किस शास्त्र में लिखा है रावण को जलाना? महाकाल मंदिर के पुजारी ने दहन पर उठाए सवाल, चार समितियों को भेजा कानूनी नोटिस
आखिर क्या है पूरा मामला?
अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने उज्जैन की चार रावण दहन(Burning of Ravana) समितियों को कानूनी नोटिस भेजा है। ये समितियां शहर में बड़े स्तर पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित करती हैं। दशहरा मैदान, कार्तिक मेला ग्राउंड, सिद्धवट और शास्त्री नगर में ऐसे आयोजन होते हैं। नोटिस में आयोजकों से रावण दहन का शास्त्रीय आधार बताने को कहा गया है।
महेश पुजारी ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत में महेश पुजारी ने रावण दहन पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि धार्मिक ग्रंथों में रावण दहन की परंपरा का उल्लेख नहीं मिलता। यदि किसी परंपरा का शास्त्रीय आधार स्पष्ट नहीं है तो उस पर दोबारा विचार होना चाहिए। उन्होंने इसे धार्मिक और सामाजिक चर्चा का विषय बताया।
कानूनी नोटिस में क्या लिखा है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटिस में वाल्मीकि रामायण और अन्य धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख किया गया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि रावण दहन के माध्यम से भ्रामक प्रचार हो रहा है। इससे रावण की छवि और ब्राह्मण समाज की प्रतिष्ठा प्रभावित होने का दावा किया गया है।
नोटिस में यह आशंका भी जताई गई है कि ऐसी गतिविधियों से सनातन धर्म के प्रति लोगों का अविश्वास बढ़ सकता है। हालांकि ये संगठन के आरोप और दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
कभी रावण दहन में मुख्य अतिथि भी रहे
इस विवाद के बीच महेश पुजारी के पुराने कार्यक्रमों की चर्चा भी हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वे करीब दस साल पहले श्री सिद्धवट युवा मंच के रावण दहन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे थे। उस कार्यक्रम में उन्होंने भाषण भी दिया था। इस संबंध में महेश पुजारी का कहना है कि उस समय उन्होंने रावण दहन की परंपरा का गहराई से अध्ययन नहीं किया था। बाद में धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया। विद्वान ब्राह्मणों से भी चर्चा की। इसके बाद उनकी इस परंपरा को लेकर धारणा बदली।
पिछले साल भी जताया था विरोध
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने पिछले वर्ष भी रावण दहन का विरोध किया था। संगठन के सदस्यों ने विरोध जताते हुए रावण दहन स्थल पर काली मटकी फोड़ी थी। अब कानूनी नोटिस जारी करके संगठन ने इस मुद्दे को फिर उठाया है।
कौन हैं महेश पुजारी ?
महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) के पुजारी महेश पुजारी अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उनकी ओर से अधिवक्ता अश्विन चौधरी ने चारों समितियों को नोटिस भेजा है। संगठन का कहना है कि रावण दहन की परंपरा का धार्मिक आधार स्पष्ट होना चाहिए।
क्या हर जगह जलाया जाता है रावण का पुतला?
देश के अलग-अलग क्षेत्रों में रावण को लेकर मान्यताएं भी अलग हैं। मध्य प्रदेश के मंदसौर में कुछ समुदाय रावण को अपना पूर्वज मानते हैं। यहां रावण से जुड़ी स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं प्रचलित हैं। देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी रावण की विद्वत्ता और शिवभक्ति का उल्लेख करते हुए उसका सम्मान किया जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि रावण को लेकर भारतीय समाज में अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं।