पहले पास, फिर फेल! रिजल्ट की उलझन में फंसे छात्र, देर रात तक चलता रहा RDVV में प्रदर्शन
छात्र सुबह से कुलगुरु से मुलाकात कर समाधान की मांग कर रहे थे।
सुबह 4 बजे मंडला से निकली छात्रा, त्योहार के दिन भी धरना
मंडला की एमएससी प्रथम सेमेस्टर जूलॉजी की छात्रा हीरमणी कुशराम ने बताया कि वह सुबह करीब 4 बजे घर से निकली थीं। ट्रेन से जबलपुर पहुंचने के बाद दोपहर 1 बजे से धरने पर बैठी थीं। छात्रा के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान उन्होंने खाना तक नहीं खाया। उन्होंने कहा कि वह कुलगुरु से मिलकर अपनी समस्या का समाधान चाहती हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि जब वे सुबह से अपनी मांग लेकर बैठे हैं, तो कुलगुरु को कम से कम पांच मिनट निकालकर उनकी बात सुननी चाहिए।
पहले पास, फिर परिणाम बदला तो बढ़ी परेशानी
गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन के मंडला जिला अध्यक्ष सुरजीत वाटिया के मुताबिक, यह विवाद सत्र 2025-26 के एमए, एमएससी और एमकॉम प्रथम सेमेस्टर के परिणामों से जुड़ा है। उनके अनुसार, दिसंबर में हुई परीक्षाओं का परिणाम अगस्त-सितंबर में जारी किया गया था। उस समय कई विद्यार्थियों को पास बताया गया था। बाद में द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया के दौरान परिणाम पोर्टल से हटा दिया गया। विद्यार्थियों को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली, जिससे असमंजस की स्थिति बनी रही।
13 अक्टूबर को दोबारा रिजल्ट जारी, पास विद्यार्थी भी हुए प्रभावित
सुरजीत वाटिया ने बताया कि विश्वविद्यालय ने पहले परीक्षा फॉर्म भरने की तारीख बढ़ाई और फिर 13 अक्टूबर को प्रथम सेमेस्टर का परिणाम दोबारा जारी किया। विश्वविद्यालय की ओर से पहले घोषित परिणाम में त्रुटि होने की बात कही गई। यूनियन का आरोप है कि नए परिणाम में पहले पास दिखाए गए कुछ विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया, जबकि कुछ के परिणाम में एटीकेटी दर्ज हो गई। इसी के विरोध में विद्यार्थी जबलपुर पहुंचे थे।
यूनियन के मुताबिक, इस समस्या से करीब 200 विद्यार्थियों के प्रभावित होने की आशंका है। इनमें कटनी, नरसिंहपुर, मंडला और डिंडोरी सहित विश्वविद्यालय से जुड़े क्षेत्रों के विद्यार्थी शामिल बताए गए हैं।
कुलगुरु ने बताया 14-2 नियम, अलग-अलग पास होना जरूरी
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु राजेश वर्मा के अनुसार, परिणाम में बदलाव का संबंध 14-2 नियम से है। इस नियम के तहत विद्यार्थियों को थ्योरी और प्रैक्टिकल में अलग-अलग पास होना जरूरी है। पहले इंटरनल और मुख्य परीक्षा के अंकों को जोड़कर पास होने की व्यवस्था थी।
कुलगुरु के मुताबिक, नए नियम के तहत परिणाम जारी होने के बाद परीक्षा नियंत्रक और गोपनीय विभाग की टीम को कुछ कमियां मिली थीं। इसके बाद परिणाम वापस लेकर दोबारा जांच की गई और नए सिरे से जारी किया गया।
विश्वविद्यालय का दावा, दोबारा जांच में अंक नहीं बदले
कुलगुरु राजेश वर्मा ने कहा कि दोबारा परिणाम जारी करने पर विद्यार्थियों के अंकों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, पुरानी और नई मार्कशीट में इंटरनल अंकों के अंतर के कारण नए नियमों के तहत अलग-अलग पास नहीं होने वाले विद्यार्थियों के परिणाम में एटीकेटी दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी परिणाम में तकनीकी त्रुटि या अन्य गलती पाई जाती है, तो उसकी जांच की जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से 14-2 नियम को समझाने के लिए पहले कार्यशालाएं आयोजित करने की बात भी कही गई है।
फीस वापसी और शिकायतों की जांच का आश्वासन
कुलगुरु ने बताया कि जिन विद्यार्थियों ने फीस जमा कर दी है, उनके चाहने पर फीस वापस करने पर विचार किया जाएगा। परीक्षा के दौरान फीस समायोजित करने या कॉलेजों के माध्यम से राशि लौटाने को लेकर प्राचार्यों के साथ चर्चा की जाएगी।
दूसरी ओर, गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन ने परिणामों की प्राथमिकता से जांच, उत्तरपुस्तिकाओं और अंकों की प्रविष्टि के सत्यापन, विश्वविद्यालय की गलती मिलने पर शुल्क वापसी और शिकायतों के लिए विशेष समिति गठित करने की मांग की है।
समाधान नहीं मिला तो अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन ने मांग की है कि परिणाम संबंधी शिकायतों का जल्द निराकरण किया जाए और आगामी शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो। संगठन के जिला अध्यक्ष सुरजीत वाटिया ने कहा कि विद्यार्थी कुलगुरु से सीधे बातचीत कर ठोस समाधान चाहते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कुलगुरु विद्यार्थियों से बातचीत नहीं करते और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकलता, तो धरने को अनिश्चितकालीन किया जाएगा। देर रात तक जारी प्रदर्शन के बीच विद्यार्थियों की मांग रही कि विश्वविद्यालय उनके परिणामों की स्थिति स्पष्ट करे और उन्हें न्यायसंगत राहत दे।