सिंधिया संपत्ति विवाद: प्रतिमा देवी की आपत्ति मंजूर, अब 29 अक्टूबर को देना होगा सबूत

Ratan Kumar Mishra | Oct 14, 2026, 15:11 IST
सिंधिया परिवार की संपत्ति पर फिर छिड़ी कानूनी जंग।
Gwalior. सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे का विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में प्रतिमा देवी को अदालत से राहत मिली है। ग्वालियर जिला न्यायालय ने उनकी आपत्ति स्वीकार कर ली है। अब उन्हें 29 अक्टूबर को कोर्ट में अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने होंगे।
dispute regarding division Scindia family assets once again spotlight. Pratima Devi received relief court matter; Gwalior District Court acceptedobjection. required present evidence court October 29 substantiate allegations.

दरअसल, प्रतिमा देवी का आरोप है कि उनकी मौसियों ने धोखे से उनसे समझौते के कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए थे। उन्होंने इसे लेकर अदालत में आपत्ति दर्ज कराई थी। अब कोर्ट ने उनकी आपत्ति को सुनवाई में शामिल कर लिया है। हालांकि, प्रतिमा देवी को अपने आरोप साबित करने होंगे। ऐसे में 29 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई काफी अहम मानी जा रही है।



14 अक्टूबर को अदालत ने क्या आदेश दिया?

बुधवार, 14 अक्टूबर को इस मामले में अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान प्रतिमा देवी की आपत्ति पर आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई। कोर्ट ने उन्हें अपने आरोपों को साबित करने के लिए सबूत पेश करने का मौका दिया है।



अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। इस दिन प्रतिमा देवी को कोर्ट में अपने दावे से जुड़े सबूत पेश करने होंगे। इन सबूतों के आधार पर ही अदालत उनके आरोपों की जांच को आगे बढ़ाएगी।



प्रतिमा देवी ने समझौते के कागजों पर क्या आरोप लगाए?

प्रतिमा देवी ने संपत्ति बंटवारे से जुड़े समझौते पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उनकी मौसियों ने उनसे धोखे से हस्ताक्षर कराए थे। उन्होंने अदालत से अपनी आपत्ति पर सुनवाई करने की मांग की थी।



उनका कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर उनकी सही जानकारी और सहमति के बिना कराए गए थे। हालांकि, यह उनका आरोप है। अदालत में अभी इसे साबित किया जाना बाकी है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि उनके साथ धोखा हुआ था। अदालत में पेश होने वाले सबूतों के आधार पर ही इस दावे की जांच होगी।



ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे पर आरोप

इस विवाद में प्रतिमा देवी ने अपनी तीन मौसियों के नाम लिए हैं। इनमें ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे शामिल हैं। प्रतिमा देवी के आरोपों का संबंध संपत्ति बंटवारे के समझौते से है। इस मामले में दूसरे पक्ष की ओर से भी अपने तर्क रखे गए हैं। पहले की सुनवाई में दूसरे पक्ष ने हस्ताक्षर सहमति से होने की बात कही थी। ऐसे में अदालत के सामने दोनों पक्षों के दावों का परीक्षण होना है। अब प्रतिमा देवी को अपने आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य पेश करने होंगे। इसके बाद अदालत मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगी।



पहले भी अदालत में उठ चुकी है समझौते पर आपत्ति

सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे का विवाद लंबे समय से चल रहा है। इस विवाद में समझौते के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश भी हुई थी। लेकिन प्रतिमा देवी की आपत्ति से मामले में नया मोड़ आया है। उन्होंने समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि हस्ताक्षर कराते समय उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने इस संबंध में अदालत में आवेदन दिया था।



अदालत ने उनकी आपत्ति को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके आरोप सही साबित हो गए हैं। फिलहाल अदालत ने उन्हें अपना पक्ष साबित करने का अवसर दिया है।



करीब 41 हजार करोड़ की संपत्ति से जुड़ा है विवाद

सिंधिया परिवार की संपत्ति का यह विवाद देशभर में चर्चा का विषय रहा है। मीडिया रिपोर्टों में परिवार की संपत्ति का अनुमान करीब 41 हजार करोड़ रुपए बताया गया है। इस विवाद में परिवार के अलग-अलग सदस्यों के अधिकारों पर सवाल उठे हैं। ग्वालियर का जय विलास पैलेस भी परिवार की प्रमुख संपत्तियों में शामिल है।



हालांकि, पूरी संपत्ति का मूल्य और उसमें किसका कितना हिस्सा है, यह अलग कानूनी सवाल हैं। अदालत में चल रही कार्रवाई के दौरान इन मुद्दों पर भी विचार हो सकता है। प्रतिमा देवी की आपत्ति से समझौते की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। उनके आरोपों की सच्चाई अब पेश किए जाने वाले सबूतों पर निर्भर करेगी।



29 अक्टूबर की सुनवाई क्यों अहम है?

29 अक्टूबर को प्रतिमा देवी को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने होंगे। इस सुनवाई में उनके दावे को परखने का अवसर मिलेगा। अदालत उनके पेश किए गए सबूतों और दूसरे पक्ष के तर्कों पर विचार करेगी। संपत्ति विवाद में अब सबकी नजर 29 अक्टूबर की सुनवाई पर रहेगी। प्रतिमा देवी को अपने दावे के समर्थन में अदालत को संतुष्ट करना होगा। इसके बाद ही मामले की अगली कानूनी दिशा स्पष्ट हो सकेगी।



निजी संपत्तियां (जो सरकार को नहीं सौंपी गईं)

  • ग्वालियर और मध्य प्रदेश:
    जय विलास पैलेस (मुख्य परिसर, बंगला, कार्यालय, निशात कोठी, कमला भवन, गजरा भवन), सख्या विलास, सुसेरा कोठी, कुलेथ कोठी, टेकनपुर रिट्रीट, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस (जॉर्ज कैसल, हैप्पी विला), उज्जैन का कालियादेह पैलेस और गुना कोठी।
  • अन्य शहरों में संपत्तियां:
    मुंबई का समुद्र महल (वर्ली), उषाकिरण (कारमाइकल रोड), दादर में दुकान व आवास, दिल्ली की ग्वालियर हाउस कोठी (राजपुर रोड), आगरा कोठी, झांसी की पाडोन कोठी, वाराणसी का सिंधिया घाट, ऊटी में बैलफोर लॉज समेत 5 बंगले और पुणे का पद्माविलास।
  • छतरियां और मंदिर (निजी ट्रस्टों के प्रबंधन में):
    ग्वालियर का छतरी परिसर, लश्कर के विट्ठल और कोटेश्वर मंदिर, शिवपुरी की माधवराव और जीजा महाराज छतरी, उज्जैन का द्वारकाधीश संस्थान, काशी (गंगा महल), मथुरा, वृंदावन, अयोध्या और पुष्कर के मंदिर।

सरकार को सौंपी गई संपत्तियां

  • ग्वालियर:
    मोती महल पैलेस, गोरखी पैलेस, फूल बाग, जल बिहार और गेंदघर, गद्दी बैरक (किला), सरस्वती महल, कम्फू कोठी और तिगरा कोठी।
  • अन्य शहर और महानगर:
    शिवपुरी का भदैया कुंड और भूरा खो, चंदेरी के रामनगर, पंचमनगर और सिंहपुर महल, श्योपुर पैलेस, आगर की जावरा कोठी और शाजापुर का लाल बंगला।
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