रायसेन में रेंजर 5,000 रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, बिल पास कराने मांगी थी घूस
समझें क्या है पूरा मामला
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बेगमगंज में तैनात वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) अरविंद अहिरवार को EOW (Economic Offenses Wing) भोपाल की टीम ने 5,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। रेंजर ने फर्नीचर व्यापारी शकील अहमद से बिल पास करने के बदले में 10,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी। शकील ने 27 अप्रैल 2026 को EOW भोपाल के पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी थी। EOW ने पहले वॉयस रिकॉर्डर से रिश्वत की मांग को रिकॉर्ड किया, फिर जाल बिछाकर 20 मई 2026 को गिरफ्तारी की। आरोपी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित) 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कैसे शुरू हुआ यह मामला?
बेगमगंज के वार्ड नंबर 8 के रहने वाले शकील अहमद सुपर ट्रेडर्स नाम से फर्नीचर बनाने का काम करते हैं। उनका यह छोटा व्यवसाय लकड़ी के फर्नीचर के परिवहन पर निर्भर है। 21 अप्रैल 2026 को शकील ने अपने फर्नीचर के परिवहन से जुड़े बिल पास कराने और उनके सत्यापन के लिए वन विभाग के कार्यालय में आवेदन दिया।
यह एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया थी। लेकिन रेंजर अरविंद अहिरवार ने इसे कमाई का जरिया बना लिया। उन्होंने शकील से 10,000 रुपए की मांग रख दी और साफ धमकी दी कि जब तक पैसे नहीं मिलेंगे, वे अपने अधीन कर्मचारी को बिल पास करने का निर्देश नहीं देंगे। शकील परेशान हो गए। एक छोटे व्यापारी के लिए 10,000 रुपए की रिश्वत कोई छोटी रकम नहीं थी। 27 अप्रैल 2026 को उन्होंने हिम्मत दिखाई और EOW भोपाल के पुलिस अधीक्षक से जाकर शिकायत कर दी।
EOW ने कैसे बिछाया जाल?
शिकायत मिलते ही EOW (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) की टीम सक्रिय हो गई। टीम ने शकील को एक वॉयस रिकॉर्डर देकर रेंजर के पास भेजा। इस दौरान रेंजर अहिरवार ने बातचीत में 10,000 रुपए मांगने की बात साफ-साफ कह दी, जो रिकॉर्ड हो गई।
इसी बीच कार्रवाई में थोड़ी देरी हो गई। शकील की बेटी की तबीयत बिगड़ गई। साथ ही जिस कर्मचारी को पैसे दिए जाने थे, वह रिटायर हो गया। इन कारणों से अगला कदम थोड़ा टल गया। फिर 14 मई 2026 को शकील एक बार फिर रिकॉर्डर लेकर रेंजर से मिले। इस बार अहिरवार ने कहा, "अभी पांच (5,000 रुपए) कर दो, बाकी दो-चार दिन में दे देना।" यह बातचीत भी रिकॉर्ड हो गई। अब सबूत पूरे थे।
EOW ने रेंजर अहिरवार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) संशोधित 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद गिरफ्तारी का जाल बिछाया गया।
रंगेहाथ धरा गया रेंजर
20 मई 2026 को EOW भोपाल की टीम मौके पर पहुंची। शकील अहमद ने रेंजर अरविंद अहिरवार को 5,000 रुपए दिए। रुपए हाथ में आते ही EOW की टीम ने उन्हें मौके पर ही रंगेहाथ दबोच लिया। गिरफ्तारी के समय अरविंद अहिरवार वन परिक्षेत्र बेगमगंज, जिला रायसेन कार्यालय में वन परिक्षेत्र अधिकारी के पद पर तैनात थे।
कानून क्या कहता है?
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) 1988 में संशोधन के बाद 2018 में इसे और सख्त बनाया गया। इसकी धारा 7 के तहत कोई भी लोक सेवक (Public Servant) अगर किसी काम के बदले रिश्वत लेता है, तो उसे कम से कम 3 साल और अधिकतम 7 साल की सजा हो सकती है। इसके साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
EOW यानी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (Economic Offenses Wing) ऐसे मामलों की जांच के लिए बनी विशेष पुलिस इकाई है। यह सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार, वित्तीय घोटालों और आर्थिक अपराधों की जांच करती है।
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