CBI ने 1.5 लाख की रिश्वत में रतलाम के CGST असिस्टेंट कमिश्नर को पकड़ा, लेकिन 4 अधिकारियों ने मांगे थे 10 लाख
सीबीआई की रतलाम सेंट्रल जीएसटी विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर शंकर परमार को पांच लाख की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तारी की कार्रवाई विवादों में आ गई है। इस मामले में द सूत्र के पास मौजूद दस्तावेज और खुद परमार द्वारा कोर्ट में लगाए गए आरोप गंभीर हैं।
यह पूरा मामला डेढ़ या पांच लाख की रिश्वत का नहीं है, बल्कि 10 लाख की रिश्वत मांगने का है। इसमें आरोप भी एक अधिकारी नहीं बल्कि विभाग के कुल चार अधिकारियों पर लगे थे।
क्या है मामला?
सीबीआई ने 31 मार्च को रतलाम में छापा मारकर मध्यस्थ सुरेश मनसुखानी को 1.5 लाख की रिश्वत लेते पकड़ा था। यह रिश्वत शिकायतकर्ता व जावरा (रतलाम) की फर्म मेसर्स मान एजेंसी के मालिक राजेश मनसुखानी से ली जा रही थी।
इसमें फिर सीबीआई ने शंकर परमार, असिस्टेंट कमिश्नर सीजीएसटी को हिरासत में लिया था। आरोप है कि परमार ने पांच लाख की रिश्वत मांगी थी। साथ ही, मध्यस्थ सुरेश ने पहली किस्त में 1.5 लाख लिए थे। परमार अभी जेल में हैं।
रिश्वत मांगने में परमार के साथ ये 3 अधिकारी भी थे
अब पूरा किस्सा 11 नवंबर 2025 से शुरू होता है। राजेश मनसुखानी की जावरा स्थित फर्म पर सेंट्रल जीएसटी रतलाम से आर.एच. मीना, नीरज मीना व अन्य जांच के लिए गए थे। यहां बताया गया कि फर्म के खिलाफ शिकायत है।
इसके बाद फर्म मालिक राजेश मनसुखानी सेंट्रल जीएसटी रतलाम विभाग जाते हैं। वहां विभागीय अधिकारी आर.एस. मीना, नीरज मीना, विनोद मीना और शंकर परमार मिलते हैं।
शिकायत में है कि इन अधिकारियों द्वारा आगे कार्रवाई नहीं करने के लिए 10 लाख की रिश्वत मांगी गई थी। वहीं, चर्चा करने के बाद यह राशि घटाकर पांच लाख कर दी जाती है।
बता दें कि आरएच मीनासीजीएसटीमें सुपरिटेंडेंट हैं। वहीं,नीरज मीनाऔर विनोद मीनानिरीक्षकपद परहैं।
सीबीआई ने शिकायतों का फिर किया सत्यापन
इसके बादफर्म मालिक राजेश भोपाल सीबीआई एसपी को शिकायत करते हैं। सीबीआई में दर्ज एफआईआर में इन चारों अधिकारियों (आर.एच. मीना, नीरज मीना, विनोद मीना और शंकर परमार) और 10 लाख की रिश्वत मांगने की बात लिखी हुई है।
एसपी द्वारा इसकी जांच शुरू कराई जाती है साथ ही, शिकायत का सत्यापन 30 जनवरी, 24 मार्च, 25 मार्च और फिर 30 मार्च को किया जाता है। इसके बाद 31 मार्च को छापा मारकर मध्यस्थ सुरेश मनसुखानी को गिरफ्तार किया जाता है। फिर परमार को हिरासत में लिया जाता है।
शंकर परमार ने कोर्ट में सीबीआई पर लगाए आरोप
इस मामले में 31 मार्च को असिस्टेंट कमिश्नर शंकर परमार को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। वह 03 अप्रैल तक रिमांड में रहे और फिर उन्हें जेल भेज दिया गया था। जब परमार ने जमानत आवेदन लगाया तो इसमें उनके अधिवक्ता द्वारा सीबीआई कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए गए।
परमार ने कहा कि जब सीबीआई ने उनकी जांच की तो उनके पास पर्स में केवल 3183 रुपए मिले। उनके पास रिश्वत की राशि नहीं मिली और न ही अन्य जगह जांच में कुछ मिला। इस मामले में सीबीआई ने मध्यस्थ सह-आरोपी सुरेश को गिरफ्तार नहीं किया और न ही पूछताछ की, जबकि 1.5 लाख रुपए उसके पास मिले थे।
साथ ही शिकायत में तीन अन्य अधिकारियों के नाम थे, उनके खिलाफ भी सीबीआई ने कुछ नहीं किया और न ही आरोपी बनाया। केवल मुझे ही इस मामले में झूठा फंसाया गया और गिरफ्तार किया गया।
कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
आरोपी परमार के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार निवारण एक्ट की धारा 7 व बीएनएस की धारा 61(2) में सीबीआई ने केस दर्ज किया है। इंदौर जिला कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपी परमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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