PWD में सप्लीमेंट्री वर्क से काम की कीमत नहीं बढ़ा सकेंगे ठेकेदार, अफसरों पर भी शिकंजा
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- टेंडर लेकर बाद में लागत बढ़ाने का पैटर्न जांच के घेरे में।
- सागर संभाग में 10% की जगह 143% तक सप्लीमेंट्री वर्क मंजूर।
- मुरैना में 2.50 करोड़ रुपए के एस्केलेशन भुगतान पर सवाल।
- विभागीय कार्यालयों का ऑडिट और साइट निरीक्षण अनिवार्य।
- 5 अगस्त तक सभी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होंगी।
- 'पहले बिल, पहले भुगतान' की नई व्यवस्था लागू।
मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में वर्षों से चल रहे कथित "सस्ते टेंडर और महंगे भुगतान" के मॉडल पर अब सरकार ने सीधा प्रहार शुरू कर दिया है।
जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पहले कम दर पर काम हासिल किया गया और बाद में सप्लीमेंट्री वर्क जोड़कर परियोजनाओं की लागत नियमों से कई गुना अधिक बढ़ा दी गई। अब जिम्मेदार इंजीनियरों पर कार्रवाई की तैयारी है और विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को सख्त निगरानी में लाया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
सरकार की समीक्षा में वर्ष 2024 से 2026 के बीच कई निर्माण कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कम दर दिखाकर अनुबंध हासिल किए गए और बाद में अतिरिक्त कार्यों के जरिए सरकारी खजाने पर भारी बोझ डाला गया।
सबसे बड़ा मामला सागर संभाग से
जांच में सागर संभाग सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में आया। यहां लगभग 3023.53 लाख रुपए के मूल कार्य के मुकाबले 4310.87 लाख रुपए तक के सप्लीमेंट्री वर्क मंजूर कर दिए गए। यानी अतिरिक्त कार्य की सीमा, जो नियमों के अनुसार केवल 10 प्रतिशत होनी चाहिए, वह बढ़कर करीब 143 प्रतिशत तक पहुंच गई।
मुरैना में भी भुगतान पर उठे सवाल
मुरैना सड़क एवं पुल संभाग में भी वित्तीय नियमों की अनदेखी सामने आई। यहां एक ठेकेदार को सड़क निर्माण कार्य में लगभग 2.50 करोड़ रुपये का एस्केलेशन भुगतान स्वीकृत कर दिया गया, जिसकी वैधता अब जांच के दायरे में है।
अब होगी हर फाइल और हर साइट की जांच
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब केवल कागजी समीक्षा नहीं होगी, बल्कि निर्माण स्थलों का भी नियमित निरीक्षण किया जाएगा। संभागीय कार्यालयों का ऑडिट होगा और अलग-अलग एजेंसियों की टीमें मौके पर जाकर काम की गुणवत्ता और वित्तीय प्रक्रिया दोनों की जांच करेंगी।
5 अगस्त तक मांगी गई रिपोर्ट
ईएनसी (रोड एंड ब्रिज), पीआईयू, एमपीआरडीसी और मध्य प्रदेश भवन विकास निगम की निरीक्षण टीमें हर महीने नियमित जांच करेंगी। सभी संबंधित अधिकारियों को 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
बिल भुगतान का पुराना सिस्टम खत्म
सरकार ने भुगतान प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया है। अब 'फर्स्ट इन-फर्स्ट आउट' व्यवस्था लागू होगी। इसका मतलब है कि जो ठेकेदार पहले बिल जमा करेगा, उसी का भुगतान पहले होगा। इससे भुगतान में कथित पक्षपात और फाइल रोकने जैसी शिकायतों पर रोक लगाने की कोशिश की गई है।
सड़क अच्छी होगी तभी मिलेगी गारंटी की रकम
अब सड़क बनने के बाद केवल कागजी औपचारिकता से काम नहीं चलेगा। सड़क की स्मूथनेस और गुणवत्ता तकनीकी जांच में सही मिलने पर ही ठेकेदार की परफॉर्मेंस गारंटी (PG) लौटाई जाएगी।
9 इंजीनियरों को नोटिस, 35 परियोजनाएं रडार पर
समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई मामलों में गारंटी अवधि के दौरान ठेकेदार से मरम्मत कराने के बजाय विभाग ने खुद नई सड़कें बनवा दीं, जबकि ठेकेदारों की पीजी राशि भी वापस कर दी गई। इस मामले में 9 इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और 35 सड़कों से जुड़ी पूरी जानकारी तलब कर ली गई है।
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