एमपी के स्कूल शिक्षा मंत्री ने बाहर रखवाए मोबाइल, चाणक्य नीति भी फेल, शिक्षकों से वार्ता बेनतीजा, 18 को आंदोलन तय

Ramanand Tiwari | Apr 15, 2026, 23:17 IST
school education minister
भोपाल में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के साथ हुई बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं निकल सका। शिक्षकों ने 18 अप्रैल को बड़ा आंदोलन तय किया। बैठक में मंत्री ने चाणक्य नीति का सहारा लिया, लेकिन वह भी बेअसर साबित हुई।

भोपाल में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के साथ हुई बैठक में हालात असहज रहे। शिक्षक प्रतिनिधिमंडल के मोबाइल तक बाहर रखवा दिए गए। इसके बाद 'चाणक्य नीति' के जरिए आंदोलन तोड़ने की कोशिश भी नाकाम रही। नतीजा वार्ता बेनतीजा रही और 18 अप्रैल को बड़ा आंदोलन तय हुआ।



क्या हुआ बैठक में?

अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल को मंत्री निवास पर बुलाया गया था। इसके बाद आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह के साथ दूसरी बैठक भी हुई। लेकिन दोनों ही दौर की बातचीत में कोई ठोस फैसला नहीं निकल सका।



मोबाइल बाहर रखवाने पर विवाद

बैठक में शामिल शिक्षकों के मोबाइल बाहर रखवाए गए। मोर्चा के नेताओं का आरोप है कि यह साफ तौर पर अविश्वास दिखाता है। सवाल उठ रहा है क्या मंत्री को अपने ही शिक्षकों पर भरोसा नहीं था?



चाणक्य नीति भी बेअसर

सूत्रों के मुताबिक, मंत्री ने पहले कुछ चुनिंदा संगठनों से अलग बैठक कर आंदोलन कमजोर करने की रणनीति बनाई। लेकिन संयुक्त मोर्चा ने साफ कह दिया बात सीधे हमसे होगी, किसी बीच के संगठन से नहीं। यहीं पर मंत्री की पूरी रणनीति फेल हो गई।



मोर्चा ने दो बड़ी मांगें रखीं

2 मार्च 2026 का TET आदेश रद्द किया जाए। सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति से हो। लेकिन मंत्री और अफसर सिर्फ "विचार कर रहे हैं" जैसे पुराने जवाब देते रहे। कोई समय-सीमा नहीं, कोई स्पष्ट निर्णय नहीं आया।



TET पर भी भ्रम और असमंजस

बैठक में यह भी सामने आया कि 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों की TET पात्रता को लेकर खुद अधिकारियों में स्पष्टता नहीं थी। कुछ अधिकारी तो यह तक मानते रहे कि इनकी परीक्षा होनी ही नहीं है। इस पर मोर्चा ने NCTE गाइडलाइन का हवाला देते हुए सवाल उठाए।



कमिश्नर के पास फाइल, समाधान गायब

मंत्री ने मामला आयुक्त के पाले में डाल दिया। आयुक्त ने "सेल बनाने" और "विधिक सलाह" जैसे जवाब देकर बात टाल दी। कुल मिलाकर, शिक्षक प्रतिनिधिमंडल को सिर्फ घुमाया गया, हल कुछ नहीं निकला। फिर गरमाया आंदोलन वार्ता फेल होने के बाद संयुक्त मोर्चा ने साफ किया कि 18 अप्रैल को भोपाल में "मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा" और धरना-प्रदर्शन तय कार्यक्रम के अनुसार होगा। शिक्षक अब आर-पार के मूड में हैं।



मुख्य बिंदु (main point )

  • मंत्री से मुलाकात में शिक्षकों के मोबाइल बाहर रखवाए गए।
  • राव उदय प्रताप सिंह की “चाणक्य नीति” फेल।
  • TET आदेश रद्द करने पर कोई निर्णय नहीं।
  • सेवा अवधि गणना पर भी टालमटोल।
  • अधिकारियों में ही नियमों को लेकर भ्रम।
  • आयुक्त ने “सेल” बनाकर मामला टालने की कोशिश की।

18 अप्रैल को बड़ा आंदोलन तय

यह सिर्फ एक असफल बैठक नहीं, बल्कि सिस्टम की नीयत और तैयारी पर सवाल है। जब शिक्षक अपनी बुनियादी मांगों के लिए दर-दर भटकें और मंत्री रणनीति में उलझे रहें, तो टकराव तय है। अब 18 अप्रैल का आंदोलन ही बताएगा कि सरकार सुनती है या फिर वही पुराना खेल चलता रहेगा।



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