सुप्रीम कोर्ट ने 6 पूर्व जजों को बनाया वरिष्ठ अधिवक्ता, एमपी के सुजॉय पॉल भी शामिल

Neel Tiwari | Aug 02, 2026, 08:23 IST
मध्य प्रदेश के पूर्व जज सुजॉय पॉल बने वरिष्ठ अधिवक्ता
सुप्रीम कोर्ट ने छह पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया है। यह फैसला फुल कोर्ट बैठक में लिया गया है। सूची में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जज और कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल भी शामिल हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...



  • सुप्रीम कोर्ट ने छह पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया है।
  • फैसला 29 जुलाई 2026 की फुल कोर्ट बैठक में लिया गया। 31 जुलाई को आदेश जारी हुआ।
  • सभी नामांकन अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16(2) के तहत हुए हैं।
  • नए नियम 2026 के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी की गई है।
  • सूची में मध्य प्रदेश से जुड़े पूर्व न्यायाधीश सुजॉय पॉल भी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने छह पूर्व जजों को दिया बड़ा सम्मान

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने छह पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को बड़ा सम्मान दिया है। अब ये सभी वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में अपनी कानूनी सेवाएं दे सकेंगे। यह फैसला 29 जुलाई 2026 की फुल कोर्ट बैठक में लिया गया। इसकी आधिकारिक जानकारी 31 जुलाई 2026 को जारी की गई।



वरिष्ठ अधिवक्ता बनने का क्या मतलब है?

वरिष्ठ अधिवक्ता किसी भी वकील के लिए बड़ा सम्मान माना जाता है। यह दर्जा उनके लंबे अनुभव और कानूनी योगदान के आधार पर दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह नामांकन अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16(2) के तहत किया है। इस प्रक्रिया का पालन वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम दिशा-निर्देश 2026 के अनुसार हुआ।



किन पूर्व जजों को मिला वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा?

सुप्रीम कोर्ट ने जिन छह पूर्व न्यायाधीशों को वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:



पहला नाम पूर्व मुख्य न्यायाधीश अरविंद चंदेल सिंह का है। वे पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। उनका पैतृक हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ है।



दूसरा नाम पूर्व मुख्य न्यायाधीश दुप्पाला रमणा वेंकट का है। उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवा दी। उनका पैतृक हाई कोर्ट आंध्र प्रदेश है।



तीसरा नाम पूर्व न्यायाधीश एदा तिरुमला देवी का है। वे तेलंगाना हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुईं।



चौथा नाम पूर्व न्यायाधीश कृष्णा रामा प्रसाद जी का है। वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से जुड़े रहे।



पांचवां नाम पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल का है। वे कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। उनका पैतृक हाईकोर्ट मध्यप्रदेश है। मध्य प्रदेश के कानूनी क्षेत्र के लिए यह सम्मान खास माना जा रहा है।



छठा नाम पूर्व न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार का है। वे इलाहाबाद हाई कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे।





फुल कोर्ट बैठक में लिया गया फैसला

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सभी न्यायाधीशों ने फुल कोर्ट बैठक में यह फैसला लिया है। इसके बाद समिति ने आधिकारिक पत्र जारी किया। यह निर्णय 29 जुलाई 2026 से प्रभावी माना गया है।



सुप्रीम कोर्ट की इस प्रक्रिया का क्या महत्व है?

वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा केवल अनुभव से नहीं मिलता। इसके लिए न्यायिक योगदान और पेशेवर उपलब्धियों को भी देखा जाता है। पूर्व न्यायाधीशों को यह सम्मान मिलने से वे अदालतों में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पेश हो सकते हैं। इससे उनके अनुभव का लाभ न्याय व्यवस्था को मिलता है।



मध्य प्रदेश के लिए क्यों है खास?

इस सूची में सुजॉय पॉल का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। वे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देकर एक और बड़ी पहचान दी है। इससे मध्य प्रदेश के कानूनी जगत में भी खुशी का माहौल है।



अब आगे क्या होगा?

वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिलने के बाद सभी नामित पूर्व न्यायाधीश इस नई भूमिका में कानूनी कार्य कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देशभर के न्यायिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही यह अनुभवी पूर्व न्यायाधीशों के योगदान का सम्मान भी है।



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