छात्रा के साथ डिनर करना चाहते थे प्रोफेसर साहब, फिर एक चिठ्ठी से ढीली पड़ गईं हसरतें
समझें क्या है पूरा मामला
- सागर यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग में विवाद सामने आया।
- विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद भारद्वाज पर आरोप लगे हैं।
- शोधार्थी को डिनर के लिए दबाव देने का आरोप है।
- शिकायत वापसी के लिए हस्ताक्षर कराने का दावा किया गया।
- विश्वविद्यालय ने जांच समिति बनाकर कार्रवाई शुरू की है।
महिला रिसर्चर के उत्पीड़न का मामला
सागर के डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में महिला रिसर्चर के उत्पीड़न का मामला सामने आया है। विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज पर एक शोधार्थी को डिनर पर चलने के लिए दबाव बनाने का आरोप है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से विभागाध्यक्ष पद से हटा दिया है। शिकायत वापस लेने के लिए रिसर्चर से जबरन हस्ताक्षर कराने का भी आरोप लगा है। मामले की जांच के लिए आंतरिक जांच समिति गठित की गई है।
शिकायत की शुरुआत कैसे हुई
इसी महीने भूगोल विभाग की महिला रिसर्चर ने विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज के खिलाफ शिकायत की। रिसर्चर ने मानसिक उत्पीड़न, अमर्यादित व्यवहार का आरोप लगाया। इसके साथ ही चाय-नाश्ते के गैर-अकादमिक आमंत्रण और बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत भी की गई।
आरोप है कि प्रो. भारद्वाज एक शोधार्थी को वाट्सएप पर मैसेज कर डिनर पर चलने का दबाव बनाते थे। हाल ही में व्हिसल ब्लोअर अरविंद भट्ट ने भी लिखित शिकायत देकर एचओडी (HOD – Head of Department) के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
20 जुलाई 2026 को विभागाध्यक्ष की ओर से भी जवाबी आरोप लगाए गए। उन्होंने रिसर्चर पर अनुशासनहीनता और अनुपस्थिति का आरोप लगाया। साथ ही फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पेश करने का आरोप भी लगाया गया।
शिकायत वापसी में जबरन हस्ताक्षर का आरोप
23-24 जुलाई को रिसर्चर की ओर से शिकायत वापस लेने का एक पत्र सामने आया। लेकिन 24 जुलाई 2026 को छह रिसर्चर ने अधिष्ठाता प्रो. देवाशीष बोस को अलग से पत्र सौंपा। इस पत्र में बड़ा खुलासा किया गया।
रिसर्चर ने बताया कि उन्हें बंद कमरे में डराया-धमकाया गया। आरोप है कि बिना विषय-वस्तु पढ़ाए उनसे सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। रिसर्चर ने दो सहायक प्राध्यापकों डॉ. शिवानी मीना और डॉ. दीपिका वशिष्ठ पर धमकी देने का आरोप लगाया।
आरोप है कि पुलिस शिकायत, मानहानि केस और करियर बर्बाद करने की धमकी देकर जबरन हस्ताक्षर लिए गए। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि शिकायत वापसी वाले पत्र में उस शोधार्थी के भी हस्ताक्षर थे, जिसने शिकायत की ही नहीं थी। इससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश
प्रो. देवाशीष बोस ने 24 जुलाई 2026 को कुलपति को पत्र लिखा। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध और भयभीत करने वाला बताया। उन्होंने निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की सिफारिश की।
प्रो. बोस ने स्पष्ट किया कि रिसर्चर की सुरक्षा सबसे जरूरी है। साथ ही विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखना भी प्राथमिकता है। डीन की सिफारिश और आईसीसी (ICC – Internal Complaints Committee) की चल रही जांच के आधार पर आगे कार्रवाई हुई।
विभागाध्यक्ष हटाए गए
29 जुलाई 2026 को डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय ने आदेश जारी किया। इस आदेश में प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को विभागाध्यक्ष पद से हटा दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह एक अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था है।
प्रशासन के मुताबिक यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके। साथ ही जांच के दौरान किसी तरह का दबाव न बने, यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
क्या बोले जिम्मेदार ?
विश्वविद्यालय के मीडिया अधिकारी विवेक जायसवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय ने प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को विभागाध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया है। आंतरिक शिकायत समिति की जांच के चलते यह कार्रवाई की गई है। जांच पूरी होने तक व्यावहारिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता विभागाध्यक्ष का कार्यभार संभालेंगे।
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