SC के आदेश के बाद भी महिलाओं को नहीं दिया आरक्षण, रीवा बार चुनाव पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
News in short
- डिस्ट्रिक्ट बार चुनाव में नहीं हुआ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन।
- रीवा जिला बार चुनाव में महिलाओं को नहीं दिया 30% आरक्षण।
- 25 मार्च को होने वाले मतदान पर लगी रोक।
- व्हाट्सएप के जरिए नोटिस सर्व, तत्काल जवाब तलब।
- स्टेट बर काउंसिल सहित डिस्ट्रिक्ट जज रीवा को भी नोटिस।
- अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को।
News in detail
रीवा डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन में गुरुवार 25 मार्च को होने वाले मतदान पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के महिला आरक्षण पर निर्देशों के बाद भी महिला अधिवक्ताओं को 30% आरक्षण न देने पर कोर्ट ने मध्य प्रदेश स्टेट बर काउंसिल सहित जिला जज रीवा को भी नोटिस जारी किया है।
चुनाव को लेकर यह पूरा विवाद उस समय सामने आया जब रीवा की अधिवक्ता जतिंदर कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 30% आरक्षण नहीं दिया गया है।
इस गंभीर मुद्दे को देखते हुए हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने तत्काल सुनवाई स्वीकार की और मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए प्राथमिकता दी।
व्हाट्सएप नोटिस और तुरंत पेशी के आदेश
चूंकि गुरुवार 25 मार्च को ही चुनाव के लिए मतदान प्रस्तावित था, इसलिए कोर्ट ने समय की कमी को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की। इलेक्शन कमेटी को नोटिस जारी किया गया और याचिकाकर्ता को यह विशेष छूट दी गई कि वह नोटिस व्हाट्सएप के माध्यम से सर्व कर सकती हैं।
इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि उसी दिन दोपहर 2:30 बजे तक संबंधित अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में उपस्थित होकर अपना जवाब प्रस्तुत करें।
चीफ इलेक्शन ऑफिसर सूर्य नाथ पांडे हुए owsh
कोर्ट के निर्देशानुसार रीवा डिस्ट्रिक्ट बार चुनाव के चीफ इलेक्शन ऑफिसर सूर्यनाथ पांडे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी और अपनी ओर से स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, लेकिन कोर्ट ने पूरे मामले को केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन के रूप में देखा।
महिलाओं को 10% भी प्रतिनिधित्व नहीं, कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि चुनाव में महिलाओं को 30% आरक्षण तो दूर, 10% तक भी प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि यह न केवल महिलाओं के अधिकारों का हनन है, बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना भी है। कोर्ट ने इसे गंभीर संवैधानिक मुद्दा मानते हुए सख्त रुख अपनाया।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का हवाला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों का विस्तार से हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि सभी बार एसोसिएशनों में महिलाओं को कम से कम 30% आरक्षण दिया जाना अनिवार्य है।
साथ ही यदि किसी बार में पर्याप्त संख्या में महिला अधिवक्ता मौजूद होने के बावजूद वे चुनाव में भाग नहीं लेती हैं, तो जिला जज की जिम्मेदारी होगी कि वे महिलाओं को नामांकित कर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करें। इसका उद्देश्य बार में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।
बार काउंसिल और जिला जज को भी नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने केवल चुनाव प्रक्रिया को रोकने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बार काउंसिल ऑफ मध्य प्रदेश और जिला जज रीवा को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यह चूक कैसे हुई और जिम्मेदारी किसकी है।
25 मार्च का चुनाव स्थगित, 8 अप्रैल को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने 25 मार्च को प्रस्तावित चुनाव पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी। इस सुनवाई में यह तय होने की संभावना है कि चुनाव प्रक्रिया को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाएगा और क्या महिलाओं को उनका पूर्ण आरक्षण अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।
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