रिटायर्ड IAS के पति की बढ़ी मुश्किलें, करोड़ों की प्रॉपर्टी धोखाधड़ी में FIR दर्ज करने के आदेश

Amresh Kushwaha | Aug 06, 2026, 08:45 IST
रिटायर्ड आईएएस अजीता वाजपेयी पांडे
भोपाल के एमपी नगर में करोड़ों की प्रॉपर्टी हड़पने के मामले में कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। रिटायर्ड आईएएस अजीता वाजपेयी पांडे के पति अमित पांडे सहित तीन आरोपियों पर एफआईआर के आदेश दिए गए हैं। फर्जी दस्तावेज, नकली सील और जाली हस्ताक्षर के सबूत मिले हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...



  • भोपाल के एमपी नगर में करोड़ों की प्रॉपर्टी हड़पने का आरोप लगा है।
  • आरोपी हैं रिटायर्ड आईएएस अजीता वाजपेयी पांडे के पति अमित पांडे।
  • कोर्ट ने पुलिस को तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
  • मामला फर्जी दस्तावेज, नकली सील और जाली हस्ताक्षर से जुड़ा बताया गया है।
  • आरोपियों को 27 अगस्त को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया गया है।

क्या है पूरा विवाद

भोपाल के एमपी नगर इलाके में एक प्रॉपर्टी विवाद ने बड़ा मोड़ लिया है। यह विवाद करोड़ों रुपए की कमर्शियल प्रॉपर्टी से जुड़ा है। भोपाल कोर्ट ने इस मामले में सख्त आदेश दिया है। कोर्ट ने पुलिस को तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर (First Information Report) दर्ज करने को कहा है। आरोपियों में रिटायर्ड आईएएस (Indian Administrative Service) अधिकारी अजीता वाजपेयी पांडे के पति अमित पांडे शामिल हैं।



दूसरे आरोपी का नाम विद्याचरण दुबे है। वे लैंडमार्क कॉम्प्लेक्स में रहते हैं। तीसरा आरोपी एक फर्जी व्यक्ति बताया गया है। कोर्ट ने एमपी नगर थाना पुलिस को 02 जुलाई को यह निर्देश दिया। पुलिस को तीनों आरोपियों को 27 अगस्त तक कोर्ट में पेश करना होगा।



कैसे शुरू हुआ मामला

यह पूरा विवाद एमपी नगर जोन-1 की एक बहुमंजिला इमारत से जुड़ा है। इस इमारत का नाम डायनेमिक सेंटर है। इसमें कई कमर्शियल दुकानें भी शामिल हैं। इस संपत्ति का मालिकाना हक पहले रंजीत शाह के नाम था। साल 2016 में रंजीत शाह का निधन हो गया था।



उनके निधन के बाद बीडीए (Bhopal Development Authority) ने लीज का नवीनीकरण किया। यह नवीनीकरण पीड़ित प्रवीण शर्मा के पक्ष में हुआ। इसके बाद अमित पांडे ने रंजीत शाह के खिलाफ सिविल सूट दायर कर दिया। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने यह सूट खारिज कर दिया। यह फैसला 20 जनवरी 2020 को आया था। कोर्ट ने प्रवीण शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया था।



इसके बावजूद अमित पांडे पीछे नहीं हटे। उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दी। इस अपील में उन्होंने एक अनुबंध पत्र पेश किया। आरोप है कि यह पत्र फर्जी था। पहले यह दस्तावेज सिर्फ सीमित दुकानों के लिए था। बाद में इसमें कई और दुकानें भी जोड़ दी गईं। इन नई दुकानों का पुराने केस से कोई संबंध नहीं था।



फर्जीवाड़े के सबूत

कोर्ट की जांच में कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं। सबसे पहली गड़बड़ी नकली सील और सिक्कों की मिली। जालसाजी के लिए 10-10 रुपए के दो स्टांप पेपर इस्तेमाल हुए। दोनों पेपर पर एक ही तारीख दर्ज थी। यह तारीख 9 अप्रैल 1997 थी। दोनों पर एक जैसा नंबर 3007 भी लिखा था। एक दस्तावेज पर स्टांप वेंडर मीना की असली सील नहीं थी। दूसरे दस्तावेज को असली दिखाने के लिए नकली सील लगाई गई।



