भोपाल के निजी स्कूल पर आरोप, 45°C गर्मी में समर क्लास का विरोध किया तो 10 बच्चों को स्कूल से निकाला
News in Short
- 45 डिग्री गर्मी में स्कूल ने समर क्लास चलाई।
- पेरेंट्स ने कलेक्टर आदेश का हवाला दिया।
- विरोध के बाद 10 बच्चों को निष्कासित किया गया।
- स्कूल ने प्रतिष्ठा नुकसान का आरोप लगाया।
- मामला अब प्रशासन और शिक्षा विभाग पहुंचा।
News in Detail
भोपाल के एक प्राइवेट स्कूल पर गंभीर आरोप लगे हैं। 45 डिग्री गर्मी में समर क्लास चलाने का विरोध करने वाले 10 बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया। अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने केवल कलेक्टर के आदेश का हवाला दिया था। इसके बाद स्कूल ने टर्मिनेशन मेल भेज दिया। मामला अब प्रशासन तक पहुंच गया है।
गर्मी में बुलाए गए बच्चे
भोपाल के ईस्टर्न पब्लिक स्कूल पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि स्कूल ने भीषण गर्मी में बच्चों को बुलाया।
कलेक्टर ने छोटे बच्चों की छुट्टी घोषित की थी। बड़ी कक्षाओं के समय में भी बदलाव हुआ था। इसके बावजूद स्कूल में समर क्लास चलती रहीं।
अभिभावकों ने बच्चों की तबीयत को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि 45 डिग्री तापमान में बच्चों को बुलाना खतरनाक है। इसी मुद्दे पर पेरेंट्स ने व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया। समूह में केवल गर्मी और स्वास्थ्य पर चर्चा हुई। किसी तरह की आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल नहीं हुई।
सवाल पूछे तो कार्रवाई
मामला तब बढ़ा जब स्कूल प्रबंधन को चर्चा की जानकारी मिली। 15 मई को पेरेंट्स की बैठक बुलाई गई। इसमें कई अभिभावकों ने प्रशासनिक आदेश का जिक्र किया। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल को कलेक्टर के निर्देश मानने चाहिए। लेकिन आरोप है कि स्कूल प्रबंधन नाराज हो गया।
दो दिन बाद कई परिवारों को टर्मिनेशन मेल मिला। कुल 10 बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया। इससे परिवारों में नाराजगी फैल गई।अभिभावकों ने आरोप लगाया कि बच्चों को निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि कोई अनुशासनहीनता नहीं हुई थी। आजकल शिक्षा संस्थानों में संवाद भी जोखिम भरा काम बनता जा रहा है। सवाल पूछिए और जवाब में मेल आ जाता है। कभी फीस का। कभी निष्कासन का।
स्कूल ने रखा अपना पक्ष
स्कूल प्रबंधन ने ईमेल के जरिए अपना पक्ष रखा। मेल में कहा गया कि कुछ पेरेंट्स स्कूल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे थे। स्कूल ने दावा किया कि इससे सैकड़ों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती थी। कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ने की बात भी कही गई।
प्रबंधन ने कहा कि बच्चों को माता-पिता के व्यवहार की कीमत चुकानी पड़ रही है। स्कूल ने अपने फैसले को अंतिम बताया। मेल में एडमिशन अंडरटेकिंग का भी जिक्र किया गया। स्कूल ने कहा कि अभिभावकों ने प्रतिष्ठा नुकसान नहीं पहुंचाने का वचन दिया था।
पेरेंट्स का आरोप
अमानुद्दीन खान सहित कई पेरेंट्स सामने आए। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों का नियमित एडमिशन था। फीस भी पहले से जमा की गई थी। इसके बावजूद बिना बातचीत निष्कासन मेल भेज दिया गया। परिवारों का कहना है कि बच्चों के साथ अन्याय हुआ।
अभिभावकों ने कहा कि व्हाट्सऐप ग्रुप में केवल बच्चों की सेहत पर चर्चा हुई। किसी ने स्कूल के खिलाफ गलत भाषा इस्तेमाल नहीं की। पेरेंट्स का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने विरोध सहन नहीं किया। इसी वजह से बच्चों पर कार्रवाई की गई।
प्रशासन तक पहुंचा मामला
मामला अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। अभिभावकों ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दी। CM हेल्पलाइन में भी मामला दर्ज कराया गया। लोक शिक्षा विभाग को भी शिकायत भेजी गई है। पेरेंट्स ने कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सेहत से समझौता नहीं होना चाहिए। अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर टिकी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या निजी स्कूल प्रशासनिक आदेशों से ऊपर हैं।
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