सेज ग्रुप के ग्रीन हिल्स विवाद में घिरा नगरीय विकास विभाग: अब नोटिस से ‘एक्शन’ का दावा
कोलार स्थित सागर बिल्डर सेज डेवलपर्स के ग्रीन हिल्स प्रोजेक्ट पर नगरीय विकास विभाग ने नोटिस जारी किया है, लेकिन इस नोटिस ने नगरीय विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2021 में विधानसभा में शिकायत पर सवाल उठने के बावजूद विभाग ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। अब 5 साल बाद नोटिस थमाकर ‘एक्शन’ का दावा किया जा रहा है। ऐसे में यह सिर्फ बिल्डर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का मामला बन गया है।
क्या है मामला: प्रोजेक्ट से लेकर नोटिस तक
सेज ग्रुप ने कोलार में सागर ग्रीन हिल्स प्रोजेक्ट विकसित किया। यह निर्माण कलियासोत नदी के कैचमेंट एरिया के पास होने का आरोप है। 2013 की अनुमति के नियमों का उल्लंघन सामने आया। अब नगरीय विकास विभाग ने अनुमतियां निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की है।
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नोटिस पर नजर, नीयत पर शक
प्रदेश में अवैध निर्माण पर नोटिस जारी करना नई बात नहीं है। फर्क तब पड़ता है जब नोटिस के बाद कार्रवाई भी दिखे। सूत्रों के अनुसार, पहले भी कई मामलों में विभाग ने सिर्फ कागजी कार्रवाई की, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए।
इस बार भी सेज ग्रुप को नोटिस में वही पुरानी लाइन है-“संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।”यही लाइन विभाग की मंशा पर सवाल खड़ा करती है कि क्या यह सख्ती है या सिर्फ दबाव बनाने की औपचारिकता है?
2021 का सवाल: शिकायत थी, फिर चुप्पी क्यों?
तत्कालीन विधायक अर्जुन सिंह काकोडिया ने 2021 में विधानसभा में इस पूरे मामले को उठाया था। आरोप साफ थे- नियमों का उल्लंघन और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी। इसके बावजूद विभाग ने तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की?
जब निर्माण जारी था, तब निगरानी कहां थी?
यह देरी अब सीधे-सीधे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है।
- रहवासी संकट में: पैसा भी फंसा, सुरक्षा भी खतरे में।
- इस प्रोजेक्ट में घर खरीदने वाले लोग दोहरी मार झेल रहे हैं।
- मकानों में दरारें दिखने लगी हैं।
- जमीन धंसने की शिकायतें सामने आई हैं।
- स्ट्रक्चर की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं।
यानी यह सिर्फ नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और भविष्य का संकट भी है।
नियमों से खिलवाड़: कैसे बढ़ाई ऊंचाई, कैसे बिके पेंटहाउस
अनुमति 18 मीटर तक थी, निर्माण 21 मीटर तक पहुंचा। 16 पेंटहाउस अवैध रूप से बनाए और बेचे गए। एक-एक पेंटहाउस 80 लाख से एक करोड़ तक में बेचा गया। यह साफ दिखाता है कि नियमों को नजरअंदाज कर मुनाफे का खेल खेला गया।
जिम्मेदारी से बच नहीं सकता विभाग
जब नक्शा पास होता है, तो निगरानी की जिम्मेदारी भी विभाग की होती है। निर्माण के दौरान निरीक्षण क्यों नहीं हुआ?
उल्लंघन पर तुरंत रोक क्यों नहीं लगी?
क्या सिर्फ बिल्डर ही दोषी है या अफसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी? इन सवालों से विभाग बच नहीं सकता।
- खतरे के संकेत: दीवारों में दरार, जमीन में सीलन।
- प्रारंभिक जांच में जो सामने आया, वह चिंताजनक है।
- रिटेनिंग वॉल में दरारें।
- पानी की सीलन से जमीन कमजोर।
- स्ट्रक्चर को संभावित रूप से खतरनाक माना गया।
यह स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
आगे की राह: 29 अप्रैल की सुनवाई अहम
सेज ग्रुप को 29 अप्रैल को जवाब देने के लिए बुलाया गया है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो प्रोजेक्ट को अवैध घोषित किया जा सकता है।
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लेकिन, असली सवाल वही रहेगा
क्या इस बार कार्रवाई होगी या फिर मामला फाइलों में दब जाएगा? नोटिस नहीं, जवाबदेही चाहिए। यह मामला अब सिर्फ बिल्डर तक सीमित नहीं रहा।
नगरीय विकास विभाग की भूमिका और नीयत दोनों सवालों के घेरे में हैं। अगर 2021 में ही कार्रवाई होती, तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती।
अब देखना होगा कि क्या विभाग खुद पर भी उतनी ही सख्ती दिखाएगा, जितनी बिल्डर पर दिखाने का दावा कर रहा है?