लापरवाही पर पहले नपे MP के ये बड़े अफसर, बाद में मिल गई और अच्छी कुर्सी
The Sootr | Mar 24, 2026, 16:36 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अफसरों पर कार्रवाई की, लेकिन कई अफसरों को बाद में प्रमोशन या महत्वपूर्ण पद मिले। इसके बाद इन कार्रवाईयों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
मध्यप्रदेश की नौकरशाही में इन दिनों एक ट्रेंड चर्चा का विषय बना हुआ है। ऊपर से सख्ती का संदेश, ताबड़तोड़ कार्रवाई और जवाबदेही की बात की जा रही है और अंदरखाने तस्वीर कुछ और ही है।
सीएम मोहन यादव ने अपने सवा दो साल के कार्यकाल में जिस रफ्तार से अफसरों पर एक्शन लिया है, वह अपने आप में खास है। उन्होंने लापरवाही के मामलों में औसतन हर 46 दिन में एक आईएएस या आईपीएस अधिकारी पर कार्रवाई की है। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार बिलकुल भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।
सवाल यहीं से खड़ा होता है। क्या यह सख्ती दिखावे की है? क्योंकि जिन अफसरों पर लापरवाही के नाम पर कार्रवाई हुई है, उन्हीं को कुछ वक्त बाद बेहतर और प्रभावशाली पदों पर बैठा दिया गया है। यानी कार्रवाई का डंडा भी चला और इनाम की मिठाई भी मिल गई।
हाल ही में गुना एसपी रहे अंकित सोनी और सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को हटाने का फैसला इसी कड़ी का ताजा उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों अफसरों को हटाकर सख्त संदेश देने की कोशिश की है।
13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से डॉ. मोहन यादव ने प्रशासनिक सख्ती को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया है। सवा दो साल में 18 आईएएस-आईपीएस अफसरों पर लापरवाही के मामलों में कार्रवाई की गई है।
यह आंकड़ा सरकार की कड़ाई का प्रमाण कहा जा सकता है, लेकिन ‘द सूत्र’ की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई है, वह इसके उलट कहानी कहती है। कार्रवाई के बाद अधिकतर आईएएस अफसरों को या तो जल्दी ही नई जिम्मेदारी दे दी गई है या फिर पहले से ज्यादा प्रभावशाली पद पर बैठा दिया गया है।
दिलीप यादव: हटाए गए, फिर
![IAS Dilip Yadav]()
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। जिम्मेदारी तय करते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को हटा दिया गया।
यह कार्रवाई उस समय कड़ी मानी गई, लेकिन 16 दिन के भीतर ही तस्वीर बदल गई। पहले उन्हें भोपाल में उप सचिव बनाया गया और फिर मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का एमडी बना दिया गया।
![IAS Kshitij Singhal]()
सिवनी में 50 से ज्यादा गोवंश की हत्या का मामला सामने आया, जिससे पूरे जिले में तनाव और बंद जैसे हालात बन गए। इस मामले के बाद कलेक्टर रहे क्षितिज सिंघल को हटा दिया गया।
इसके बाद जो हुआ, उसने कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए। पहले सिंघल को मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का एमडी बनाया गया था। अब उन्हें इंदौर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है, जो प्रदेश की सबसे अहम शहरी पोस्टिंग मानी जाती है।
![IAS Kishor Kanyal]()
शाजापुर में एक वायरल वीडियो ने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया था। तत्काीन कलेक्टर किशोर कान्याल एक ड्राइवर से मीटिंग में ‘औकात’ पूछते नजर आए थे।
यह वीडियो वायरल हुआ तो कान्याल ने माफी मांगी, लेकिन सरकार ने उन्हें हटा दिया था। यह कार्रवाई ज्यादा दिन नहीं टिकी। पहले उन्हें मंत्रालय में उप सचिव बनाया गया, फिर श्योपुर कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई। कुछ वक्त बाद वे गुना कलेक्टर बनाए गए।
![IAS Deepak Arya]()
सागर में हुए दर्दनाक हादसे में नौ बच्चों की मौत हो गई थी। यह घटना पूरे सिस्टम की नाकामी को उजागर करने वाली थी। इस मामले में तत्कालीन सागर कलेक्टर दीपक आर्य को हटा दिया गया था। फिर सिर्फ सात दिन के भीतर उन्हें मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण का सीईओ बना दिया गया।
