सागर शराबकांड में देवड़ा घिरे, सिंघार-जोकचंद ने पूछा-किसे बचा रहा नेक्सस ?
ऐसे समझें पूरा मामला
- सागर में जहरीली शराब से 11 मौतों की खबर
- सिंघार ने शराब नेटवर्क पर गंभीर सवाल उठाए
- आबकारी आयुक्त के सागर पहुंचने पर सवाल
- जोकचंद ने देवड़ा से इस्तीफा मांग लिया
- डिस्टलरी मालिकों पर कार्रवाई को लेकर सवाल
सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों ने मध्यप्रदेश की आबकारी व्यवस्था को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब मामला सिर्फ मौतों और कार्रवाई तक सीमित नहीं है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शराब के कथित नेटवर्क और आबकारी आयुक्त के सागर पहुंचने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किसे बचाने की कोशिश हो रही है? वहीं मल्हारगढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ चुके श्यामलाल जोकचंद ने आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग कर दी है।
मौतों के बाद फिर वही सवाल-जिम्मेदार कौन?
सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद सरकार ने अधिकारियों पर कार्रवाई की है। लेकिन विपक्ष का सवाल इससे आगे का है। आखिर जहरीली शराब लोगों तक पहुंची कैसे और उसे रोकने वाली सरकारी मशीनरी उस समय क्या कर रही थी?
यही सवाल अब आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि हर शराबकांड के बाद जांच, कार्रवाई और कड़ी व्यवस्था के दावे होते हैं, लेकिन कुछ समय बाद पूरा मामला शांत पड़ जाता है।
सिंघार का सबसे बड़ा सवाल-आयुक्त किसे बचाने पहुंचे?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के सागर पहुंचने को लेकर सीधे सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आयुक्त विभागीय व्यवस्था संभालने पहुंचे थे या किसी कथित नेक्सस और डिस्टलरी मालिकों को बचाने?
सिंघार ने यह भी सवाल उठाया कि जिला आबकारी अधिकारी और बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। डिस्टलरी मालिकों पर केस को लेकर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।
यूपी नहीं, एमपी में नेटवर्क का दावा
सिंघार का दावा है कि सरकार शराब नेटवर्क को उत्तर प्रदेश से जोड़कर अपना पल्ला झाड़ रही है, जबकि कथित नेटवर्क के तार मध्यप्रदेश से जुड़े हो सकते हैं।
उन्होंने उज्जैन और धार में कथित रूप से जहरीली शराब तैयार होने और उसके सागर तक पहुंचने का आरोप लगाया। साथ ही उज्जैन के कथित शराब नेटवर्क की जांच और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट बयान की मांग की।
आदेश बदलने का आरोप भी बना बड़ा मुद्दा
सिंघार ने आबकारी विभाग के आदेशों में कथित बदलाव को भी सवालों के घेरे में रखा। उनका आरोप है कि किसी ब्रांड की शराब को पहले पीने योग्य नहीं बताया गया और कुछ समय बाद आदेश बदलकर उसे पीने योग्य बताया गया।
अगर जांच में ऐसा बदलाव प्रमाणित होता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल बन सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।
जोकचंद ने देवड़ा से मांगा इस्तीफा
मल्हारगढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ चुके कांग्रेस नेता श्यामलाल जोकचंद ने भी उपमुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा पर हमला बोला।
जोकचंद ने 25 जुलाई 2021 के मल्हारगढ़ जहरीली शराबकांड का हवाला देते हुए कहा कि उस घटना में कई गरीब परिवारों ने अपने सदस्य खोए थे। उनके मुताबिक तब भी कार्रवाई और सहायता के दावे हुए, लेकिन पीड़ित परिवारों के सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए।
उनका सीधा सवाल है-अगर आबकारी विभाग जहरीली शराब को रोकने में विफल रहा है, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी कौन लेगा?
‘सरकार कंट्रोल करने में असफल’-विपक्ष का हमला
जोकचंद ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में बार-बार जहरीली शराब से मौतें होना बताता है कि अवैध शराब के नेटवर्क पर सरकार का नियंत्रण कमजोर है।
उन्होंने देवड़ा से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सिर्फ मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताना पर्याप्त नहीं है। जिम्मेदारी तय करना भी सरकार की जवाबदेही का हिस्सा है।
मुआवजे से बड़ा सवाल-नेटवर्क तक कौन पहुंचेगा?
सिंघार ने मृतकों के परिजनों के लिए घोषित चार लाख रुपए के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपए देने की मांग की है।
लेकिन इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल मुआवजा नहीं, बल्कि वह कथित नेटवर्क है जिसके जरिए जहरीली शराब लोगों तक पहुंची। यदि विपक्ष के आरोपों में दम है तो जांच को केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित रखने के बजाय सप्लाई चेन, डिस्टलरी, लाइसेंसिंग और विभागीय निगरानी तक पहुंचना होगा।
सागर शराबकांड अब सिर्फ ‘किसे सस्पेंड किया’ की खबर नहीं रह गया है। विपक्ष ने सीधे आबकारी विभाग के कथित नेक्सस और डिस्टलरी नेटवर्क पर उंगली उठाई है। सबसे बड़ा सवाल यही है-आबकारी आयुक्त सागर पहुंचे तो कार्रवाई के लिए या उस सिस्टम को संभालने के लिए, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं? इसका जवाब जांच और सरकार की कार्रवाई से ही साफ होगा।
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