राहुल गांधी vs कार्तिकेय चौहान केस में नया मोड़: हाईकोर्ट ने मांगी पूरी रिकॉर्ड फाइल
News in short
- हाईकोर्ट ने 09.05.2025 के बाद की पूरी ऑर्डर शीट मांगी
- BNSS की धारा 528 के तहत याचिका में समन आदेश को दी गई चुनौती
- सुप्रीम कोर्ट के दो अहम आदेशों का दिया गया हवाला
- प्रतिवादी को नोटिस जारी, दो हफ्ते में जवाब मांगा
- अगली सुनवाई 04 मई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में
News in detail
हर्ड एंड रिजर्व के बाद बदला मामला, कोर्ट ने मांगी पूरी फाइल
जबलपुर हाईकोर्ट में इस बहुचर्चित मामले में पहले सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन बाद में मामले की अग्रिम सुनवाई हुई। इसके बाद जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने नया आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की पूरी स्थिति समझने के लिए विस्तृत रिकॉर्ड आवश्यक है। इसी कारण कोर्ट ने लंबित ऑर्डर शीट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
किस याचिका पर हो रही है सुनवाई
यह मामला MCRC No. 13941/2026 के तहत दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें Rahul Gandhi ने भोपाल की विशेष MP-MLA कोर्ट में लंबित शिकायत प्रकरण (SCPPM No. 03/2018) को रद्द करने की मांग की है। यह याचिका BNSS की धारा 528 के तहत दायर की गई है और 13 दिसंबर 2024 को जारी समन आदेश को चुनौती देती है।
निचली अदालत के आदेश पर सवाल
भोपाल की JMFC/विशेष न्यायाधीश (MP & MLA) अदालत ने 13.12.2024 को राहुल गांधी के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था। इसी आदेश को ‘कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग’ बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि यह कार्रवाई बिना आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन किए की गई।
ऑर्डर शीट अधूरी, कोर्ट ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि 09.05.2025 तक की ऑर्डर शीट ही प्रस्तुत की गई है, जबकि इसके बाद की कार्यवाही का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। रिकॉर्ड के अनुसार 28.08.2025 को अगली उपस्थिति निर्धारित थी, लेकिन उसके बाद क्या हुआ, इसकी जानकारी कोर्ट के पास नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि 09.05.2025 से वर्तमान तक की प्रमाणित ऑर्डर शीट अनिवार्य रूप से पेश की जाए।
नोटिस जारी, विपक्ष को भी सुना जाएगा
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम आवेदन (I.A. No. 6801/2026) पर निर्णय लेने से पहले प्रतिवादी पक्ष को सुनना जरूरी है। इसी के चलते Kartikeya Singh Chauhan को सामान्य और RAD मोड के माध्यम से नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया है। नोटिस दो सप्ताह के भीतर वापस योग्य होंगे।
2018 का भाषण बना पूरे विवाद की जड़
यह मामला मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान29 अक्टूबर 2018 को झाबुआ में हुई एक सभा से जुड़ा है। जहां राहुल गांधी ने अपने भाषण में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम ‘पनामा पेपर्स’ से जोड़ते हुए आरोप लगाए थे। उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां कार्रवाई हुई, लेकिन भारत में ऐसा नहीं हुआ। इसी बयान को कार्तिकेय सिंह चौहान ने अपनी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए मानहानि का मामला दर्ज कराया।
निचली अदालत में क्या हुआ - गवाह और समन आदेश
भोपाल की विशेष MP-MLA कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान कार्तिकेय सिंह चौहान सहित संदीप उपाध्याय, प्रवेन्द्र कुमार सिंह और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। गवाहों ने अदालत को बताया कि राहुल गांधी के बयान से कार्तिकेय चौहान की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा, जबकि उनका नाम किसी भी आधिकारिक ‘पनामा पेपर्स’ सूची में नहीं था। इन बयानों के आधार पर विशेष अदालत ने 13 दिसंबर 2024 को भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया। यही आदेश अब हाईकोर्ट में चुनौती का विषय बना हुआ है।
BNSS और सुप्रीम कोर्ट के आदेश बने बहस का केंद्र
राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 को प्रमुख आधार बनाया गया है। याचिका में कहा गया कि जब 13 दिसंबर 2024 को संज्ञान लिया गया, तब BNSS लागू हो चुकी थी, और इसके तहत आरोपी को सुने बिना संज्ञान लेना वैधानिक रूप से गलत है। इस तर्क के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के “राहुल गांधी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Diary No. 31445/2025)” मामले में 4 अगस्त 2025 के आदेश का हवाला दिया गया, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने स्पष्ट किया था कि धारा 223 के तहत संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनना अनिवार्य है।
इसके अलावा “फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म बनाम अमिता सिंह” मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में प्रक्रिया संबंधी अनिवार्यताओं और तकनीकी पहलुओं के पालन को आवश्यक बताया था।
याचिका और अंतरिम आवेदन में क्या मांगें
राहुल गांधी ने अपनी मुख्य याचिका (M.Cr.C. No. 13941/2026) में भोपाल की विशेष अदालत में लंबित आपराधिक प्रकरण (SCPPM No. 03/2018) और 13 दिसंबर 2024 के समन आदेश को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की है। इसके साथ ही IA No. 6801/2026 के जरिए अंतरिम राहत भी मांगी गई है, जिसमें कहा गया है कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं देता, तब तक निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए, अन्यथा याचिकाकर्ता को अनावश्यक कानूनी परेशानियों और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा।
राजनीतिक द्वेष और प्रक्रिया की खामियों का आरोप
राहुल गांधी की ओर से यह भी दलील दी गई कि यह पूरा मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। उनके वकील ने तर्क रखा कि निचली अदालत ने गवाहों के बयानों का पर्याप्त परीक्षण नहीं किया और BNSS के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किए बिना ही समन जारी कर दिया। इस प्रकार, पूरी कार्यवाही को ‘कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग’ बताया गया।
क्या था पनामा पेपर लीक मामला
पनामा पेपर लीक मामला 2016 में सामने आया एक बड़ा वित्तीय घोटाला था, जिसमें पनामा की लॉ फर्म मोसैक फोंसेका (Mossack Fonseca) के लगभग 1.15 करोड़ गोपनीय दस्तावेज लीक हुए थे। इन दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ कि कैसे दुनिया भर के कई प्रभावशाली राजनेताओं, व्यवसायियों, खिलाड़ियों और मशहूर हस्तियों ने टैक्स चोरी करने और अपनी अघोषित संपत्ति छिपाने के लिए 'शेल कंपनियां' बनाकर विदेशों में पैसा निवेश किया था। इस खुलासे ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया, जिसके परिणामस्वरूप कई देशों में जांच शुरू हुई, कई नेताओं को इस्तीफा देना पड़ा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
अगली सुनवाई की तारीख तय
मामले को अब 4 मई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इस दौरान कोर्ट के सामने पूरी ऑर्डर शीट और दोनों पक्षों की दलीलें आएंगी, जिसके बाद अंतरिम राहत और मुख्य याचिका पर आगे की सुनवाई होगी।
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