सिंधिया संपत्ति विवाद: जज के अवकाश पर रहने से टली सुनवाई, अब 4 नवंबर को प्रतिमा देवी को देने होंगे सबूत
उन्होंने अपनी मौसियों पर धोखे से समझौते के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया है।
प्रतिमा देवी को अदालत में पेश करने होंगे सबूत
ग्वालियर जिला न्यायालय में चल रहे सिंधिया परिवार के संपत्ति विवाद में प्रतिमा देवी की आपत्ति पर सुनवाई हो रही है। पिछली सुनवाई में अदालत ने उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने का अवसर दिया था। इसके लिए 29 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी। हालांकि, संबंधित जज के अवकाश पर रहने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब अगली सुनवाई 04 नवंबर को होगी।
इस दिन प्रतिमा देवी को अदालत में अपने दावे के समर्थन में सबूत रखने होंगे। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
प्रतिमा देवी ने अपनी मौसियों पर क्या आरोप लगाए?
प्रतिमा देवी ने सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े समझौते पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उनकी मौसियों ने उनसे धोखे से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए थे। प्रतिमा देवी का कहना है कि समझौते के समय उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने अपनी सही जानकारी और सहमति के बिना हस्ताक्षर कराए जाने का दावा किया है।
इस मामले में उन्होंने ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे के नाम लिए हैं। प्रतिमा देवी ने अदालत में आवेदन देकर समझौते पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, उनके आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। अदालत ने फिलहाल उन्हें अपना पक्ष रखने और सबूत देने का मौका दिया है।
दूसरे पक्ष का क्या कहना है?
संपत्ति बंटवारे के इस विवाद में दूसरे पक्ष ने भी अदालत में अपनी बात रखी है। पिछली सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष की ओर से कहा गया था कि समझौते के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर सहमति से किए गए थे। ऐसे में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। प्रतिमा देवी हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं। वहीं दूसरा पक्ष समझौते को सहमति से हुआ बता रहा है।
अब अदालत में पेश होने वाले Evidence (साक्ष्य) के आधार पर प्रतिमा देवी के आरोपों की जांच होगी। अदालत दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी।
करीब 41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद
सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति का विवाद लंबे समय से अदालत में चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में इस परिवार की संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 41 हजार करोड़ रुपए बताई गई है। इसमें ग्वालियर के जयविलास पैलेस सहित देश के कई शहरों की संपत्तियों का जिक्र होता है। परिवार के सदस्यों के बीच इन संपत्तियों के अधिकार और बंटवारे को लेकर कानूनी विवाद है।
संपत्ति विवाद को सुलझाने के लिए समझौते की प्रक्रिया भी अपनाई गई थी। लेकिन प्रतिमा देवी ने इसी समझौते के दस्तावेजों पर सवाल खड़े कर दिए। अब अदालत को यह देखना होगा कि उनके आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य पेश किए जाते हैं। हालांकि, संपत्तियों की कुल कीमत और किस सदस्य का कितना हिस्सा है, यह अलग कानूनी विषय है।
ग्वालियर और मध्यप्रदेश में कौन-कौन सी संपत्तियां हैं?
