OBC आरक्षण से शुरू हुआ निकाय चुनाव विवाद: श्योपुर नपा केस में हाईकोर्ट सख्त, सरकार को भी फटकार
Neel Tiwari | Mar 10, 2026, 17:11 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण विवाद ने निकाय चुनावों को संवैधानिक संकट में डाल दिया। श्योपुर नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव के मामले में हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।
News in short
- OBC आरक्षण विवाद के बाद हुए निकाय चुनावों से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में।
- श्योपुर नगरपालिका अध्यक्ष रेनू गर्ग के निर्वाचन पर कानूनी विवाद।
- जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की कोर्ट ने सरकारी वकीलों के रुख पर जताई नाराजगी।
- महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होकर मांगी माफी।
- बिना गजट नोटिफिकेशन के प्रदेश के करीब 395 नगर निकाय अध्यक्षों के अधिकारों पर संकट।
Intro
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होकर माफी मांगनी पड़ी और कोर्ट में सरकारी अधिवक्ता द्वारा दिए गए पिछले आवेदन को वापस लेना पड़ा। अदालत की टिप्पणियों के बाद अब यह मामला पूरे प्रदेश के सैकड़ों नगर निकायों को प्रभावित कर सकता है।
News in Short
OBC आरक्षण विवाद से कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को जल्दबाजी में चुनाव कराना पड़ा। नगर निगमों में महापौर का चुनाव सीधे जनता द्वारा कराया गया, जबकि नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव पार्षदों के माध्यम से कराया गया।
यह खबरें भी पढ़ें...
MP हाईकोर्ट लौटा OBC आरक्षण मामला, अब रिव्यू के जरिए फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
एमपी में नगर पालिका अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार पर संकट, हाईकोर्ट के फैसले से मचा हड़कंप!
चुनाव तो हुए, लेकिन नोटिफिकेशन नहीं हुआ
लेकिन पार्षदों द्वारा चुने गए कई नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के निर्वाचन का औपचारिक नोटिफिकेशन नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी नहीं किया गया। इसी कारण अब अदालतों में यह सवाल उठ रहा है कि बिना नोटिफिकेशन के क्या ऐसे अध्यक्ष अपने अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं।
श्योपुर नगरपालिका अध्यक्ष विवाद से मामला बना बड़ा मुद्दा
हाईकोर्ट ने पहले ही लगा दी थी अंतरिम रोक
कमिश्नर की जांच रिपोर्ट पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। अदालत ने इसे “आईवॉश” और “धोखाधड़ी” जैसी कठोर टिप्पणी के साथ खारिज करते हुए पूरे मामले की जांच मुख्य सचिव को सौंप दी।
बिना सरकार के परामर्श के काम कर रहे हैं शासकीय अधिवक्ता
इसके बाद सरकार ने शासकीय अधिवक्ता की आपत्ति से अपने हाथ खींच लिए और कहा कि यह आपत्ति लगने के पहले शासकीय अधिवक्ता ने कोई विमर्श नहीं किया था। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकारी अधिवक्ताओं द्वारा दी दलीलें और फिर सरकार के इससे पीछे हटने पर नाराजगी जताई।
जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने महाधिवक्ता से सीधे सवाल करते हुए कहा, “क्या आपके शासकीय अधिवक्ता आपके नियंत्रण में नहीं हैं?” अदालत ने कहा कि एक ही मामले में विरोधाभासी रुख अपनाना न्यायिक प्रक्रिया के साथ गंभीर लापरवाही है।
महाधिवक्ता को मांगनी पड़ी माफी
उन्होंने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि court में जो “समयपूर्व याचिका” वाली आपत्ति ली गई थी, वह सरकार का आधिकारिक रुख नहीं था। इसके साथ ही उन्होंने अदालत से मौखिक माफी मांगते हुए उस आपत्ति को वापस लेने की बात कही।
कोर्ट की चेतावनी- पूरे प्रदेश में खड़ा हो सकता है संकट
दो निकायों में पहले ही खत्म हो चुके हैं अधिकार
इन निकायों में फिलहाल प्रशासनिक जिम्मेदारी सीएमओ या एसडीएम के माध्यम से संचालित की जा रही है, जबकि डबरा नगरपालिका से जुड़ा मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है।
यह खबरें भी पढ़ें...
27% OBC आरक्षण केस: सुप्रीम कोर्ट ने दिए हाईकोर्ट को 3 महीने में फैसला करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण केस फिर भेजा हाईकोर्ट, दो महीने में फैसला करने का निर्देश
395 नगर निकाय अध्यक्षों पर पड़ सकता है असर
प्रदेश में करीब 395 नगर निकाय अध्यक्ष ऐसे बताए जा रहे हैं जिनके निर्वाचन का औपचारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ। इनमें लगभग 98 नगर पालिकाएं और 297 नगर परिषदें शामिल हैं। ऐसे में इस मामले का अंतिम फैसला प्रदेश की स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari