एमपी के सांदीपनि स्कूलों में अब बनेंगे हॉस्टल, नवोदय जैसी मिलेगी सुविधा
समझें क्या है पूरा मामला
- एमपी सरकार सांदीपनि स्कूलों को विकसित करेगी।
- चुनिंदा स्कूलों में छात्रों के लिए हॉस्टल बनेंगे।
- योजना नवोदय विद्यालय मॉडल की तर्ज पर होगी।
- ग्रामीण बच्चों को स्कूल के पास रहने सुविधा मिलेगी।
- स्कूल शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।
सांदीपनि स्कूलों को विकसित करने की तैयारी
मध्य प्रदेश सरकार सांदीपनि स्कूलों को नवोदय विद्यालयों की तरह विकसित करने की तैयारी कर रही है। चुनिंदा सांदीपनि स्कूलों में स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे। इसका मकसद दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के बच्चों को स्कूल के पास रहकर बेहतर शिक्षा देना है। शासन ने स्कूल शिक्षा विभाग को इसके निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग ने हॉस्टल निर्माण की तैयारी भी शुरू कर दी है।
रोज सफर करने वालों को मिलेगी राहत
फिलहाल प्रदेश के 274 सांदीपनि स्कूलों में स्टूडेंट्स को फ्री ट्रांसपोर्ट सुविधा मिल रही है। इसके बावजूद कई बच्चों को हर दिन लंबी दूरी तय करके स्कूल पहुंचना पड़ता है। बारिश और खराब मौसम में यह सफर और मुश्किल हो जाता है। ऐसे में नियमित स्कूल जाना कई बार संभव नहीं हो पाता।
इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए अब स्कूल कैंपस में ही हॉस्टल बनाने का फैसला लिया गया है। इससे बच्चों को हर दिन आने-जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
जनजातीय कार्य विभाग के मॉडल से मिली प्रेरणा
जनजातीय कार्य विभाग के तहत चलने वाले सांदीपनि स्कूलों में पहले से ही हॉस्टल सुविधा मौजूद है। इन स्कूलों के अच्छे नतीजे सामने आए हैं। इन्हीं अनुभवों के आधार पर अब स्कूल शिक्षा विभाग भी अपने स्कूलों में यह व्यवस्था लागू करने जा रहा है।
इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के स्टूडेंट्स को मिलेगा। इन इलाकों में आने-जाने की सुविधाएं वैसे भी सीमित होती हैं।
नवोदय जैसी मिलेंगी सुविधाएं
नए हॉस्टल का संचालन नवोदय विद्यालयों के रेजिडेंशियल मॉडल पर किया जाएगा। यहां स्टूडेंट्स को सुरक्षित रहने की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पौष्टिक भोजन, सुरक्षा और दूसरी जरूरी बेसिक सुविधाएं भी दी जाएंगी।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इससे स्टूडेंट्स की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी। पढ़ाई की क्वॉलिटी भी बेहतर होगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को एक अच्छा लर्निंग माहौल मिलेगा। रोजाना आने-जाने में बचने वाला समय अब पढ़ाई, खेलकूद और दूसरी गतिविधियों में लगाया जा सकेगा।
डीपीआर तैयार, जल्द शुरू होगा काम
सरकार ने इस योजना के लिए डीपीआर (DPR – Detailed Project Report) तैयार कर लिया है। इसके आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही चुनिंदा स्कूलों में निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
FAQ
- सांदीपनि स्कूलों में हॉस्टल क्यों बनाए जा रहे हैं?
दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों से आने वाले स्टूडेंट्स को रोज लंबा सफर तय करना पड़ता है। हॉस्टल सुविधा से उन्हें स्कूल के पास रहकर पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। - हॉस्टल किस मॉडल पर बनाए जाएंगे?
हॉस्टल नवोदय विद्यालयों के रेजिडेंशियल मॉडल पर बनाए जाएंगे। इनमें सुरक्षित रहने की सुविधा, पौष्टिक भोजन और सुरक्षा जैसी बेसिक सुविधाएं दी जाएंगी।
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