मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 पर रोक

Neel Tiwari | Feb 23, 2026, 18:40 IST
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grameen rojgar sahayak
grameen rojgar sahayak

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 पर रोक लगाई। राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को होगी।

News in short

  • हाईकोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 पर रोक लगाई।
  • राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने का नोटिस जारी।
  • अगली सुनवाई तक किसी रोजगार सहायक का ट्रांसफर नहीं होगा।
  • टर्मिनेशन और ट्रांसफर प्रावधान को कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
  • आदेश का लाभ प्रदेश के सभी 23 हजार रोजगार सहायकों को मिलने का दावा।

News in Detail

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने प्रदेश के 23 हजार रोजगार सहायकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने नई ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 पर फिलहाल रोक लगाते हुए यथा स्थिति का आदेश दिया है। अगले आदेश तक किसी भी रोजगार सहायक का ट्रांसफर नहीं होगा।



क्या है पूरा मामला ?

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रोजगार सहायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 के अमल पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि अगली सुनवाई तक किसी भी रोजगार सहायक का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। यह आदेश प्रदेश के सभी जिलों पर लागू होगा।

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मार्गदर्शिका में क्या था विवाद ?

हाल ही में राज्य सरकार ने नई मार्गदर्शिका जारी की थी। इसमें रोजगार सहायकों के ट्रांसफर और टर्मिनेशन का प्रावधान जोड़ा गया था। रोजगार सहायकों का कहना था कि यह नियम उनकी सेवा शर्तों के खिलाफ है। इसी के विरोध में सिंगरौली के अमित कुमार मिश्रा सहित पांच लोगों ने याचिका दायर की थी।

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5 याचिकाकर्ता पर 23 हजार कर्मचारियों पर प्रभाव

अधिवक्ता गोपेश तिवारी ने 'द सूत्र' को बताया कि उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि यह मामला केवल पांच याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं है। उनके द्वारा दायर की गई याचिका की मुख्य मांग में भी इस बात का जिक्र था कि इससे प्रदेश के 23 हजार रोजगार सहायक प्रभावित होंगे।

अब इस तरह हाई कोर्ट का यह आदेश केवल पांच याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसका लाभ प्रदेश के सभी रोजगार सहायकों को मिलेगा। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच में 18 फरवरी को हुई थी। आदेश 23 फरवरी को सामने आया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक ट्रांसफर को लेकर यथा स्थिति बनी रहेगी। हालांकि कोर्ट ने आदेश में राहत पिटिशनर शब्द का इस्तेमाल किया है जिससे थोड़ा सा असमंजस बना रहा है कि यह लाभ केवल याचिकाकर्ताओं को मिला है या सभी रोजगार सहायकों।

Advocate Gopesh Tiwari
Advocate Gopesh Tiwari


कैसे हुई थी नियुक्ति

जब देश में मनरेगा योजना शुरू हुई थी, तब मजदूरों का हिसाब रखने के लिए रोजगार सहायक का पद बनाया गया था।मध्यप्रदेश में इन पदों पर भर्ती उस समय शुरू हुई, जब राज्य में शिवराज सिंह चौहान की सरकार थी। शुरुआत में इन्हें 9000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता था। बाद में दो अन्य मद जोड़कर वेतन बढ़ाया गया और कुल राशि 18000 रुपये प्रतिमाह हो गई। अधिकांश रोजगार सहायकों की नियुक्ति उनके ही पैतृक गांव में हुई थी। चयन के लिए 12वीं के अंकों और कंप्यूटर डिग्री जैसे पीजीडीसीए को आधार बनाया गया था।

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पंचायत व्यवस्था में अहम भूमिका

ग्रामीण क्षेत्रों में कई पंचायत सचिव कंप्यूटर संचालन में दक्ष नहीं हैं। ऐसी स्थिति में रोजगार सहायक ही ऑनलाइन कार्य, भुगतान प्रविष्टि और रिकॉर्ड अपडेट जैसे काम संभालते हैं। इसी वजह से यह पद पंचायत व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है।

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आगे क्या होगा

इस मामले में सिंगरौली निवासी अमित कुमार मिश्रा सहित कुल पांच रोजगार सहायकों ने याचिका दायर की थी। अन्य याचिकाकर्ताओं में अलग अलग जिलों के कार्यरत रोजगार सहायक शामिल हैं, जिन्होंने नई नीति को सेवा शर्तों के खिलाफ बताया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गोपेश तिवारी ने पक्ष रखा। अब राज्य सरकार को कोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा। चार सप्ताह बाद अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 में स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रदेश के 23 हजार रोजगार सहायकों के लिए यह फैसला बड़ी राहत माना जा रहा है। ट्रांसफर और टर्मिनेशन का खतरा कम से कम अगले आदेश तक टल गया है।

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