सागर शराब कांड: बची जान, पर छिन गई आंखों की रोशनी, 150 से ज्यादा मरीजों पर खास नजर
सागर शराब कांड की त्रासदी का असर अब अस्पताल से घर लौट चुके मरीजों में भी नजर आ रहा है। 8 से 9 मरीजों में गंभीर दृष्टि समस्या सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में मेडिकल कैंप शुरू कर दिए हैं।
डिस्चार्ज हो चुके 150 से ज्यादा मरीजों की भी लगातार निगरानी की जा रही है। इस मामले में अब तक 33 आरोपी नामजद किए जा चुके हैं, जिनमें से 18 गिरफ्तार और 13 फरार बताए गए हैं।
शराबकांड के बाद अब आंखों की जांच पर जोर
बंडा तहसील के प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर और कैंपों के जरिए मरीजों का फॉलोअप कर रही हैं। इसका मकसद सिर्फ पहले से इलाज करा चुके मरीजों की स्थिति जानना ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी पहचानना है, जिनमें अभी हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 10 कैंपों में दो प्रमुख तरह की जांच की जा रही है, पहली सामान्य स्वास्थ्य जांच और दूसरी नेत्र जांच। यह कैंप 11 से 19 सितंबर तक चलेंगे। अगर किसी डिस्चार्ज मरीज में समस्या मिलती है, तो उसे जरूरी उपचार दिलाया जाएगा और जरूरत के अनुसार संस्थागत इलाज की व्यवस्था भी की जाएगी।
धुंधला दिखना बना सबसे बड़ी शिकायत
फॉलोअप कैंपों में डॉक्टरों के सामने सबसे ज्यादा धुंधला दिखाई देने की शिकायतें आ रही हैं। इलाज से जुड़े चिकित्सकों के मुताबिक मिथाइल अल्कोहल के संपर्क में आने से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है और गंभीर स्थिति में इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
डॉक्टरों ने बताया कि हर मरीज में स्थिति एक जैसी नहीं होती। नुकसान कितना हुआ है, इसी पर सुधार निर्भर करता है। विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ मरीजों में 5 से 6 सप्ताह के भीतर दृष्टि में सुधार की संभावना है।
मामले में अब तक 33 आरोपी नामजद, 18 गिरफ्तार
बंडा तहसील के गांवों में संदिग्ध मिलावटी शराब से हुई मौतों के बाद प्रशासन ने अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में अब तक 33 आरोपी नामजद किए जा चुके हैं, जिनमें से 18 को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 13 अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में न्यायिक जांच कराने और पीड़ित परिवारों को ज्यादा मुआवजा दिए जाने की मांग की है। वहीं प्रशासन की तरफ से अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई लगातार जारी है।
अब स्वास्थ्य विभाग किन बातों पर रख रहा नजर
स्वास्थ्य विभाग फिलहाल डिस्चार्ज हो चुके मरीजों की नियमित जांच कर रहा है और आंखों की रोशनी व धुंधलेपन की विशेष निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही हल्के लक्षण वाले नए मरीजों की पहचान भी की जा रही है, ताकि समय रहते उन्हें इलाज मिल सके। जिन मरीजों की स्थिति गंभीर पाई जाएगी, उन्हें जरूरत के अनुसार अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया जाएगा।
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