एक ही गोत्र की शादी पर बवाल, समाज ने सुनाया आर्थिक दंड का फरमान, जानें मामला
समझें क्या है पूरा मामला...
- एक ही गोत्र में शादी के बाद विवाद खड़ा हो गया।
- दोनों परिवारों पर 51-51 हजार रुपए जुर्माने का आरोप।
- शादी में आने वालों पर 2100 रुपए दंड की चेतावनी।
- पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
- पुलिस को परिवार की सुरक्षा के निर्देश दिए गए।
विवाह का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
मध्य प्रदेश के बड़वानी में एक ही गोत्र में विवाह का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि समाज के कुछ पदाधिकारियों ने 51-51 हजार रुपए जुर्माना लगाया। सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाने का भी आरोप है। हाईकोर्ट ने संबंधित पदाधिकारियों से जवाब मांगा है। साथ ही पुलिस को परिवार की सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं।
एक ही गोत्र में विवाह
बड़वानी में एक ही गोत्र में विवाह विवाद बना है। मामला राजपुर क्षेत्र के एक नवविवाहित जोड़े से जुड़ा है। दोनों के परिवारों ने अपनी सहमति से विवाह तय किया था।
राजपुर निवासी महेंद्र लोनारे ने मामले में आरोप लगाए हैं। उनके बेटे हर्ष लोनारे का निकिता से प्रेम संबंध था। परिवार के अनुसार दोनों युवक और युवती बालिग हैं। दोनों परिवार भी इस विवाह के लिए सहमत थे। मगर लड़का और लड़की एक ही गोत्र से थे। इसी वजह से सामाजिक स्तर पर विवाद शुरू हुआ। परिवार ने समाज के वरिष्ठ लोगों से भी चर्चा की थी।
परिवार के मुताबिक परंपरा के अनुसार एक रस्म कराई गई। युवती को उसके मामा से गोद लेने की प्रक्रिया हुई। इसके बाद मामा ने विवाह में कन्यादान किया था। परिवार का दावा है कि सभी सामाजिक प्रक्रियाएं पूरी हुई थीं। इसके बावजूद विवाह के बाद विरोध शुरू हो गया। इसी विवाद ने बाद में बड़ा रूप ले लिया।
विवाह स्थल बदलने पर विवाद
शुरुआत में विवाह राजपुर में आयोजित होना तय हुआ था। इसके लिए समाज की धर्मशाला भी बुक कराई गई थी। परिवार का दावा है कि धर्मशाला किराए पर मिली थी।
बाद में विवाह की तारीख और स्थान बदल दिया गया। कार्यक्रम राजपुर की जगह बड़वानी में आयोजित किया गया। परिवार का आरोप है कि यहीं से विरोध बढ़ा।
स्थान बदलने के बाद समाज की बैठकें होने लगीं। विवाह में शामिल लोगों को भी चेतावनी दी गई। परिवार के अनुसार कई रिश्तेदारों पर दबाव बनाया गया।
51 हजार जुर्माने का आरोप
पीड़ित परिवार ने सामाजिक जुर्माना लगाने का आरोप लगाया है। आरोप है कि दोनों परिवारों पर 51-51 हजार रुपए लगाए गए। शादी में शामिल लोगों के लिए भी चेतावनी थी। प्रत्येक व्यक्ति पर 2100 रुपए दंड लगाने की बात कही गई। परिवार ने इसे सामाजिक दबाव का तरीका बताया है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार इसके बाद बहिष्कार का फैसला हुआ। पहले 11 वर्षों तक निष्कासन की बात कही गई। बाद में आजीवन बहिष्कार का कथित फैसला सुनाया गया। परिवार का कहना है कि इससे सामाजिक जीवन प्रभावित हुआ। रिश्तेदारी और सामुदायिक कार्यक्रमों में परेशानी बढ़ने लगी। परिवार ने इसे सम्मान और अधिकारों का मुद्दा बताया।
सामाजिक बहिष्कार का दावा
सामाजिक बहिष्कारइस विवाद का बड़ा मुद्दा है। परिवार का आरोप है कि उन्हें समाज से अलग किया गया। परिवार ने पहले सामाजिक स्तर पर समाधान खोजने का प्रयास किया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर शिकायतें भी दर्ज कराने की कोशिश की। मगर उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिलने का दावा है।
इसके बाद मामला प्रशासन तक भी पहुंचाया गया। परिवार का कहना है कि वहां से समाधान नहीं मिला। आखिरकार जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। याचिका में परिवार ने सुरक्षा की मांग भी रखी। कथित जुर्माने और सामाजिक बहिष्कार का मुद्दा उठाया गया। परिवार ने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच चुका है। याचिका पर अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। पीड़ित परिवार के वकील ऋषि आनंद चौकसे ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने परिवार को राहत देने की मांग की। सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी अदालत में उठाया गया।
अदालत ने संबंधित सामाजिक पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। उनसे मामले में अपना जवाब पेश करने को कहा गया है। यह अभी मामले का अंतिम फैसला नहीं है। हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को भी निर्देश दिए हैं।
बालिग जोड़े ने उठाए सवाल
नवविवाहित हर्ष और निकिता ने भी अपनी बात रखी है। दोनों का कहना है कि विवाह आपसी सहमति से हुआ। उनके अनुसार दोनों परिवार भी विवाह के लिए तैयार थे। इसके बावजूद सामाजिक दबाव बनाया गया। उन्होंने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया है। दंपती का कहना है कि बालिगों को जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। ऐसे में परिवारों को परेशान करना उचित नहीं है।
समाज ने आरोपों से इनकार किया
कुशवाह समाज के जिलाध्यक्ष रमेशचंद कुशवाह ने आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है। उनके अनुसार नोटिस मिलने के बाद जवाब दिया जाएगा। संगठन अदालत में अपना पक्ष पेश करने की तैयारी करेगा। इसलिए जुर्माने और बहिष्कार से जुड़े आरोप अभी विवादित हैं।
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