राजस्व विभाग में बड़ा फेरबदल, 234 नायब तहसीलदार बने प्रभारी तहसीलदार, व्यापक तबादले
News in Short
- 234 नायब तहसीलदारों को प्रभारी तहसीलदार का प्रभार।
- विभागीय छानबीन समिति की अनुशंसा पर लिया गया फैसला।
- कई अधिकारियों को यथास्थान, कई का अंतर-जिला ट्रांसफर।
- 25 मार्च 2026 तक ज्वाइनिंग अनिवार्य।
- इनकार करने पर सूची से नाम हटाने की चेतावनी।
News in Detail
मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेशभर में 234 नायब तहसीलदारों को प्रभारी तहसीलदार का प्रभार सौंपा गया है। उनकी नई पदस्थापना तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। इससे राजस्व न्यायालयीन कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
छानबीन समिति की अनुशंसा पर बड़ा फैसला
राजस्व विभाग ने आदेश जारी किया है कि यह फेरबदल मध्यप्रदेश जूनियर प्रशासनिक नियम-2011 के तहत हुआ है। यह निर्णय विभागीय छानबीन समिति की 6 और 12 मार्च 2026 की बैठकों की अनुशंसा पर लिया गया है। स्थानांतरण नीति 2025 की अवधि समाप्त हो चुकी है। फिर भी राजस्व न्यायालयीन कार्यों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए शासन ने यह निर्णय लिया है।
राज्यभर में तबादले
जारी सूची के अनुसार कई अधिकारियों को उनके वर्तमान जिले में ही प्रभारी तहसीलदार का प्रभार दिया गया है, जबकि कई को दूसरे जिलों में भेजा गया है।
राजेश कौशिक को जबलपुर से मंडला भेजा गया है।
मनीष कुमार जैन को ग्वालियर में ही प्रभार दिया गया।
संजय यादव को इंदौर में यथावत रखा गया।
कपिल शर्मा को छतरपुर से राजगढ़ स्थानांतरित किया गया।
रिया जैन को साइबर तहसील भोपाल में ही प्रभार मिला।
हेमन्त अग्रवाल को विदिशा से सीहोर भेजा गया।
निर्मल पटले को नरसिंहपुर से छिंदवाड़ा भेजा गया।
विकास अग्रवाल को विदिशा से रायसेन स्थानांतरित किया गया।
कविराज मेहरा को मुख्यमंत्री कार्यालय भोपाल में ही प्रभार दिया गया।
कर्तव्य अग्रवाल को उमरिया में यथावत रखा गया।
पूरी सूची में 234 अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिनमें व्यापक प्रशासनिक संतुलन साधने की कोशिश की गई है।
देखिए पूरी लिस्ट
प्रभारी तहसीलदार को मिलेंगी पूर्ण शक्तियां
शासन के निर्देश के अनुसार, सभी अधिकारियों को प्रभारी तहसीलदार की शक्तियां मिलेंगी। वे अपने मूल पद नायब तहसीलदार के कार्य नहीं करेंगे। यह व्यवस्था अस्थाई होगी। नियमित नियुक्ति होने पर यह स्वतः समाप्त हो जाएगी।
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वेतन में नहीं मिलेगा अतिरिक्त लाभ
इस आदेश के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी गई है। प्रभारी तहसीलदार बनने के बावजूद अधिकारियों को वही वेतन और भत्ते मिलेंगे जो नायब तहसीलदार पद पर मिल रहे थे। उच्च पद का कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा। यह केवल प्रशासनिक आवश्यकता के तहत दी गई जिम्मेदारी है।
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25 मार्च तक ज्वॉइनिंग अनिवार्य
राज्य शासन ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को 25 मार्च 2026 तक नई पदस्थापना पर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। समयसीमा का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
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इनकार करने पर सख्त कार्रवाई के संकेत
आदेश में कहा गया है कि यदि कोई अधिकारी प्रभारी तहसीलदार का प्रभार लेने से इनकार करता है, तो उसका नाम सूची से हटा दिया जाएगा। जिन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच या आपराधिक मामले लंबित हैं, उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा।
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कार्यों में तेजी लाने की तैयारी
इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में लंबित राजस्व मामलों का शीघ्र निपटारा करना है। शासन को उम्मीद है कि प्रभारी तहसीलदारों की नियुक्ति से न्यायालयीन कार्यों में गति आएगी। आम नागरिकों को राहत मिलेगी।