रेरा ट्रिब्यूनल ठप! नियुक्ति नहीं हुई तो मुख्य सचिव होंगे हाईकोर्ट में तलब
समझें पूरा मामला...
- रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष 14 मार्च 2026 को रिटायर हो चुके हैं।
- हाईकोर्ट ने कहा- ट्रिब्यूनल प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पा रहा।
- मुख्य सचिव को तुरंत नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश।
- अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश।
- कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्य सचिव को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण में अध्यक्ष पद खाली रहने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं और चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई तक कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।
रेरा ट्रिब्यूनल में लंबे समय से खाली पड़ा अध्यक्ष पद
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (रेरा ट्रिब्यूनल) में अध्यक्ष पद खाली रहने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रिब्यूनल का प्रमुख पद खाली होने से उसकी कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और आम लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा। इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए सख्त रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश
यह सुनवाई जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट ने मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन को निर्देश दिए कि रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति और अन्य रिक्त पदों को भरने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। अदालत ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण संस्था को लंबे समय तक बिना अध्यक्ष के नहीं छोड़ा जा सकता।
राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या कहा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता डॉ. एस.एस. चौहान उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जानी है।
हालांकि, कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि अध्यक्ष 14 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसके बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
ट्रिब्यूनल प्रभावी रूप से काम नहीं कर पा रहा
खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट टिप्पणी की कि अध्यक्ष पद खाली होने के कारण ट्रिब्यूनल प्रभावी रूप से काम करने में सक्षम नहीं है। कोर्ट ने माना कि इससे रियल एस्टेट से जुड़े मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है और न्यायिक प्रक्रिया धीमी पड़ रही है। यही कारण है कि अदालत ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के रूप में देखा।
अगली सुनवाई तक मांगी स्टेटस रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। कोर्ट ने चेतावनी भी दी कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 23 जून 2026 को तय की गई है।
रेरा को लेकर पहले भी कोर्ट पहुंच चुके हैं अध्यक्ष
रेरा से जुड़ा विवाद इससे पहले भी न्यायालय तक पहुंच चुका है। रेरा के पूर्व चेयरमैन और पूर्व आईएएस अधिकारी अजीत कुमार श्रीवास्तव इसी वर्ष मार्च में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि उनके अधिकारों में हस्तक्षेप किया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब रेरा और उससे जुड़े संस्थागत ढांचे को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
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