सांदीपनि स्कूल का अजब-गजब नियम, बसें कम पड़ीं तो किश्तों में कर दी पढ़ाई!
Aman Vaishnav | Jul 31, 2026, 10:14 IST
सांदीपनि स्कूल का अजब गजब नियम, सांदीपनि स्कूल
एमपी के सांदीपनि स्कूल में एक नया और अलग ही नियम लागू कर दिया है। अब सप्ताह में केवल 3 दिन ही पढ़ाई होगी। एक दिन छात्र, दूसरे दिन छात्राएं स्कूल आएंगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- सांदीपनि स्कूल में बसों की भारी कमी है।
- इसी के चलते स्कूल प्रबंधन ने नया नियम लागू किया है।
- एक दिन छात्र स्कूल आएंगे और अगले दिन छात्राएं आएंगी।
- स्कूल में करीब 2800 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन बसें सिर्फ 16 हैं।
- नई बसें मिलने तक यही व्यवस्था चलेगी।
बसों की कमी बनी वजह
यह नियम खासतौर पर उन बच्चों के लिए है जो स्कूल बस पर निर्भर हैं। जो बच्चे निजी साधन से आना चाहते हैं, वे रोज स्कूल आ सकते हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी है।
2800 बच्चों पर सिर्फ 16 बसें
नियमों के अनुसार एक बस में 55 से 60 विद्यार्थियों को ले जाया जा सकता है। इस हिसाब से रोज करीब 1000 विद्यार्थियों का ही परिवहन संभव हो पा रहा है। यही वजह है कि स्कूल को यह नया तरीका अपनाना पड़ा है।
स्कूल प्रबंधन ने अतिरिक्त बसों की मांग शासन से की है। प्रबंधन का कहना है कि जैसे ही नई बसें उपलब्ध होंगी, सभी विद्यार्थियों को रोज स्कूल आने की सुविधा मिलेगी। तब तक यह बारी-बारी वाला नियम जारी रहेगा।
एक दिन का पाठ अगले दिन भी
हालांकि अभिभावकों और शिक्षा जानकारों में इस व्यवस्था को लेकर मिली-जुली राय हो सकती है। कई बार बारी-बारी पढ़ाई से बच्चों की निरंतरता प्रभावित होने की आशंका भी जताई जाती है।
सरकारी स्कूलों में परिवहन की कमी कोई नई समस्या नहीं है। मध्यप्रदेश के कई जिलों में बस, स्टाफ और संसाधनों की कमी लंबे समय से चर्चा में रहती है।
ऐसे मामलों में अक्सर प्रशासन और स्कूल प्रबंधन को तात्कालिक समाधान निकालने पड़ते हैं। उदयपुरा का यह मामला भी उसी चुनौती का एक उदाहरण है।
सांदीपनि स्कूल क्या हैं?
यहां बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों की भी पढ़ाई कराई जाती है। यानी पढ़ाई में स्मार्ट क्लास, डिजिटल तकनीक और विज्ञान के साथ-साथ भारतीय परंपराओं पर भी जोर दिया जाता है।
कब हुई शुरुआत?
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