एमपी में रेप के आरोपी ने थाने में लगाई फांसी, नाबालिग बेटी के साथ ही दुष्कर्म का लगा था आरोप
अमीन हुसैन @ रतलाम
रतलाम जिले के नामली थाने से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति ने बुधवार, 15 अप्रैल की देर रात थाने की हवालात में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद से ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, मामले की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी गई है।
बेटी की शिकायत पर हुई थी गिरफ्तारी
घटना की शुरुआत बुधवार शाम को हुई। आरोपी की 16 साल की नाबालिग बेटी ने अपनी मां के साथ नामली थाने पहुंचकर पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। किशोरी ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया था कि उसके पिता ने उसके साथ दो बार दुष्कर्म किया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की और बुधवार रात करीब 9:40 बजे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
लोअर के नाड़े से लगाई फांसी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी को गिरफ्तारी के बाद नामली थाने की हवालात में रखा गया था। सीसीटीवी फुटेज की जांच में वह रात 2:30 बजे तक हवालात में सामान्य रूप से बैठा हुआ दिखाई दिया।
हालांकि, सुबह करीब 4:00 बजे जब बंदी गृह के इंचार्ज नारायण जादौन ने मॉनिटर पर नजर डाली, तो आरोपी एक कोने में बेसुध हालत में लटका मिला। जब पुलिसकर्मी भागकर अंदर पहुंचे, तो देखा कि उसने अपने लोअर के नाड़े का इस्तेमाल कर पानी के पाइप से फंदा बना लिया था।
मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
थाने के भीतर आरोपी की मौत की खबर मिलते ही पुलिस महकमे के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। इनमें एसडीओपी (SDOP) किशोर पाटनवाला, डीएसपी अजय सारवान और एफएसएल (FSL) अधिकारी अतुल मित्तल शामिल थे।
चूंकि मामला हिरासत में मौत का था, इसलिए ग्रामीण एसडीएम विवेक सोनकर और न्यायिक मजिस्ट्रेट भी जांच के लिए थाने पहुंचे। सुबह 10:00 बजे तक चली प्रारंभिक विधिक कार्यवाही के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए रतलाम मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
परिजनों का आरोप: साजिश का अंदेशा
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब मृतक के परिजनों ने इसे साजिश करार दिया है। मृतक के चचेरे भाई ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष के लोग उसे लंबे समय से परेशान कर रहे थे।
परिजनों का कहना है कि मृतक ने बुधवार को ही अपने ससुराल वालों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जवाबी कार्रवाई के रूप में पत्नी ने बेटी के जरिए यह झूठा केस दर्ज करवाया। मृतक पेशे से किसान था और खेतीबाड़ी करता था।
एसडीएम ने की पुष्टि
ग्रामीण एसडीएम विवेक सोनकर ने पुष्टि की है कि एक बंदी ने हवालात के भीतर आत्महत्या की है। वर्तमान में कानून के सभी विधिक पहलुओं के तहत जांच की जा रही है। साथ ही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
मध्य प्रदेश में कुल 46 लोगों की पुलिस हिरासत में मौत
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पांच सालों में मध्य प्रदेश में कुल 46 लोग पुलिस हिरासत में मौत का शिकार हो चुके हैं।
- 2021-22 में 8 मौतें
- 2022-23 में 8 मौतें
- 2023-24 में 12 मौतें
- 2024-25 में 8 मौतें
- 2025-26 में अब तक 10 मौतें
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि हर हिरासत में मौत पुलिस की प्रताड़ना के कारण नहीं होती। कई बार बीमारियों या अन्य कारणों से भी मौत हो सकती है। लेकिन उनका मानना है कि हर मामले की सख्त जांच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
वो बताते हैं कि हर कस्टोडियल डेथ (पुलिस हिरासत में मौत) का मामला एफआईआर दर्ज कर जांच के लिए भेजा जाता है। न्यायिक जांच भी कराई जाती है, और संबंधित थाने से अलग किसी अन्य अधिकारी द्वारा विभागीय जांच की जाती है। अगर पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है, और उसकी नौकरी भी जा सकती है। हालांकि, कई मामलों में पुलिसकर्मी निर्दोष भी पाए जाते हैं।
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