रीवा में गर्भवती महिलाओं को लगाए ब्लैक लिस्टेड इंजेक्शन, याददाश्त हुई कमजोर, ऐसे हुआ खुलासा
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में इंजेक्शन से पांच महिलाओं की याददाश्त प्रभावित होने का मामला सामने आया है। जांच में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही उजागर हुई है। हेल्थ कार्पोरेशन ने स्टोर कीपर को दोषी मानते हुए निलंबित किया है, वहीं कांग्रेस ने मामले को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोला है।
जांच में खुली अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही
स्टोर कीपर निलंबित, 30 इंजेक्शन अब भी लापता
हेल्थ कार्पोरेशन के एमडी मयंक अग्रवाल ने जांच के आधार पर स्टोर कीपर को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है। बताया गया है कि ब्लैकलिस्टेड इंजेक्शन का बैच दिसंबर में अमान्य घोषित किया गया था, फिर भी 25 फरवरी को उसी बैच के 100 इंजेक्शन स्टोर से निकाले गए। इनमें से 5 इंजेक्शन महिलाओं को दे दिए गए और 30 अब भी गायब हैं।
कांग्रेस ने साधा सरकार पर निशाना, कार्रवाई की मांग
मध्य प्रदेश कांग्रेस की उपाध्यक्ष कविता पांडेय ने इस मामले को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टोर कीपर को बलि का बकरा बनाया गया है और ब्लैकलिस्टेड दवाइयों के टेंडर जारी करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।अस्पताल अधीक्षक राहुल मिश्रा ने कहा है कि सभी पांचों महिलाओं की हालत अब स्थिर है और उन्हें पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही डिस्चार्ज किया गया था। अस्पताल प्रबंधन जांच में सहयोग कर रहा है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है।
इस्तीफे की मांग और जवाबदेही की मांग तेज
मध्य प्रदेश कांग्रेस की उपाध्यक्ष कविता पांडेय ने अस्पताल अधीक्षक और हेल्थ कॉर्पोरेशन के एमडी से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक चूक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में लापरवाही को लगातार नजरअंदाज कर रही है।
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