![IAS Rishi Garg]()
हरदा में पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत और 75 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर ऋषि गर्ग को हटा दिया गया था। उनके साथ एसपी संजीव कुमार कंचन पर भी कार्रवाई हुई थी। फिर आईएएस ऋषि गर्ग को पहले उप सचिव बनाया गया और बाद में मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी का एमडी बना दिया गया।
![IAS Tarun Rathi]()
गुना में बस हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद तत्कालीन कलेक्टर तरुण राठी को हटाया गया था। एक महीने बाद उन्हें वाल्मी का संचालक बनाया गया, फिर स्वास्थ्य आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई। अब वे जनजातीय विकास आयुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
ऐसे ही अलग-अलग मामलों में आधा दर्जन आईपीएस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। इनमें आईपीएस रसना ठाकुर, अभिषेक तिवारी, संजीव कुमार कंचन, राकेश कुमार सिंह, विजय कुमार खत्री और अभिजीत रंजन का नाम शामिल हैं।
इनमें से दो आईपीएस अफसर राकेश कुमार सिंह छिंदवाड़ा डीआईजी हैं, वहीं विजय कुमार खत्री छतरपुर डीआईजी हैं। हालांकि, आईपीएस अभिषेक तिवारी ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है।
![IPS Vijay Kumar Khatri]()
![IPS Rakesh Kumar Singh]()
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह पूरी कवायद आखिर है क्या? क्या यह सच में जवाबदेही तय करने की कोशिश है या सिर्फ जनता को संदेश देने की रणनीति? पहला पहलू यह है कि जिले का कलेक्टर या एसपी किसी भी घटना में आसान टारगेट होता है।
राजनीतिक दबाव में कार्रवाई हो जाती है, ताकि संदेश जाए कि सरकार सख्त है। दूसरा पहलू यह है कि अफसरों की संख्या सीमित है। सरकार के पास विकल्प भी सीमित हैं। ऐसे में उन्हीं अफसरों को कुछ समय बाद फिर नई जिम्मेदारी देनी पड़ती है। विशेषज्ञ इसे एक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं।
आईएएस दिलीप यादव | आईएएस क्षितिज सिंघल | कमिश्नर किशोर कान्याल | आईएएस दीपक आर्य | आईएएस तरूण राठी
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सवाल यहीं से खड़ा होता है। क्या यह सख्ती दिखावे की है? क्योंकि जिन अफसरों पर लापरवाही के नाम पर कार्रवाई हुई है, उन्हीं को कुछ वक्त बाद बेहतर और प्रभावशाली पदों पर बैठा दिया गया है। यानी कार्रवाई का डंडा भी चला और इनाम की मिठाई भी मिल गई।
हाल ही में गुना एसपी रहे अंकित सोनी और सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को हटाने का फैसला इसी कड़ी का ताजा उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों अफसरों को हटाकर सख्त संदेश देने की कोशिश की है।
सवा दो साल में 18 अफसरों पर कार्रवाई
यह आंकड़ा सरकार की कड़ाई का प्रमाण कहा जा सकता है, लेकिन ‘द सूत्र’ की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई है, वह इसके उलट कहानी कहती है। कार्रवाई के बाद अधिकतर आईएएस अफसरों को या तो जल्दी ही नई जिम्मेदारी दे दी गई है या फिर पहले से ज्यादा प्रभावशाली पद पर बैठा दिया गया है।
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यह कार्रवाई उस समय कड़ी मानी गई, लेकिन 16 दिन के भीतर ही तस्वीर बदल गई। पहले उन्हें भोपाल में उप सचिव बनाया गया और फिर मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का एमडी बना दिया गया।
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सिवनी में 50 से ज्यादा गोवंश की हत्या का मामला सामने आया, जिससे पूरे जिले में तनाव और बंद जैसे हालात बन गए। इस मामले के बाद कलेक्टर रहे क्षितिज सिंघल को हटा दिया गया।
इसके बाद जो हुआ, उसने कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए। पहले सिंघल को मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का एमडी बनाया गया था। अब उन्हें इंदौर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है, जो प्रदेश की सबसे अहम शहरी पोस्टिंग मानी जाती है।
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