20 हजार युवाओं को क्या देकर गए राहुल गांधी ? कांग्रेस क्या सोच रही ?
समझें क्या है पूरा मामला
- छात्रों की गूंज का पांचवां कार्यक्रम इंदौर में आयोजित हुआ।
- छात्रों ने राहुल गांधी को अपनी आखिरी उम्मीद बताया।
- भर्ती देरी और पेपर लीक से छात्र परेशान हैं।
- कांग्रेस छात्रों को मजबूत चुनावी आधार बनाना चाहती है।
- युवा भीड़ को वोटों में बदलना बड़ी चुनौती होगी।
INDORE. आई एम राहुल गांधी हेयर फॉर छात्रों की गूंज। जैसे ही ये आवाज मंच से आई। 20 हजार छात्रों ने एक साथ शोर मचाकर राहुल गांधी का स्वागत किया। राहुल 'सिस्टम बनाम स्टूडेंट' के टॉपिक पर एक घंटा बोले। इस दौरान कई छात्रों से बात भी की। लेकिन कांग्रेस और छात्र दोनों को आखिर इस कार्यक्रम से मिला क्या ?
छात्रों को क्या मिला ?
इंदौर में हुआ ये कार्यक्रम छात्रों की गूंज का 5वां एडिशन था। छात्र काफी उम्मीद लेकर यहां आए थे। राहुल भले विपक्ष में हों, लेकिन छात्रों ने कहा कि वो उनकी आखिरी उम्मीद हैं। ये ठीक कुछ वैसा ही था जैसे 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी से जनता उम्मीद कर रही थी।
द सूत्र ने जितने भी छात्रों से बात की उनका यही कहना था कि राहुल पर उन्हें भरोसा है। छात्र सरकार से गुस्सा भले हों, लेकिन अब उनको बदलाव का इंतजार है। पेपर लीक, देरी से होती भर्ती परिक्षाएं, वक्त पर न आते रिजल्ट। ये वो समस्याएं हैं जिनका समाधान छात्र सरकार से चाहते हैं, लेकिन शायद उनका भरोसा सिस्टम से उठ गया है।
द सूत्र से एक छात्र ने कहा कि वो ST कैटिगरी से आता है। चार पांच एग्जाम क्वालीफाई कर चुका है, लेकिन फिर भी ज्वाइनिंग नहीं मिली। उसे समझ नहीं आता कि नॉर्मलाइजेशन का कौन सा फॉर्मूला लगाया जाता है, जो उसके नंबर खा जाता है। एक नर्सिंग स्टूडेंट का कहना है उसके एग्जाम नहीं हो रहे। वो 6 साल से नर्सिंग स्टूडेंट ही है। ऐसे में कैसे वो इस सिस्टम पर भरोसा करे, जो एक एग्जाम वक्त पर नहीं करवा सकता।
यानी छात्र सिस्टम से परेशान हैं। राहुल से उन्हें उम्मीद है कि अगर वो सत्ता में आए, तो शायद ये सिस्टम बदले। यानी अब छात्रों को राहुल से एक नया, ईमानदार और पारदर्शी सिस्टम बनाने की उम्मीद है।
कांग्रेस को क्या उम्मीद ?
कांग्रेस 2014 से केंद्र की सत्ता से बाहर है। यानी लगभग 13 साल हो गए। कांग्रेस अब पीएम की कुर्सी पर राहुल को देखना चाहती है। लेकिन अब तक उसे कोई ठोस और मजबूत आधार नहीं मिल रहा था।
छात्र बने बड़ा मुद्दा
कांग्रेस ने दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए आंदोलन के बाद छात्रों की नब्ज पकड़ी। जो छात्र एक वक्त तक चुनावी समीकरणों से दूर थे वो अब सत्ता की चाबी बन चुके हैं। मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस को सत्ता परिवर्तन की उम्मीद है। पहले शिवराज के लगभग 18 साल और अब मोहन के तीन। कांग्रेस अब इस से ज्यादा इंतजार शायद नहीं कर सकती।
मध्य प्रदेश में छात्रों के बड़े मुद्दे
पिछले कुछ सालों में मप्र में छात्रों के मुद्दे तेजी से उठे हैं। पटवारी भर्ती, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती में देरी। ऐसे कई मुद्दे हैं जिनसे छात्र नाराज हैं। कांग्रेस शायद यही सोच रही है कि इंदौर में जो रिस्पांस उसे मिला। अगर ऐसा रिस्पांस पूरे प्रदेश से मिला, तो शायद सत्ता का वनवास जल्दी खत्म होगा।
यानी कांग्रेस अब छात्रों का वोट बैंक मजूबत करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इंदौर छात्रों का हब है, और यहां कार्यक्रम करना इसी बात की तरफ इशारा करता है। अब ऐसे में जो भीड़ राहुल के कार्यक्रम में पहुंची, इस भीड़ को वोट में बदलना कांग्रेस के लिए चुनौती है।
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