ग्वालियर कोर्ट के मांगने पर भी पूरी संपत्ति का ब्योरा छिपा रहा सिंधिया परिवार
समझें क्या है पूरा मामला
- ग्वालियर कोर्ट में सिंधिया परिवार की संपत्ति बंटवारे का मामला चल रहा है।
- परिवार ने बार बार मांगने पर भी संपत्ति का पूरा ब्योरा नहीं दिया।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ ने समझौता डिक्री का आवेदन दिया है।
- कानून के तहत अब परिवार को संपत्ति का पूरा नक्शा देना जरूरी है।
- संपत्ति सार्वजनिक होने के डर से परिवार जानकारी देने से बच रहा है।
ग्वालियर के सिंधिया परिवार की अरबों रुपए की संपत्ति फिर चर्चा में है। परिवार अपनी पूरी संपत्ति का ब्योरा कोर्ट को नहीं दे रहा। पिछली दो सुनवाई में भी यह जानकारी सामने नहीं आई। इससे मामला हर बार टल रहा है। देश के जाने-माने राजघरानों में सिंधिया परिवार का नाम शामिल है। यही वजह है कि यह मामला अब सुर्खियों में है।
हर बार टल रही सुनवाई
ग्वालियर जिला न्यायालय में यह मामला लंबे समय से चल रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ यशोदा राजे, वसुंधरा राजे और ऊषा राजे राणा ने सिविल प्रक्रिया संहिता सीपीसी (Civil Procedure Code) के आदेश 23 नियम 3 के तहत आवेदन दिया है। इस आवेदन से कानूनन समझौता डिक्री बनती है। इसके लिए बंटवारे वाली पूरी संपत्ति का इंडेक्स देना जरूरी होता है। साथ ही संपत्ति का नक्शा भी कोर्ट में पेश करना पड़ता है। यह पूरी प्रक्रिया डिक्री का जरूरी हिस्सा मानी जाती है। लेकिन जब कोर्ट ने यह ब्योरा मांगा तो परिवार ने नहीं दिया। इसी वजह से पिछली दो सुनवाई में मामला आगे नहीं बढ़ पाया। हर बार सुनवाई टलने से बंटवारे की प्रक्रिया लंबी खिंचती जा रही है।
नियम में मिली थी छूट
कानून के जानकारों का कहना है कि परिवार के पास एक आसान रास्ता भी था। अगर सदस्य सीपीसी के आदेश 23 नियम 1 के तहत आवेदन देते तो संपत्ति का ब्योरा जरूरी नहीं था। इस नियम में वादी अपना दावा वापस ले लेता है। ऐसे में कोर्ट के बाहर ही संपत्ति का बंटवारा हो जाता। कोर्ट के पास संपत्ति का कोई रिकॉर्ड भी नहीं रहता। लेकिन सिंधिया परिवार ने यह रास्ता नहीं चुना। परिवार ने सीधे नियम 3 के तहत आवेदन दिया। इसी वजह से अब पूरा ब्योरा देना कानूनन जरूरी हो गया है। जानकारों का मानना है कि यह परिवार का ही फैसला था।
विवाद से बचने की कोशिश
सिंधिया परिवार के पास कई तरह की संपत्तियां हैं। कुछ संपत्तियां सीधी और सबको पता हैं। लेकिन कई संपत्तियां अप्रत्यक्ष और छिपी हुई भी हैं। अगर इन संपत्तियों का पूरा खुलासा हो जाता है तो नए विवाद खड़े हो सकते हैं। इसमें टैक्स से जुड़े विवाद भी शामिल हो सकते हैं। यही वजह मानी जा रही है कि परिवार पूरी जानकारी देने से बच रहा है। परिवार को डर है कि संपत्ति सार्वजनिक होने पर भविष्य में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
कौन सी हैं प्रमुख संपत्तियां
- सिंधिया परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति जय विलास पैलेस है। यह करीब 12.40 लाख वर्गफीट में फैला हुआ है। इसी परिसर में उषा किरण पैलेस होटल भी बना है। एक हिस्से में ऐतिहासिक रानी महल है। इसके अलावा छोटी विश्रांति और हिरण वन कोठी भी शामिल है।
- पुणे में परिवार का आलीशान पद्मा विलास पैलेस भी है।
- मुंबई में समुद्र किनारे कोठी और कई फ्लैट्स भी हैं।
- दिल्ली के सफदरजंग रोड पर लेखा विहार और सिंधिया विला मौजूद हैं। सिंधिया पार्टी इलाके में भी कई कोठियां हैं।
- उज्जैन में शिप्रा नदी किनारे ऐतिहासिक कालिदेह पैलेस भी परिवार की संपत्ति है।
- इसके अलावा सिंधिया इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी भी परिवार के पास है। इतनी बड़ी संपत्ति के कारण ही बंटवारा जटिल बना हुआ है।
अरबों की संपत्ति के 23 दावेदार आए सामने
इस अरबों रुपए की संपत्ति के लिए 23 दावेदार सामने आए हैं। इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया सबसे प्रमुख नाम हैं। उनकी तीनों बुआ यशोदधरा राजे, वसुंधरा राजे और ऊषा राजे राणा भी दावेदार हैं। इसके अलावा कनिका देवी, प्रतिमा देवी और चित्रांगदा राजे भी सूची में शामिल हैं। इतने सारे दावेदार होने से बंटवारे की प्रक्रिया और जटिल हो गई है। हर दावेदार का हिस्सा तय करना कोर्ट के लिए भी आसान काम नहीं है। यही वजह है कि मामला बार बार अटक रहा है।
वकील बोले- संपत्ति का ब्योरा नहीं छिपा सकते
इस मामले में ग्वालियर जिला न्यायालय के अभिभाषक चैन सिंह राजपूत ने अपनी राय रखी। उनके मुताबिक अगर परिवार धारा 23-1 के तहत आवेदन देता तो संपत्ति का ब्योरा जरूरी नहीं था। लेकिन धारा 23-3 के तहत आवेदन देने से समझौता डिक्री बनती है। उनका कहना है कि ऐसे में संपत्ति का पूरा विवरण देना कानूनन जरूरी हो गया है। उनके मुताबिक अब परिवार के पास ब्योरा छिपाने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा है।
अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि सिंधिया परिवार कोर्ट में क्या जवाब देता है। क्या परिवार अपनी पूरी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करेगा। या फिर मामला एक बार फिर टल जाएगा। यह पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। कानूनी जानकारों की मानें तो अब परिवार के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं।
जरूरी FAQ
सिंधिया परिवार की संपत्ति का मामला कोर्ट में क्यों अटका है?
कोर्ट ने बंटवारे के लिए संपत्ति का पूरा इंडेक्स और नक्शा मांगा था। परिवार ने यह ब्योरा पिछली दो सुनवाई में नहीं दिया। इसी वजह से समझौता डिक्री का मामला आगे नहीं बढ़ पाया है।
सिंधिया परिवार की संपत्ति के लिए कितने दावेदार हैं?
इस संपत्ति के लिए कुल 23 दावेदार सामने आए हैं। इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ प्रमुख नाम हैं। बाकी दावेदारों में कनिका देवी, प्रतिमा देवी और चित्रांगदा राजे शामिल हैं।
सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23 नियम 3 के तहत आवेदन देने का क्या मतलब है?
इस नियम के तहत आवेदन देने पर कानूनन समझौता डिक्री बनती है। इसमें संपत्ति का पूरा ब्योरा और नक्शा कोर्ट को देना अनिवार्य होता है। अगर नियम 1 के तहत आवेदन दिया जाता तो यह ब्योरा जरूरी नहीं होता।
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