पुष्यमित्र भार्गव के बतौर महापौर चार साल, बोले- अफसरों से पटरी बैठाना मेरा काम नहीं

Sanjay Gupta | Aug 04, 2026, 21:00 IST
इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव
पुष्यमित्र भार्गव और उनकी निगम परिषद का कार्यकाल चार साल का हो गया है। अब अंतिम एक साल बाकी है। इसी उपलक्ष्य में उन्होंने मंगलवार 4 अगस्त को अपने कामों का लेखा-जोखा पेश किया। अपने अहम काम गिनाए और चार साल में पांच निगमायुक्त पर भी बात की।

Indore. पुष्यमित्र भार्गव का महापौर पद पर चार साल हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने और निगम ने क्या काम किए और क्या कमी रह गई इस पर मंगलवार को मीडिया से चर्चा की। इसमें कई मुद्दों पर बात की। कमी पर कहा कि भागीरथपुरा की घटना दुखद थी लेकिन इससे काफी कुछ सीखा। केबल कार और स्ट्रीट डॉग की समस्या पर ज्यादा नहीं कर सकें। लेकिन हुकुमचंद मिल का 32 साल पुराना मामला निपटारा, जलूद के लिए देश का पहला ग्रीन बॉण्ड जारी होना, नर्मदा के चौथा चरण 2800 करोड़ को अहम बताया।



क्या बोले पांच निगमायुक्त और ब्यूरोक्रेसी पर

महापौर भार्गव ने उनके चार साल के कार्यकाल में पांच निगमायुक्त होने और अधिकारियों से पटरी नहीं बैठने पर खुलकर बात रखी। महापौर ने कहा कि मेरा काम अधिकारियों से पटरी बैठाना नहीं था। मेरा काम था जो शहर के लिए बेहतर हो वह करना, उसके लिए नीति तय करना, आगे बढ़ना और इसका पालन मैदान में अधिकारियों को करना है।



राजनीतिक अनुभव पर बोले- मैं अब थोड़ा शातिर हो गया

वहीं भार्गव जब महापौर बने तब राजनीति में उनका पहला कदम था। ऐसे में राजनीतिक अनुभव नहीं होने, राजनीति नहीं आने, शातिरबाजी को लेकर सवाल उठा। इस पर उन्होंने कहा कि मैंने जैसा हूं वैसे ही रहकर काम करने की कोशिश की है। रही शातिरबाजी की बात तो मैं अब थोड़ा शातिर तो हो गया हूं।



महापौर ने रिपोर्ट कार्ड में यह बताया

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अनंत इंदौर का नाम देते हुए कहा कि चार साल में भविष्य के इंदौर पर काम किया गया है। साल 2047 इंदौर के लिए पानी, सीवरेज, डिजिटल इंदौर और ग्रीन इंदौर कॉन्सेप्ट अहम रहा।



  • देश का पहला म्यूनिसिपल ग्रीन बॉन्ड: इस राशि से जलूद क्षेत्र में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क विकसित किया गया। इससे हर माह पांच करोड़ बच रहे।
  • भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ₹2,156.16 करोड़ की लागत से चार मेगा जल प्रदाय परियोजनाओं का कार्य शुरू।
  • चार सालों में 122.09 करोड़ की लागत से सात प्रमुख सीवरेज परियोजनाएं पूर्ण हुईं तथा 30.65 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाई गई।
  • शहर की 24 मास्टर प्लान सड़कों पर काम। शहर में 23 फ्लाईओवर का काम चल रहा है।
  • इंदौर को भारत सरकार के डिजीपिन (DigiPIN) प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाला देश का पहला शहर बनाया गया। क्यूआर आधारित डिजिटल पता व्यवस्था लागू की गई।
  • इंदौर में पहली बार राजस्व 1000 करोड़ के पार हुआ।
  • सभी 85 वार्डों में योग शेड विकसित करने के लक्ष्य के तहत 22 योग शेड पूर्ण हो चुके हैं, 5 के टेंडर जारी हैं तथा 8 नए स्थलों का चयन किया गया है। नगर निगम ने 153 अवैध कॉलोनियों का नियमितीकरण किया।
  • वर्ष-2014 से 2022 तक का निगम पर ठेकेदारों का बकाया 400 करोड़ रुपए का कर्ज चुकाया।
  • आत्मनिर्भर निगम बनाने के लिए रेवेन्यू बढ़ाने को लेकर बकाया टैक्स वसूल करने के साथ संपत्तिकर और जलकर में वृद्धि की गई।
  • शहर की हरियाली बढ़ाने के​ लिए पौधे लगाए जा रहे है। पिछले साल जहां 51 लाख पौधे लगाए गए, वहीं इस साल 21 लाख पौधे लगाए जा रहे है।
  • निरंजनपुर चौराहा से राजीव गांधी प्रतिमा तक बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाया।
  • एक हजार वर्गफीट तक नक्शे 24 घंटे में मंजूर करने की व्यवस्था लागू की।

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