पाइपलाइन बिछाने के नाम पर रीवा में हजारों पेड़ों की कटाई, रिकॉर्ड में 65 पेड़
रीवा मेंबाणसागर परियोजना की पाइपलाइनबिछाने का काम चल रहा है।इसके नाम पर सागौन के घनेजंगल बेदर्दी से काटेजा रहे हैं। वन विभाग केरिकॉर्ड में सिर्फ 65पेड़ काटे जाने कीबात दर्ज है। लेकिनमौके पर हकीकत इससे बिल्कुलअलग है। जंगल कीपड़ताल करने पर पता चला की हजारों पेड़ों कीकटाई सामने आई है।
यहपूरा इलाका घना औरपहाड़ी है। इसी वजहसे यहां कटाईआसानी से किसी की नजरमें नहीं आती। जैसेही इसकी भनक लगी,टीम मौके परपहुंची और सच्चाईखंगाली।
सफेद बाघ की जन्मस्थली का जंगल
रीवा वन मंडलविंध्य और कैमोरपर्वतमाला के बीच फैलाहै। यह करीब एक लाखहेक्टेयर क्षेत्र में है।यहां सागौन, महुआ,तेंदू और खैर केबहुमूल्य पेड़ पाए जातेहैं। यह जंगल जैवविविधता के लिए देशभर मेंमशहूर है।
25 मई1951 को यहीं सेदुनिया का पहला सफेदबाघ मोहन पकड़ा गयाथा। उस समयमहाराजा मार्तंड सिंहने यह बाघ दुबरीगेम सेंचुरी सेपकड़ा था। अबहजारों पेड़ कटने सेहाथी, तेंदुआ, भालूऔर नीलगाय जैसेवन्यजीवों का आवास खतरेमें है।
क्या है बाणसागर परियोजना
बाणसागर मध्यप्रदेश की एक बड़ीबहुउद्देशीय नदीपरियोजना है। यह सोननदी पर बनाईगई है। इसकामुख्य बांध देवलोंदक्षेत्र में स्थितहै। साल 1973 मेंमध्य प्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार केबीच समझौता हुआ था।इस परियोजना कामकसद सिंचाई, बिजलीउत्पादन और जलसंरक्षण है।
छुहिया घाटी में मिले कटाई के सबूत
मीडिया जबरीवा-सीधी मार्ग कीछुहिया घाटीपहुंची तो यहां जगह-जगहताजा कटे पेड़ोंके ठूंठमिले। जहां पहले घनाजंगल था, वहां अब खुली जमीन नजर आती है।कटाई के निशान घाटी में नीचे तकफैले हुए थे।
गोविंदगढ़ सेकुशमानी के जंगलों में करीब आठकिलोमीटर अंदर तक यही हाल है। यहां भी बड़ेपैमाने पर पेड़ों कासफाया मिला। जंगल केबीचों-बीच फोरलेन जैसाचौड़ा रास्ता बनादिया गया है।ग्रामीणों ने बताया कि रातमें मशीनें औरगतिविधियां तेज हो जाती हैं।यह सिलसिला लंबेसमय से चल रहा है।
अधिकारियों का क्या कहना है?
डीएफओ लोकेशनिरापुरे का कहना है कि बाणसागर परियोजना के तहत पाइपलाइन और पहुंच मार्ग के लिए फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट के तहत सिर्फ 65 पेड़ों को काटने की अनुमति ली गई है। छुहिया घाटी में कोई कटाई नहीं हुई है।
वहींगोविंदगढ़ बीट के रेंजर अंबुजनयन पांडेय ने छतरपुरट्रांसफर का हवाला देकरकुछ भी कहने से मनाकर दिया। जबकि वह अब तक रीवासे कार्यमुक्त नहींहुए हैं।
ग्रामीणों का क्या कहना है?
ग्रामीण रामलाल पटेल का कहना है कि मौके की स्थिति देखकर 65 पेड़ों की कटाई का दावा पूरी तरह झूठा लगता है। जहां घना जंगल था वहां अब लंबा-चौड़ा रास्ता साफ नजर आ रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पहाड़ काटने से नया खतरा
पड़तालमें यह भी सामने आया किसिर्फ पेड़ ही नहीं,पहाड़ भी असुरक्षिततरीके से काटे गए हैं। यहकटाई छुहिया घाटी में सड़ककिनारे हुई है। इससेबारिश के मौसम मेंभूस्खलन का खतरा बढ़ गयाहै। पत्थर गिरनेसे सड़क हादसों का जोखिमभी कई गुना बढ़ गया है।
आंकड़ों का गणित क्या कहता है
घने जंगल में एकहेक्टेयर में औसतन चार सौ से एक हजारपेड़ होते हैं।अगर छह किलोमीटर लंबा और चार से छहमीटर चौड़ा रास्ता बनायाजाए, तो करीब 2.4 से 3.6हेक्टेयर जंगल प्रभावित होता है।इस हिसाब से कम से कम एक हजार सेतीन हजार 500 पेड़ कटने चाहिए थे। सिर्फ 65 पेड़ों की कटाईका रिकॉर्ड इसी गणित से झूठासाबित होता है।
जांच की मांग तेज
आगे क्या होगा, यह प्रशासन कीकार्रवाई पर निर्भर करेगा। स्टंपकाउंट, जीपीएस मैपिंग और सैटेलाइटइमेज से ही असली आंकड़े सामनेआ सकते हैं। अगर जांचनिष्पक्ष हुई तो कागजी दावों औरजमीनी हकीकत का पूरा अंतरखुलकर सामने आएगा।
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