सिंधिया परिवार की अरबों की संपत्ति पर फिर विवाद, राजीनामे पर उठे सवाल
समझें क्या है पूरा मामला...
- सिंधिया परिवार की अरबों की संपत्ति का विवाद कई दशक पुराना है।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया और तीन बुआओं के बीच समझौता तैयार हुआ था।
- दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों का हिस्सा इसमें विवाद बना है।
- प्रतिमा देवी की ओर से अब समझौते पर आपत्ति जताई गई है।
- दूसरा पक्ष पूछ रहा है कि पहले सहमति के बाद दावा क्यों हुआ।
संपत्ति का विवाद कई दशक पुराना
सिंधिया परिवार की अरबों की संपत्ति का विवाद कई दशक पुराना है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और तीन बुआओं के बीच पहले समझौता तैयार हुआ था। दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों का हिस्सा अब इस विवाद की वजह बना है। प्रतिमा देवी की ओर से समझौते पर नई आपत्ति जताई गई है। ग्वालियर जिला अदालत में सोमवार को इस मामले की सुनवाई हुई।
तीनों बुआओं की ओर से राजीनामे पर क्या सवाल उठा
ज्योतिरादित्य सिंधिया की तीनों बुआओं ने आपत्ति जताई। इनमें यशोधरा राजे, वसुंधरा राजे और ऊषा राजे शामिल हैं। उनकी ओर से वकील प्रशांत शर्मा ने अदालत में तर्क दिया। उन्होंने पुराने लिखित समझौते का हवाला दिया।
उनका सवाल था कि फिर नया हिस्सा क्यों मांगा जा रहा है। उनके अनुसार प्रतिमा राजे ने पहले हिस्सा नहीं लेने की बात लिखी थी। इसी आधार पर उन्होंने अदालत के सामने सवाल उठाया है।
उन्होंने शिवांगिनी पक्ष पर कार्रवाई की मांग भी रखी है। यह मांग भारतीय न्याय संहिता की धारा 379 के तहत बताई गई। हालांकि, इस आपराधिक कार्रवाई की मांग पर फैसला नहीं हुआ है।
हमें पुराने कागज की जानकारी नहीं
शिवांगिनी और उनके पति कौस्तुभ ने अलग बात बताई। उनके अनुसार उन्हें ऐसे किसी पुराने समझौते की जानकारी नहीं है। शिवांगिनी ने बताया कि उनकी मां अमेरिका में थीं। उस समय उनके पास एक खाली कागज भेजा गया था।
उस कागज पर उनसे हस्ताक्षर करने को कहा गया था। उनकी बेटी तब केवल 14 महीने की थी। शिवांगिनी के अनुसार उस कागज पर कुछ लिखा नहीं था। उन्होंने कागज पर हस्ताक्षर करके उसे वापस कर दिया था। उनका कहना है कि बाद में उसका क्या इस्तेमाल हुआ। इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी।
पद्मावती राजे के परिवार का दावा क्या है
पद्मावती राजे सिंधिया परिवार की बड़ी बेटी थीं। उनका विवाह त्रिपुरा के राजपरिवार में हुआ था। पद्मावती राजे का निधन 22 वर्ष की कम उम्र में हो गया था। उनकी बेटियों में प्रतिमा देवी और कनिका देवी शामिल हैं। दोनों को पुराने संपत्ति विवाद में पक्षकार बताया गया है। यही वजह इस मामले को और ज्यादा अहम बनाती है।
पहले राजीनामा, फिर हिस्सा मांगने पर असली सवाल
इस विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है। अगर पहले सहमति दी गई थी, तो अब दावा क्यों आया? दूसरी तरफ, अगर सहमति साफ नहीं थी, तो सवाल भी जरूरी है।
शिवांगिनी पक्ष पुराने कागज को लेकर अलग बात कह रहा है। वह कागज खाली था या नहीं, यह भी विवाद का हिस्सा है। उस पर किसने क्या हस्ताक्षर किए, यह भी अहम सवाल है। अदालत अब इन दावों को रिकॉर्ड के आधार पर देखेगी। फिलहाल किसी पक्ष के दावे को अंतिम सच नहीं माना जा सकता।
राजघराने का संपत्ति विवाद इतना लंबा क्यों चला ?
सिंधिया परिवार की संपत्ति को लेकर कई मुकदमे पुराने हैं। इनमें महल, जमीन, ट्रस्ट और दूसरी संपत्तियां शामिल हैं। विभिन्न रिपोर्टों में संपत्ति की कीमत अलग-अलग बताई गई है। हाल की रिपोर्टों में करीब 40 हजार करोड़ का आंकड़ा आया है।
कुछ रिपोर्टों में इसे 41 हजार करोड़ तक बताया गया है। इसलिए इस रकम को अंतिम सरकारी आंकड़ा नहीं माना जा सकता। परिवार के बीच समझौते की कोशिश भी पहले हो चुकी है। लेकिन नए दावे ने उस प्रक्रिया को फिर रोक दिया।
अब 25 अगस्त की सुनवाई पर सबकी नजर
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को रखी है। उस दिन पुराने कागज और नए दावे पर चर्चा हो सकती है। साथ ही राजीनामे की स्थिति भी साफ हो सकती है। अगर दावा स्वीकार हुआ, तो बंटवारा फिर बदल सकता है। अगर दावा खारिज हुआ, तो पुराना समझौता आगे बढ़ सकता है।
कौन हैं शिवांगिनी राजे
इस दौरान शिवांगिनी राजे अपने पति कौस्तुभ सिंह राणा संग पहुंचीं। शिवांगिनी, प्रतिमा देवी की बेटी और पद्मावती राजे की नातिन हैं। उन्होंने अपनी नानी के हिस्से की संपत्ति के लिए आवेदन दिया। इस आवेदन के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है।
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