सिंधिया संपत्ति विवाद: 78 साल पुराना द कोवेनेंट तय करेगा करोड़ों की रियासत का वारिस!
Amresh Kushwaha | Aug 16, 2026, 09:11 IST
सिंधिया संपत्ति विवाद
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति को लेकर कोर्ट में विवाद गहरा गया है। 78 साल पुराना कोवेनेंट दस्तावेज सामने आया है। पद्माराजे की बेटी प्रतिमा देवी ने कैविएट दाखिल की है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति विवाद में है।
- 78 साल पुराना कोवेनेंट दस्तावेज कोर्ट में सबसे अहम सबूत बना है।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पारिवारिक बंटवारे के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था।
- पद्माराजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी ने अब कैविएट दाखिल की है।
- मामला ज्येष्ठाधिकार और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के बीच कानूनी लड़ाई पर टिका है।
क्या है द कोवेनेंट दस्तावेज
इसमें प्रिवी पर्स यानी टैक्स फ्री वार्षिक भत्ते का भी पूरा हिसाब है। आजादी के समय रियासतों का भारत सरकार में विलय हुआ था। उस समय राजाओं को यह भत्ता तय किया गया था। सबसे ज्यादा भत्ता ग्वालियर के महाराज जेएएम सिंधिया को मिलता था।
किसे कितना भत्ता मिलता था
देवास जूनियर रियासत को 1.8 लाख रुपए मिलते थे। देवास सीनियर रियासत को 1.45 लाख रुपए का भत्ता तय था। मठवार रियासत के राजा को सबसे कम छह हजार रुपए मिलते थे। यह पूरा ब्योरा अब कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश हुआ है।
पारिवारिक समझौते की कोशिश
प्रतिमा देवी ने दाखिल की कैविएट
प्रतिमा देवी और उनकी बहन रमा राजे खुद को कानूनी उत्तराधिकारी बताती हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित समझौते से उनका अधिकार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतिम आदेश न हो।
दो कानूनी तर्कों पर टिकी लड़ाई
बुआओं का तर्क क्या है
बुआओं का कहना है कि 2001 में राजमाता के निधन के बाद बेटियां पक्षकार बन गई थीं। उनका तर्क है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत सभी बच्चों का बराबर अधिकार बनता है।
संपत्तियों का पूरा गणित
मुंबई का समुद्र महल और उषाकिरण भी परिवार की संपत्ति है। दिल्ली, आगरा, झांसी, वाराणसी और ऊटी में भी कई संपत्तियां हैं। दूसरा हिस्सा छतरियां और मंदिर हैं। यह निजी ट्रस्टों के प्रबंधन में हैं।
इनमें ग्वालियर का छतरी परिसर और कई प्रमुख मंदिर शामिल हैं। तीसरा हिस्सा वे संपत्तियां हैं जो सरकार को सौंपी जा चुकी हैं। इनमें मोती महल पैलेस, गोरखी पैलेस और फूल बाग जैसी जगहें आती हैं।
चुनावी हलफनामों में घोषित संपत्ति
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने करीब 4.54 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की थी। हालांकि राजघराने की कुल अनुमानित 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति का बड़ा हिस्सा अलग अलग धार्मिक और चैरिटेबल ट्रस्टों के पास दर्ज है।
आगे क्या होगा
FAQ
- सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में द कोवेनेंट क्या है?
द कोवेनेंट 78 साल पुराना विलय पत्र है। इसमें मध्य भारत की रियासतों के भारत में विलय का ब्योरा दर्ज है। इसमें राजाओं की निजी संपत्तियों और प्रिवी पर्स का हिसाब भी है। यह दिल्ली के नोटरी से प्रमाणित होकर अब कोर्ट में पेश हुआ है। यह दस्तावेज मौजूदा संपत्ति विवाद में सबसे अहम सबूत माना जा रहा है। - प्रतिमा देवी ने कैविएट क्यों दाखिल की है?
प्रतिमा देवी स्व. पद्माराजे सिंधिया की बेटी हैं और खुद को कानूनी उत्तराधिकारी बताती हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित पारिवारिक समझौते से उनका अधिकार प्रभावित हो रहा है। इसलिए उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतिम फैसला न हो। यह कैविएट पारिवारिक बंटवारे की प्रक्रिया में नई कानूनी अड़चन बन गई है।
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