मध्य प्रदेश हाई कोर्ट हाईटेक, लेकिन जिला अदालतें बेहाल, डिजिटल न्याय का दावा फेल?
Neel Tiwari | May 19, 2026, 16:43 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट हाईटेक है, लेकिन जिला अदालतें पिछड़ गई हैं। डिजिटल न्याय का दावा फेल होता दिख रहा है। आम नागरिक और वकील जिला अदालतों में अब भी पुराने तरीको से काम कर रहे है।
News in short
- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग, एआई प्लेटफॉर्म और डिजिटल ऑर्डर सिस्टम लॉन्च किया
- जिला अदालतों में अब भी रोजाना के आदेश वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए जाते
- जमानत मंजूर या अंतिम आदेश जैसे चुनिंदा दस्तावेज ही ऑनलाइन दिखाई देते हैं
- ग्रामीण पक्षकारों को अब भी अपने केस की जानकारी के लिए वकीलों पर निर्भर रहना पड़ता है
- डिजिटल न्याय के बड़े दावों के बीच जिला अदालतों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए
News in detail
डिजिटल क्रांति के बड़े दावे, मंच पर तकनीक की चमक
कार्यक्रम में यह संदेश देने की कोशिश हुई कि अब न्याय व्यवस्था आम जनता के मोबाइल तक पहुंच रही है और अदालतों की कार्यवाही पहले से अधिक पारदर्शी और आसान होगी। लेकिन इसी चमकदार मंच के पीछे जिला अदालतों की वास्तविक स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
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जिला अदालतों की वेबसाइट पर सिर्फ अंतिम आदेश
स्थिति यह है कि किसी मामले में अंतिम फैसला, जमानत मंजूर या जमानत निरस्त जैसे आदेश ही पोर्टल पर दिखाई देते हैं। बाकी पूरी कार्यवाही कोर्ट रूम और वकीलों की फाइलों तक सीमित रह जाती है। ऐसे में “घर बैठे न्याय” का दावा सवालों के घेरे में आ जाता है।
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ग्रामीण पक्षकारों के लिए आज भी वकील ही सहारा
इसका सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ता है जो दूर-दराज गांवों से अदालत आते हैं। कई बार लोग केवल जानकारी लेने के लिए सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करते हैं क्योंकि कोर्ट की व्यवस्था के चलते अधिकांश समय वकीलों का भी फोन उठाना मुमकिन नहीं होता। डिजिटलीकरण का असली उद्देश्य आम नागरिक को राहत देना था, लेकिन जिला अदालतों की अधूरी ऑनलाइन व्यवस्था ने इस उद्देश्य को कमजोर कर दिया है।
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राहुल गांधी समन जैसे मामले बने उदाहरण
वहीं दूसरी ओर इलाहाबाद दिल्ली जैसे अन्य जिला अदालत में बाकायदा सुनवाई के बाद आदेश अपलोड किए जाते हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि जब हाई प्रोफाइल मामलों में भी आदेश ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होते, तो सामान्य नागरिकों के मामलों की स्थिति समझना और मुश्किल हो जाता है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित होती हैं।
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हाईकोर्ट और जिला अदालतों के बीच ‘डिजिटल गैप’
यही कारण है कि हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों के बीच एक बड़ा “डिजिटल गैप” साफ दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जिला स्तर पर हर सुनवाई और हर आदेश की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक डिजिटल न्याय की पूरी अवधारणा अधूरी रहेगी।
क्या डिजिटल न्याय सिर्फ HC तक सीमित?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या डिजिटल न्याय केवल बड़े कार्यक्रमों और लॉन्चिंग तक सीमित रहेगा, या फिर जिला अदालतों तक भी पारदर्शी और वास्तविक डिजिटल व्यवस्था पहुंचेगी।
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