 साल तक नहीं भरा जा सकेगा। इसी वजह से सामान्य वर्ग ने पहले ही इन नियमों को कोर्ट में चुनौती दी थी।
असल समस्या यह है कि कई पदोन्नति चैनलों में टॉप के दो तीन पदों पर पहले से ही आरक्षित वर्ग के अधिकारी बैठे हैं। ऐसे में जब वहां से ऊपर पदोन्नति होगी, तो भी आरक्षित वर्ग के ही लोग आगे बढ़ेंगे। वजह साफ है, उन पदों पर सामान्य वर्ग का कोई कर्मचारी मौजूद ही नहीं है।
मंत्रालय का उदाहरण लें तो बात और साफ हो जाती है। मंत्रालय में सभी अंडर सेक्रेटरी पहले से आरक्षित वर्ग से हैं। इसलिए जब डिप्टी सेक्रेटरी पद पर पदोन्नति होगी, तो वह भी आरक्षित वर्ग को ही मिलेगी। यही पैटर्न लगभग सभी विभागों में दिखता है। ऐसे में सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को सिर्फ निचले पदों पर ही पदोन्नति मिल पाएगी।
हर साल हजारों कर्मचारी बिना प्रमोशन रिटायर
यह मामला सिर्फ कागजी बहस का नहीं है। इसका असर हजारों कर्मचारियों की जिंदगी पर पड़ रहा है। बता दें कि 30 अप्रैल 2016 को हाईकोर्ट ने पुराने प्रमोशन नियम रद्द कर दिए थे। इसके बाद 12 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर रोक लगा दी थी। तब से अब तक करीब 10 साल बीत चुके हैं। इन 10 सालों में लगभग एक लाख कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो गए। हर साल औसतन 15 से 16 हजार कर्मचारी इसी तरह सेवामुक्त हो रहे हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बहुत बड़ा है।
पदोन्नति न होने का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा। इससे ऊपर के पदों पर अफसरों की भारी कमी हो गई है। प्रशासनिक कामकाज की रफ्तार पर भी इसका असर दिखा है। हालत यह हो गई है कि कई जगह संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। यह स्थिति किसी भी सरकारी व्यवस्था के लिए ठीक नहीं मानी जाती।
नए नियम 19 जून 2025 को नोटिफाई हुए थे। इन नियमों में साफ लिखा गया है कि यह सब सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) के अधीन रहेगा। यानी कोर्ट का अंतिम फैसला आने पर इन नियमों में बदलाव भी हो सकता है।
इस बार क्या नया लागू हो रहा है
इस बार कुछ ऐसे नियम भी लागू हो रहे हैं, जो पहली बार देखने में आए हैं। पहला बदलाव सीनियॉरिटी लिस्ट से जुड़ा है। अब यह लिस्ट हमेशा के लिए फ्रीज नहीं रहेगी। हर साल जनवरी और जुलाई में इसे अपडेट करना जरूरी होगा। इससे कर्मचारियों की रैंकिंग में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
दूसरा बड़ा बदलाव गोपनीय चरित्रावली से जुड़ा है। अब हर कर्मचारी की पांच साल की सीआर पहले से तैयार रखनी होगी। इससे पदोन्नति के समय फाइल अटकने की समस्या कम होगी। फिलहाल 20 विभागों में इस प्रक्रिया पर काम शुरू हो गया है। इनमें पीडब्ल्यूडी, पीएचई, जल संसाधन, जनजातीय कार्य और परिवहन विभाग शामिल हैं। इसके अलावा कृषि, उद्यानिकी, उद्योग, एमएसएमई (माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज), उच्च शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग भी इस लिस्ट में हैं।
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