कलेक्टर-SP ने कैसे कर दी अस्पताल पर कार्रवाई, हाई कोर्ट ने लगाई रोक, DGP को CCTV सुरक्षित रखने के निर्देश
आधी रात के निरीक्षण से शुरू हुआ विवाद
रीवा शहर के नए बस स्टैंड के पीछे पीटीएस मार्ग स्थित आयुष्मान नर्सिंग होम पर जिला प्रशासन की कार्रवाई अब हाई कोर्टपहुंच गई है। 23 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे कलेक्टर, एसपी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। प्रशासन के मुताबिक, निरीक्षण में अस्पताल संचालन से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद अस्पताल के संचालन पर अंतरिम रोक लगाने की कार्रवाई की गई।
शिकायत के बाद अस्पताल पहुंचा प्रशासन
प्रशासन के अनुसार, अस्पताल के एक डॉक्टर डॉ. केडी सिंह के खिलाफ अनैतिक और असामाजिक गतिविधियों से जुड़ी शिकायत सामने आई थी। इसी शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल के दस्तावेजों और व्यवस्थाओं की जांच की। करीब डेढ़ घंटे चले निरीक्षण में अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों से जानकारी ली गई तथा कई दस्तावेज भी जब्त किए गए।
तीन दिन का नोटिस और फिर अस्पताल बंद करने का आदेश
प्रशासन ने अस्पताल संचालक डॉ. प्रियंका सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसमें तीन दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया था। इसके बाद 24 सितंबर को अस्पताल का संचालन तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश जारी कर दिया गया। अस्पताल में भर्ती मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए गए थे।
अस्पताल ने हाई कोर्ट में कार्रवाई पर उठाए सवाल
आयुष्मान नर्सिंग होम प्राइवेट लिमिटेड ने इस कार्रवाई को हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय के. अग्रवाल और अधिवक्ता सिद्धार्थ कुमार शर्मा ने पक्ष रखा। उनका तर्क था कि अस्पताल को जारी नोटिस अस्पष्ट था और जवाब देने के लिए केवल तीन दिन का समय दिया गया। इसके बावजूद जवाब का इंतजार किए बिना अस्पताल बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया।
कलेक्टर-SP को अस्पताल जांचने का अधिकार नहीं?
अस्पताल की ओर से कोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि कलेक्टर, एसपी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को अस्पताल का निरीक्षण करने का अधिकार किस आधार पर मिला। याचिकाकर्ता ने कहा कि अस्पताल से जुड़ी कमियों और लाइसेंस की कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग और CMHO की निर्धारित प्रक्रिया है। मध्य प्रदेश नर्सिंग होम्स एंड क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 1973 में लाइसेंस और पंजीकरण से जुड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
एक महीने के नोटिस का भी दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अधिनियम की धारा 6 के तहत पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई से पहले एक कैलेंडर माह का नोटिस जरूरी है। जबकि अस्पताल को केवल तीन दिन का नोटिस दिया गया। आरोपों का विस्तृत विवरण भी नोटिस में नहीं था। अस्पताल की ओर से यह भी कहा गया कि पूरी कार्रवाई अस्पताल और पास के सरदार पेट्रोल पंप के CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई है।
सरकार ने कहा- अस्पताल बंद ही नहीं हुआ
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता एएस बघेल ने कोर्ट को बताया कि 24 सितंबर का अस्पताल बंद करने वाला आदेश अभी लागू नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, अस्पताल को संचालन की अनुमति है और तीन दिन के नोटिस को 30 दिन का नोटिस माना जा सकता है। अस्पताल विस्तृत जवाब दे सकता है और जवाब पर विचार के बाद अंतिम आदेश पारित किया जाएगा।
लेकिन कोर्ट को राज्य का जवाब संतोषजनक नहीं लगा
हाई कोर्ट (MP High Court) ने इस दलील को संतोषजनक नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि 24 सितंबर के आदेश में अंतरिम उपाय के तौर पर अस्पताल का संचालन तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश स्पष्ट रूप से दिया गया था। इसलिए राज्य की ओर से दिए गए तर्कों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने अस्पताल को दी बड़ी राहत
जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने 24 सितंबर के आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक 100 बिस्तरों वाले आयुष्मान अस्पताल का संचालन नहीं रोका जाए। यानी फिलहाल अस्पताल को राहत मिल गई है और वह मरीजों का इलाज जारी रख सकेगा।
DGP को CCTV सुरक्षित रखने का आदेश
मामले में CCTV फुटेज को लेकर हाई कोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक, मध्य प्रदेश को अस्पताल और पास के सरदार पेट्रोल पंप के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। यह फुटेज आगे मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है।
कलेक्टर रीवा से मांगा गया पूरा जवाब
हाई कोर्ट ने रिट याचिका में लगाए गए आरोपों को देखते हुए कलेक्टर रीवा से विस्तृत हलफनामा भी मांगा है। वहीं, CMHO रीवा को अस्पताल के खिलाफ शुरू की गई पूरी कार्रवाई से संबंधित रिकॉर्ड अगली सुनवाई तक पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब दो सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई
राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। मामले को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। फिलहाल हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद प्रशासन की कार्रवाई पर रोक है और अस्पताल का संचालन जारी रहेगा।