जांच में एक और गड़बड़ी मिली। दस्तावेज के स्टांप नंबर के सातवें अंक पर ओवरराइटिंग पाई गई। कोर्ट ने इसे धोखाधड़ी का साफ संकेत माना। इसके अलावा फर्जी हस्ताक्षर का भी आरोप लगा। अमित पांडे पर मां निर्मला पांडे के निधन के बाद उनके नाम से हस्ताक्षर करने का आरोप है। यह हस्ताक्षर एक अनुबंध पत्र पर किए गए थे।



जांच में इन हस्ताक्षरों की बैंक खातों से तुलना की गई। पासपोर्ट पर मौजूद हस्ताक्षरों से भी मिलान किया गया। दोनों में साफ अंतर पाया गया। इसके अलावा रंजीत शाह के नाम से एक मुख्तारनामा भी सामने आया। यह मुख्तारनामा 31 मार्च 1997 का बताया गया। जिला अदालत पहले ही इसे कूटरचित घोषित कर चुकी है।



पुलिस की सुस्ती और शिकायत

पीड़ित प्रवीण शर्मा ने सबसे पहले पुलिस से मदद मांगी थी। उन्होंने 10 जून 2024 को एमपी नगर थाने में शिकायत दी। वहीं, पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद प्रवीण शर्मा ने भोपाल पुलिस कमिश्नर से संपर्क किया। यह शिकायत 2 जुलाई 2024 को दर्ज कराई गई थी।



फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। आखिरकार परेशान होकर प्रवीण शर्मा कोर्ट पहुंचे। उन्होंने अदालत से न्याय की गुहार लगाई। कोर्ट ने पूरे मामले की बारीकी से जांच की। कोर्ट को यह मामला धोखाधड़ी का लगा। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को सख्त आदेश दिए।



कोर्ट का रुख सख्त क्यों

कोर्ट ने इस मामले में साफ कहा कि सबूत ठोस हैं। जांच में मिली गड़बड़ियां धोखाधड़ी की तरफ इशारा करती हैं। इसी वजह से कोर्ट ने पुलिस को कड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों को तय समय में कोर्ट में पेश किया जाए। इससे मामले की जांच जल्दी शुरू हो सकेगी। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित पक्ष को राहत मिली है। कई महीनों की कानूनी लड़ाई के बाद यह आदेश आया है। अब पुलिस की जिम्मेदारी है कि जांच सही तरीके से हो।



अब आगे क्या होगा

कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस पर कार्रवाई का दबाव है। एमपी नगर थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी होगी। तीनों आरोपियों अमित पांडे, विद्याचरण दुबे और तीसरे आरोपी पर केस दर्ज होगा। पुलिस को इन्हें 27 अगस्त तक कोर्ट में पेश करना होगा। यह मामला यह भी दिखाता है कि प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की जांच कितनी जरूरी है। ऐसे मामलों में समय पर एफआईआर होना बहुत जरूरी माना जाता है। अब देखना यह है कि जांच में आगे क्या नए तथ्य सामने आते हैं।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर आम लोगों के लिए जरूरी है क्योंकि यह प्रॉपर्टी अधिकार और कानून के राज से जुड़ी है। भारतीय संविधान हर नागरिक को संपत्ति का कानूनी अधिकार देता है। अगर किसी की संपत्ति फर्जी दस्तावेजों से हड़पी जाए, तो यह गंभीर अपराध है।



यह मामला दिखाता है कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। कोर्ट का आदेश पुलिस की जवाबदेही तय करता है। साथ ही यह ध्यान रखना जरूरी है कि आरोप सिद्ध होने तक हर आरोपी कानूनन निर्दोष माना जाता है। यह खबर पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था में भरोसा बढ़ाती है।



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