सिंधिया राजपरिवार से जुड़ी निजी संपत्तियों की सूची में ग्वालियर के कई प्रमुख महल और भवन शामिल हैं। इनमें जयविलास पैलेस का मुख्य परिसर, बंगला, कार्यालय, निशात कोठी, कमला भवन और गजरा भवन के नाम हैं। इसके अलावा सांख्य विलास, सुसेरा कोठी, कुलेथ कोठी और टेकनपुर रिट्रीट का भी उल्लेख है।
शिवपुरी में माधव विलास पैलेस, जॉर्ज कैसल और हैप्पी विला जैसी संपत्तियां शामिल हैं। उज्जैन का कालियादेह पैलेस और गुना कोठी भी इस सूची में हैं। इन संपत्तियों का ऐतिहासिक महत्व भी है। हालांकि, सूची में किसी संपत्ति का नाम होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह मौजूदा मुकदमे में विवादित है।
मुंबई, दिल्ली और दूसरे शहरों में भी संपत्तियां
सिंधिया परिवार से जुड़ी संपत्तियां केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, देश के दूसरे शहरों में भी परिवार की कई संपत्तियों का उल्लेख मिलता है। मुंबई में वर्ली स्थित समुद्र महल और कारमाइकल रोड की उषाकिरण संपत्ति का नाम शामिल है। दादर में दुकान और आवास का भी जिक्र है।
दिल्ली में राजपुर रोड स्थित ग्वालियर हाउस कोठी का नाम है। इसके अलावा आगरा कोठी, झांसी की पाडोन कोठी और वाराणसी का सिंधिया घाट भी सूची में शामिल हैं। ऊटी में बैलफोर लॉज सहित पांच बंगले और पुणे का पद्माविलास भी परिवार से जुड़ी संपत्तियों के विवरण में शामिल हैं।
मंदिर और छतरियां भी परिवार से जुड़ी हैं
सिंधिया राजपरिवार का संबंध कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों से भी रहा है। इनमें कुछ मंदिर और छतरियां निजी ट्रस्टों के प्रबंधन में बताई गई हैं। ग्वालियर का छतरी परिसर और लश्कर स्थित विट्ठल व कोटेश्वर मंदिर इस सूची में हैं।
शिवपुरी में माधवराव और जीजा महाराज की छतरियां भी शामिल हैं। उज्जैन का द्वारकाधीश संस्थान तथा काशी का गंगा महल भी परिवार से जुड़े प्रमुख स्थलों में गिने जाते हैं। इसके अलावा मथुरा, वृंदावन, अयोध्या और पुष्कर के मंदिरों का भी उल्लेख है।
इन धार्मिक स्थलों का प्रबंधन और स्वामित्व अलग कानूनी विषय हो सकता है। इसलिए इन्हें सीधे मौजूदा संपत्ति विवाद का हिस्सा मानना सही नहीं होगा।
कौन-कौन सी संपत्तियां सरकार को सौंपी गई थीं?
सिंधिया परिवार से जुड़ी कई ऐतिहासिक संपत्तियां सरकार को भी सौंपी गई थीं। ग्वालियर में मोती महल पैलेस, गोरखी पैलेस, फूल बाग, जल बिहार और गेंदघर के नाम इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा ग्वालियर किले की गद्दी बैरक, सरस्वती महल, कम्फू कोठी और तिगरा कोठी भी इनमें शामिल हैं।
मध्यप्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी ऐसी संपत्तियों का उल्लेख मिलता है। शिवपुरी का भदैया कुंड और भूरा खो इनमें शामिल हैं। चंदेरी के रामनगर, पंचमनगर और सिंहपुर महल भी इस सूची में आते हैं। इसके अलावा श्योपुर पैलेस, आगर की जावरा कोठी और शाजापुर का लाल बंगला भी सरकार को सौंपी गई संपत्तियों में बताए गए हैं।
4 नवंबर की सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण है?
सिंधिया परिवार के Property Dispute (संपत्ति विवाद) में अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसकी वजह प्रतिमा देवी के आरोप और उन्हें साबित करने की जिम्मेदारी है। अदालत ने उनकी आपत्ति को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके आरोप सही साबित हो गए हैं।
अब 4 नवंबर को उन्हें ऐसे सबूत पेश करने होंगे, जिनसे उनके दावे को समर्थन मिल सके। दूसरे पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। इस Evidence Hearing (साक्ष्य संबंधी सुनवाई) के बाद अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया तय कर सकेगी। फिलहाल सभी की नजर अगली सुनवाई पर है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रतिमा देवी अपने आरोपों को अदालत में साबित कर पाएंगी या समझौते पर दूसरे पक्ष की दलील मजबूत साबित होगी।