धनोपिया बोले मीनाक्षी ने ही नहीं दी जानकारी, रिटायर्ड जज आर्य की पैरवी पर भी सवाल
मध्यप्रदेश राज्यसभा की तीसरी सीट पर कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म खारिज हो गया है। कारण बताया गया कि आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई गई थी। मामला अब कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ रहा है।
वहीं इस मामले में कांग्रेस की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर नामांकन फॉर्म जैसे संजीदा मामले के लिए अपनी लीगल सेल के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को क्यों साथ में नहीं लिया गया?
धनोपिया यह बोले मीनाक्षी नटराजन को लेकर
धनोपिया ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म भरवाया था। द सूत्र ने उनसे यह जानकारी नहीं भरने को लेकर पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि यदि प्रत्याशी मुझे जानकारी नहीं देगा तो मैं कैसे भरूंगा। मुझे मीनाक्षी ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी थी।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष की धनोपिया पर टिप्पणी
वहीं इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष यादव की टिप्पणी भी खासी चर्चा में है। उन्होंने मीनाक्षी के नामांकन फॉर्म भरने की फोटो के साथ टिप्पणी की। इसमें लिखा कि कांग्रेस जेपी धनोपिया जैसे वकील से फॉर्म जमा करवाती है। इसकी वजह से विजयपुर के कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा का फॉर्म त्रुटि के कारण हाईकोर्ट से निर्वाचन शून्य कर दिया गया था। फिर वही वकील साहब (धनोपिया) फॉर्म जमा करवा रहे हैं, वाह धन्य है। वहीं इस पर धनोपिया कहते हैं कि कहने वाले कुछ भी कह सकते हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं को किया नजरअंदाज
इस मामले में कांग्रेस के अंदरखाने में बात चल रही है कि बड़े नेताओं ने क्या चूक कर दी या कोई खेला हो गया है। दरअसल कांग्रेस की लीगल सेल में पूर्व एडिशनल एजी अजय गुप्ता, शेखर शर्मा मौजूद हैं।
इनके साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता व हाईकोर्ट बार एसोसिएशन इंदौर के पूर्व अध्यक्ष अजय बागड़िया, खुद प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी के करीबी जय हार्डिया व अन्य अधिवक्ता मौजूद हैं। इसके बावजूद किसी को भी इसमें साथ नहीं लिया गया।
रिटायर्ड जस्टिस आर्य की पैरवी भी सवाल
वहीं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज रोहित आर्य (जो रिटायर्डमेंट के बाद बीजेपी में शामिल हुए) की पैरवी पर भी सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस और धनोपिया का कहना है कि संविधान की धारा 220 के तहत रिटायर्ड जस्टिस संबंधित प्रदेश के कोर्ट/प्राधिकरण में पैरवी नहीं कर सकता है।
वहीं, आर्य ने इस मामले में बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट की ओर से पैरवी की है। यह रिटर्निंग अधिकारी के आदेश में भी लिखा हुआ है। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने भी इस पर सवाल उठाया है। साथ ही, इसे संवैधानिक परंपरा व मूल्यों के खिलाफ बताया है।
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