नगर निगम में जमकर चले लात-घूंसे, बीजेपी और कांग्रेस पार्षदों ने एक-दूसरे का फाड़ा कुर्ता
मध्य प्रदेश के रीवा नगर निगम परिषद से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां बीजेपी और कांग्रेस पार्षद आपस में ऐसे भिड़े की एक-दूसरे का कुर्ता तक फाड़ दिया।। दरअसल, रीवा नगर निगम परिषद बैठक में बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और बीजेपी के पार्षदों के बीच पहले तीखी नोकझोंक और हाथापाई हुई। इसके बाद जो हुआ वो हैरान कर देने वाला था। यह घटना अप्रत्याशित और शर्मनाक रही, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
महापुरुषों की मूर्तियों पर विवाद
गंगाजल छिड़कने की घटना
यह मामला तब और बढ़ा जब कांग्रेस पार्षद मनीष नामदेव ने गंगाजल बताकर पानी की बोतल से सदन में सभी पार्षदों और अध्यक्ष पर पानी छिड़क दिया। कांग्रेस का कहना था कि यह एक रणनीतिक कदम था, जबकि बीजेपी ने इसे "बाथरूम का गंदा पानी" करार दिया। मनीष नामदेव का कहना था कि यह सुनियोजित हंगामा था और गंगाजल छिड़कने का उद्देश्य बीजेपी के विरोध को उठाना था, खासकर क्योंकि वह ओबीसी समाज से आते हैं।
मारपीट और सदन की कार्यवाही स्थगित
इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया, जिससे मारपीट तक की नौबत आ गई और पार्षद एक-दूसरे का कुर्ता फाड़ते नजर आए। वहीं इस पूरे मामले पर बीजेपी पार्षदों ने कांग्रेस पार्षदों से माफी की मांग की, जबकि कांग्रेस पार्षद इसे बीजेपी द्वारा पूर्व नियोजित हिंसा बता रहे। वार्ड-19 के बीजेपी पार्षद समीर शुक्ला ने आरोप लगाया कि उनका गला दबाने की कोशिश की गई और इसे जानलेवा साजिश बताया। नगर निगम अध्यक्ष को बीच-बचाव करना पड़ा और सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा।
ओबीसी समाज का आंदोलन
कांग्रेस पार्षद मनीष नामदेव ने कहा कि यह हमला बीजेपी की ओर से ओबीसी समाज के खिलाफ था। उनका कहना था, "बीजेपी को ओबीसी का गंगाजल छिड़कना खटका। हम इस मुद्दे पर आंदोलन करेंगे और बीजेपी के खिलाफ आवाज उठाएंगे।"
बीजेपी का पलटवार
वहीं, बीजेपी के पार्षद अंबुज रजक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षदों ने वरिष्ठ बीजेपी पार्षद दीनानाथ वर्मा पर गंगाजल बताकर बाथरूम का गंदा पानी डाला। यह घटना सदन में और भी गहमा-गमी का कारण बनी। रजक ने कहा कि यह अपमानजनक था और इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के पार्षद कितने नीचे गिर गए हैं।
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वहीं अब यह घटना रीवा नगर निगम परिषद की बैठक में हुई अप्रत्याशित हिंसा और हंगामे को दर्शाती है, जो राजनीतिक असहमति और आपसी आरोप-प्रत्यारोप का कारण बनी। इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली और राजनीतिक माहौल पर प्रश्नचिह्न उठता है।
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