MP का गजब सिस्टम! 4.5 किमी सड़क बनाई, 100 मीटर की पुलिया बनाना भूले अफसर

Sandeep Kumar | Aug 09, 2026, 20:45 IST
एमपी का गजब सिस्टम
शहडोल में 4.5 किलोमीटर लंबी सड़क बनकर तैयार हो गई। लेकिन बीच में पड़ने वाली 100 मीटर की पुलिया अब तक नहीं बनी। इस वजह से बारिश में नदी पार करना मुश्किल हो जाता है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • शहडोल में 4.5 किलोमीटर सड़क तैयार हुई।
  • सड़क के बीच 100 मीटर पुलिया अधूरी है।
  • बारिश में नदी पार करना मुश्किल होता है।
  • ग्रामीण घंटों पानी कम होने का इंतजार करते हैं।
  • स्कूली बच्चों और मरीजों को परेशानी होती है।

सड़क तो चमक गई, पुलिया कहां है

एमपी में सरकारी निर्माण के कारनामे किसी से छिपे नहीं हैं। शहडोल से सामने आई यह तस्वीर इसका ताजा उदाहरण है। यहां 4.5 किलोमीटर लंबी सड़क चमचमाती हुई बनकर तैयार हो गई। लेकिन बीच में आने वाली महज 100 मीटर की पुलिया बनाना प्रशासन भूल गया।



आज तक यह पुलिया नहीं बन पाई। यानी सड़क दौड़ने के लिए तैयार है। लेकिन रास्ते में नदी आते ही पूरा विकास ठहर जाता है। बारिश में नदी उफान पर आती है। तब ग्रामीण घंटों पानी उतरने का इंतजार करते हैं।



अब सवाल उठ रहा है। जब सड़क को जोड़ने वाली पुलिया ही नहीं बनी, तो लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई यह सड़क आखिर किसके काम की।



कहां का है यह मामला

यह हैरान कर देने वाला मामला आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले का है। जनपद पंचायत बुढ़ार के ग्राम पंचायत टेघा से छिनमार मार्ग पर यह स्थिति बनी है। लोक निर्माण विभाग (PWD – Public Works Department) की ओर से यहां करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।



मार्ग के बीच नदी पर प्रस्तावित करीब 100 मीटर लंबी पुलिया का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है। गर्मी में किसी तरह ग्रामीण नदी पार कर आवागमन कर लेते हैं। लेकिन बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही रास्ता पूरी तरह बाधित हो जाता है।



जरूरी हिस्से को छोड़ दिया अधूरा

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में उन्हें घंटों पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है। कई बार जरूरी काम होने के बावजूद लोग नदी के दूसरी तरफ फंस जाते हैं।



स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण की प्राथमिकता ही उलट कर रख दी गई। पहले नदी पर पुलिया बननी चाहिए थी, ताकि सड़क का आवागमन निर्बाध हो सके। लेकिन यहां सड़क तो तैयार कर दी गई और सबसे जरूरी हिस्से को अधूरा छोड़ दिया गया।



यह सवाल सिर्फ इस एक गांव का नहीं है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसी शिकायतें सामने आती हैं, जहां निर्माण कार्य आधा-अधूरा छोड़ दिया जाता है। सड़क, पुल और पुलिया जैसे कामों में तालमेल की कमी आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डालती है।



ग्रामीणों ने की ये मांग

अब ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क का एक छोटा-सा हिस्सा ही उसे उपयोगी बनाने के लिए जरूरी था, तो उसे छोड़कर पूरा निर्माण किस उद्देश्य से कराया गया। ग्रामीण जल्द पुलिया निर्माण शुरू कराने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि बारिश में उनका संपर्क न टूटे। साथ ही सरकारी धन से बनी सड़क वास्तव में उनके काम आ सके।



प्रशासन का पक्ष

लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच करके ही बताया जा सकता है कि किस ठेकेदार ने काम किया। साथ ही यह भी बताया जा सकेगा कि पुलिया निर्माण अब तक क्यों नहीं हुआ। फिलहाल विभाग की ओर से कोई ठोस समयसीमा सामने नहीं आई है, जिससे कब तक पुलिया बनेगी, यह साफ नहीं है।



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