इंदौर से दिल्ली जाते ही राहुल के पोस्टर से हट गए मुकेश अंबानी! सोशल मीडिया पर चल रही कांस्प्रेसी थ्योरी
राहुल गांधी ने इंदौर में मुकेश अंबानी को सिस्टम का षड्यंत्रकारी बताया था। सिर्फ पांच दिन बाद ही दिल्ली की प्रेस कॉन्फ्रेंस में डेस्ट्रॉयर्स ऑफ डेमोक्रेसी स्लाइड फिर दिखी, पर अंबानी का नाम गायब था। गौतम अडानी दोनों बार सूची में रहे। अब यही सवाल घूम रहा है, आखिर अंबानी अचानक लिस्ट से बाहर कैसे हुए।
दरअसल आप सोच सकते हैं, यह तो नेताओं का आपसी खेल है, इससे मुझे क्या लेना- देना। लेकिन यही स्लाइड बताती है कि विपक्ष किन नामों को कब खतरनाक मानता है और कब नहीं। जिस कारोबारी का नाम कल आरोपों में था, वही आज सूची से साफ गायब हो सकता है। यह बदलाव सीधे बताता है कि राजनीतिक आरोप कितने स्थिर होते हैं, और कितने मौके के हिसाब से बदलते हैं।
राहुल के निशाने पर रहे हैं अडानी- अंबानी
राहुल गांधी लंबे समय से मोदी सरकार और बड़े कारोबारियों के रिश्तों पर सवाल उठाते रहे हैं। अडानी समूह उनके निशाने पर सालों से है। मुकेश अंबानी का नाम भी बीच- बीच में आता रहा है। हालांकि उतनी बार नहीं जितना अडानी का।
हाल ही में 19 सितंबर को इंदौर के भारत जोड़ो मैदान में राहुल का छात्रों की गूंज कार्यक्रम हुआ। कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे के बाद यह पांचवां आयोजन था। यहीं राहुल ने देश पर सिस्टम का कब्जा शीर्षक वाली स्लाइड दिखाई।
इंदौर की स्लाइड में राहुल ने छह नाम गिनाए थे। पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, एनएसए अजित डोभाल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, गौतम अडानी और मुकेश अंबानी। उन्होंने कहा कि इन लोगों का सिस्टम पर कब्जा है और इसी वजह से छात्रों को अंधभक्त बनाया जा रहा है।
दिल्ली में अंबानी का फोटो गायब
पांच दिन बाद, 24 सितंबर को दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय में राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मुद्दा अलग था, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए राहुल ने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
चुनाव आयोग ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि फैसले सर्वसम्मति से हुए।
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में डेस्ट्रॉयर्स ऑफ डेमोक्रेसी वाली स्लाइड दोबारा सामने आई। इस बार सूची में सात नाम थे, अडानी, भागवत, अमित शाह, मोदी, डोभाल, पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीके मिश्रा और सीईसी ज्ञानेश कुमार, लेकिन मुकेश अंबानी का नाम इसमें नहीं था।
दोनों ओर से जारी हैं आरोपों का दौर
कांग्रेस का कहना है कि सत्ता, नौकरशाही और कारोबार का एक गठजोड़ बन गया है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रहा है। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, आरएसएस और कुछ कारोबारी घरानों को एक साथ जोड़कर यह आरोप बार-बार दोहराया है।
दूसरी तरफ बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि हारने पर राहुल हमेशा संस्थाओं को दोष देते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी वोट चोरी के दावों को अप्रमाणित करार दिया और कहा कि राहुल के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। यह याद रखना जरूरी है कि यह पूरी सूची राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है, अदालत में साबित हुआ तथ्य नहीं।
इस कांस्प्रेसी का MP कनेक्शन
यह पूरी कहानी मध्य प्रदेश से ही शुरू हुई थी। इंदौर की वही स्लाइड, जिसमें अंबानी का नाम था, राज्य में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान दिखाई गई थी। यानी विवाद की जड़ दिल्ली नहीं, इंदौर का मंच है।
आगे क्या होगा
सवाल यह है कि अंबानी का नाम आगे की स्लाइड्स में लौटेगा या नहीं। कांग्रेस और बीजेपी के बीच यह जुबानी जंग चुनाव आयोग विवाद के साथ और तेज हो सकती है। असली इम्तिहान यह होगा कि राहुल के आरोप किसी जांच या संसदीय बहस में कितनी दूर जाते हैं।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
ज्यादातर लोगों को लगता है कि राजनीतिक आरोपों की सूची एक बार बन जाए तो स्थिर रहती है। असल में ऐसा नहीं होता। एक ही नेता की एक ही थीम पर बनी स्लाइड्स में भी नाम जुड़ते और हटते रहते हैं, मौके, मुद्दे और मंच के हिसाब से।
ये भी पढ़ें...
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार फिर चर्चा में, कैसे होती है CEC की नियुक्ति
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में कांग्रेस
कॉकरोच जनता पार्टी ने ज्ञानेश कुमार का मांगा इस्तीफा, 48 घंटे का अल्टीमेटम
OBC क्रीमी लेयर विवाद: केंद्र की 2 साल की मांग पर SC का फैसला सुरक्षित