सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत के बाद सामने आया अवैध अफीम खेती का नेटवर्क

Pawan Modiya | Mar 29, 2026, 17:30 IST
Photograph: (the sootr)
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघ को जहर देकर मारने के मामले में आरोपी की अफीम की खेती का खुलासा हुआ, जंगल से 650 से ज्यादा पौधे बरामद। चार और आरोपी गिरफ्तार। सभी को जेल भेजा।

मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कॉलर लगे एक बाघ को जहर देकर मारने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जांच के दौरान पता चला कि मुख्य आरोपी जंगल में अफीम की खेती (Opium Cultivation) कर रहा था। वन विभाग की टीम ने मौके से 650 से अधिक अफीम के पौधे बरामद किए हैं, जिनकी कीमत करीब एक करोड़ रुपए बताई जा रही है।



यह मामला न केवल वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation) के लिए गंभीर चिंता का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जंगलों में अवैध गतिविधियां किस तरह से वन्यजीवों के लिए खतरा बनती जा रही हैं।



कॉलर लगे बाघ की संदिग्ध मौत से खुला मामला

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कॉलर लगे टाइगर (Collared Tiger) की अंतिम लोकेशन के आधार पर 27 मार्च 2026 को खोज अभियान शुरू किया गया था। यह अभियान सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की बफर टीम और पश्चिम सामान्य वनमंडल की सांगाखेड़ा रेंज द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया।



जंगल में मिला मवेशी का शव

तलाशी अभियान के दौरान छातीआम बीट के पास जंगल में एक मवेशी (बैल) का शव मिला। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई कि बाघ ने इस बैल का शिकार किया होगा। इसके बाद डॉग स्क्वॉड की मदद से इलाके में सघन खोज की गई। खोज के दौरान सुबह करीब 8:30 बजे कुछ दूरी पर जमीन में दफनाए गए बाघ के शव को बरामद किया गया।



बदले की भावना से दिया जहर

वन विभाग ने मृत बैल के मालिक उदेसिंग (50 वर्ष) निवासी छातीआम को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने चौंकाने वाला खुलासा किया।आरोपी ने बताया कि कुछ दिन पहले उसके बैल को बाघ ने मार दिया था। इससे नाराज होकर उसने मृत बैल के शव में कीटनाशक यूरिया (Poisoning with pesticide) डाल दिया। जब बाघ ने उस जहरीले मांस को खाया तो उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर बाघ के शव को जंगल में दफना दिया, ताकि घटना का पता न चल सके।



अफीम की खेती का खुलासा

जांच के दौरान वन विभाग की टीम ने आरोपी की निशानदेही पर जंगल के अंदर अफीम की अवैध खेती का भी खुलासा किया। अधिकारियों ने बताया कि मौके से 650 से अधिक अफीम के पौधे मिले हैं। इनकी बाजार कीमत लगभग एक करोड़ रुपए आंकी गई है। यह खुलासा इस मामले को और गंभीर बना देता है क्योंकि यह केवल वन्यजीव हत्या ही नहीं बल्कि नारकोटिक खेती से भी जुड़ा मामला बन गया है।



चार आरोपी गिरफ्तार

वन विभाग ने मुख्य आरोपी उदेसिंग की निशानदेही पर अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।



गिरफ्तार आरोपियों के नाम

  • उदेसिंग पिता सुमरसिंग (50 वर्ष) – निवासी छातीआम
  • बिसनलाल शीलू पिता जुगन (30 वर्ष) – निवासी पुटईआम
  • मनोहर सिंह पिता कोमल (60 वर्ष) – निवासी डोब झिरना, तहसील बाबई
  • कैलाल पिता कारेसा (65 वर्ष) – निवासी कूचीखोह

सभी आरोपियों को जुन्नारदेव न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।



पहले भी मिला था मुआवजा

इस मामले का एक और अहम पहलू सामने आया है। वन विभाग के अनुसार मुख्य आरोपी को पिछले वर्ष वन्यप्राणी क्षतिपूर्ति (Wildlife Compensation) के तहत 15 हजार रुपए का मुआवजा दिया गया था। इसके बावजूद आरोपी ने बदले की भावना से बाघ को जहर देकर मार दिया।



वन विभाग की लापरवाही पर भी सवाल

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस बाघ को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) से सतपुड़ा लाया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार बाघ की निगरानी पर्याप्त नहीं थी। कॉलर लगे होने के बावजूद उसकी गतिविधियों पर नजर कमजोर थी। स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग के बीच समन्वय की कमी रही। इसी वजह से बाघ की मौत को रोका नहीं जा सका।



प्रोटोकॉल के तहत किया गया अंतिम संस्कार

घटना के बाद मृत नर बाघ का अंतिम संस्कार वन विभाग के प्रोटोकॉल के तहत किया गया। यह प्रक्रिया सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक राखी नंदा और पश्चिम छिंदवाड़ा वनमंडल के डीएफओ साहिल गर्ग की उपस्थिति में पूरी की गई।



ये खबरें भी पढ़ें...



छत्तीसगढ़ में हिरणों का शिकार; सिर्फ 2 या छुपी हुई सच्चाई? आंकड़ों पर उठे बड़े सवाल



RGPV का कुलगुरु बनने 70 से ज्यादा कतार में, प्रबंधन ने अबतक नहीं बना पाया सर्च कमेटी



डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ No Kings रैलियां, अमेरिका और यूरोप में लाखों लोग सड़कों पर



IELTS परीक्षा में बड़ा बदलाव: पेन-पेपर मोड खत्म, सीबीटी से होगा एग्जाम



Tags:
  • सतपुड़ा टाइगर रिजर्व
  • वन विभाग
  • जहर
  • बाघ
  • वन्यजीव संरक्षण
  • अफीम की खेती