भ्रष्टाचार के आरोप में रेलवे इंजीनियर की मौत के बाद कार्रवाई, 1.58 करोड़ के फ्लैट और बैंक में जमा राशि कुर्क

Neel Tiwari | Mar 10, 2026, 18:35 IST
Photograph: (thesootr)
भ्रष्टाचार के आरोपी रेलवे इंजीनियर की मौत के बाद भी प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई की। परिवार से जुड़े 1.58 करोड़ रुपए के फ्लैट और बैंक जमा कुर्क किए गए।

News in short

ईडी भोपाल ने 5 फरवरी 2026 को 1.58 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की।



कार्रवाई पश्चिमी रेलवे के पूर्व संभागीय अभियंता वेद प्रकाश श्रीवास्तव से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के मामले में हुई।



सीबीआई एसीबी जबलपुर ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी।



मामले में 2 आवासीय फ्लैट और 22 चल संपत्तियां सामने आईं, जिनमें एफडी और बैंक बैलेंस शामिल हैं।



जांच एजेंसियों के अनुसार इस मामले में लगभग 1.66 करोड़ रुपये की संदिग्ध संपत्ति का खुलासा हुआ है।



News In Detail

भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। रेलवे के एक पूर्व अधिकारी की मौत के बाद भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई रुकी नहीं और उनकी संपत्तियों पर शिकंजा कस दिया गया। ईडी ने जांच के बाद परिवार से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।



सीबीआई की एफआईआर से शुरू हुआ मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) जबलपुर द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से हुई। जांच एजेंसी ने पश्चिमी रेलवे के राजकोट डिवीजन में पदस्थ रहे तत्कालीन संभागीय अभियंता वेद प्रकाश श्रीवास्तव और उनकी पत्नी विभा श्रीवास्तव के खिलाफ मामला दर्ज किया था।



आरोप लगाया गया कि सरकारी पद पर रहते हुए उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया और अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की। इसी आधार पर उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 109 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।



जांच के बाद अदालत में पेश की गई चार्जशीट

सीबीआई एसीबी जबलपुर ने मामले की विस्तृत जांच करने के बाद 22 मई 2023 को जबलपुर स्थित विशेष सीबीआई न्यायालय के समक्ष चार्जशीट दाखिल की। यह अंतिम रिपोर्ट संख्या 02/2023 के रूप में अदालत में प्रस्तुत की गई।



जांच के दौरान एजेंसी को ऐसी संपत्तियों और निवेश का पता चला जिनका मूल्य संबंधित अधिकारी की घोषित आय से काफी अधिक बताया गया। जांच एजेंसी के अनुसार इस पूरे मामले में अपराध से अर्जित धनराशि लगभग 1.66 करोड़ रुपए आंकी गई।



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ईडी ने शुरू की मनी लॉन्ड्रिंग जांच

सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और अदालत में दाखिल चार्जशीट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय भोपाल आंचलिक कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत अलग से जांच शुरू की।



ईडी की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि कथित भ्रष्टाचार से अर्जित धन को किस प्रकार छिपाया गया और बाद में उसे वित्तीय प्रणाली के माध्यम से कैसे उपयोग में लाया गया। इसी प्रक्रिया में एजेंसी ने विभिन्न बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण किया।



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बैंकिंग सिस्टम से बाहर नकदी का उपयोग

ईडी की जांच में यह सामने आया कि कथित तौर पर भ्रष्टाचार से प्राप्त बड़ी मात्रा में नकदी को शुरुआत में बैंकिंग प्रणाली से बाहर ही रखा गया था। जांच एजेंसी के अनुसार इस नकदी का उपयोग मुख्य रूप से दैनिक खर्चों के लिए किया जाता रहा।



बैंक खातों से केवल मामूली राशि निकाली जाती थी, जिससे यह संकेत मिला कि वास्तविक नकदी का इस्तेमाल बैंकिंग प्रणाली के बाहर हो रहा था और लेन-देन का पूरा विवरण बैंक रिकॉर्ड में दिखाई नहीं दे रहा था।



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परिवार के कई खातों में जमा की गई रकम

जांच के दौरान ईडी को यह भी जानकारी मिली कि बाद में इस कथित अपराध से प्राप्त धन का एक हिस्सा परिवार के कई सदस्यों के नाम पर मौजूद बैंक खातों में जमा किया गया।



बड़ी संख्या में अलग-अलग खातों का उपयोग किए जाने के कारण धन के वास्तविक स्रोत और उसके उपयोग को ट्रैक करना कठिन हो गया। जांच एजेंसी के अनुसार इस तरीके से धन के लेन-देन को इस प्रकार व्यवस्थित किया गया कि उसकी वास्तविक प्रकृति और स्रोत स्पष्ट रूप से सामने न आ सके।



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एफडी और फ्लैट खरीदने में लगाया पैसा

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों में जमा धनराशि को बाद में सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य निवेश के रूप में बदल दिया गया। इसके अलावा इसी धन का उपयोग अचल संपत्तियों को खरीदने में भी किया गया।



जांच एजेंसी के अनुसार इस धन से दो आवासीय फ्लैट खरीदे गए। इन संपत्तियों में से कुछ ऐसे परिवार के सदस्यों के नाम पर थीं जिनकी कोई स्वतंत्र आय का स्रोत सामने नहीं आया।



मौत के बाद ईडी ने की संपत्ति कुर्की

हालांकि, इस मामले के मुख्य आरोपी वेद प्रकाश श्रीवास्तव का निधन हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद जांच एजेंसियों की कार्रवाई रुकी नहीं। प्रवर्तन निदेशालय भोपाल आंचलिक कार्यालय ने 5 फरवरी 2026 को कार्रवाई करते हुए दो आवासीय फ्लैट और 22 चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया।



इन चल संपत्तियों में सावधि जमा और बैंक बैलेंस शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 1.58 करोड़ रुपये बताई गई है। ईडी के अनुसार यह संपत्तियां कथित रूप से अर्जित अनुपातहीन संपत्ति से जुड़ी हुई हैं और इन्हें पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है।





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