एक्सीडेंट में सिर्फ ड्राइवर नहीं… गलत लाइसेंस, गड्ढे और खराब सड़क बनाने वालों पर भी सवाल
News in short
सड़क दुर्घटनाओं को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर।
कोर्ट ने ट्रांसपोर्ट विभाग समेत कई एजेंसियों को नोटिस जारी किया।
ड्राइविंग लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर भी कोर्ट ने जवाब मांगा।
मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।
हर हादसे के पीछे सिर्फ ड्राइवर नहीं, पूरी व्यवस्था जिम्मेदार।
News in Detail
मध्यप्रदेश में सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। मौतों के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई। जबलपुर के समाजसेवी आशीष शिवहरे ने याचिका दायर की। याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। सड़क हादसों के कारणों पर सवाल उठाए गए। अधिकतर मामलों में चालक को दोषी ठहराया जाता है।
कई हादसे खराब सड़क इंजीनियरिंग से होते हैं। खतरनाक मोड़ भी दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। सड़कों के गड्ढे भी हादसों की वजह हैं। अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था भी बड़ा कारण है। सड़क बनाने वाले विभागों की जिम्मेदारी तय हो। सड़क रखरखाव करने वाले विभाग भी जवाबदेह हों। यातायात व्यवस्था संभालने वाले विभाग भी जिम्मेदार हों।
गलत ढंग से दिए जा रहे लाइसेंस
सुनवाई के दौरान एक और मुद्दा उठा। ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया पर सवाल उठे। कई लोगों को बिना प्रशिक्षण लाइसेंस मिल जाता है। कई मामलों में नियमों की जानकारी भी नहीं होती। याचिका में व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करने की मांग हुई। बिना परीक्षण लाइसेंस जारी होने की बात कही गई। ऐसे मामलों में चालक अकेला जिम्मेदार नहीं माना जाए। लाइसेंस जारी करने वाली व्यवस्था भी जिम्मेदार हो। हाईकोर्ट ने ट्रांसपोर्ट विभाग से जवाब मांगा है। लाइसेंस प्रक्रिया पर जानकारी देने को कहा गया। नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया।
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एक ही याचिका में कई तरह की मांगें
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच में सुनवाई हुई। जस्टिस विनय सराफ भी बेंच का हिस्सा थे। अदालत ने याचिका पर प्रारंभिक टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने कई मुद्दे एक साथ उठाए। एक ही याचिका में कई मांगें शामिल की गईं। अदालत ने संकेत दिया कि सड़क सुरक्षा और लाइसेंस व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अलग-अलग स्तर पर विचार किया जा सकता है। क्योंकि यह विषय व्यापक और कई विभागों से जुड़ा हुआ है।
हेलमेट लॉकर वाली मांग पर कोर्ट की टिप्पणी
याचिका में दोपहिया वाहनों में हेलमेट रखने के लिए इन-बिल्ट लॉकर अनिवार्य करने की मांग भी रखी गई थी। कोर्ट ने हेलमेट सुरक्षा पर टिप्पणी की। बाजार में छोटे हेलमेट लॉक उपलब्ध हैं। ये लॉक बाइक में आसानी से लगाए जाते हैं। हेलमेट सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। अनिवार्य व्यवस्था पर अलग से विचार संभव है।
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कई विभागों से मांगा गया जवाब
सड़क सुरक्षा पर जनहित याचिका अदालत में दायर हुई। मध्यप्रदेश सरकार को पक्षकार बनाया गया। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय भी पक्षकार है। मध्य प्रदेश पुलिस महानिदेशक को भी शामिल किया गया। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर और पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर भी पक्षकार हैं।
जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव का नाम भी जोड़ा गया। यातायात पुलिस और जबलपुर नगर निगम भी पक्षकार हैं। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी भी पक्षकार है। अदालत ने सभी विभागों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सड़क सुरक्षा पर जवाब मांगा है।
सड़क सुरक्षा पर गंभीर हुई अदालत
हाईकोर्ट ने मामले को संवेदनशील बताया। सड़क सुरक्षा कई एजेंसियों की संयुक्त जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह बात स्पष्ट कही। ट्रांसपोर्ट विभाग से जानकारी मांगी गई। ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया पर सवाल उठे। लाइसेंस जारी करने के मानकों पर जानकारी मांगी गई।
सड़क सुरक्षा से जुड़े विभागों को नोटिस मिला। सभी विभागों से जवाब मांगा गया। अगली सुनवाई सात अप्रैल तय हुई। सड़क दुर्घटना रोकने के कदमों पर जवाब मांगा गया। याचिकाकर्ता के सभी मुद्दे अगली सुनवाई में शामिल होंगे। जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच में आएगी। सड़क हादसों में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो सकती है।