शहडोल में हॉस्टल की बदहाली, दीवार फांदकर कलेक्टर के पास पहुंच रहे बच्चे, 2 अधीक्षक सस्पेंड

Aman Vaishnav | Oct 15, 2026, 09:32 IST
शहडोल के सरकारी हॉस्टल में अव्यवस्था पर कलेक्टर की कार्रवाई
सरकार हर बच्चे की पढ़ाई, रहने और खाने-पीने के लिए लाखों रुपए खर्च करती है। बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि सरकारी हॉस्टलों में बच्चों को घर जैसा माहौल मिलेगा। वहीं मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से सामने आई तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। यहां बच्चे आधी रात और सुबह-सुबह हॉस्टल की दीवार फांदकर बाहर निकलने को मजबूर हो गए।

शहडोल छात्रावास समस्या (Shahdol Hostel Issues)

सवाल यह है कि आखिर बच्चों को ऐसी क्या परेशानी थी कि, दो महीने में पांच बार उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलकर जिला प्रशासन के पास जाना पड़ा। क्या हॉस्टल में उनकी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं था? या फिर उनकी आवाज वहीं दबकर रह जाती थी? छात्राओं को पैदल चलकर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ा, तब जाकर जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुली।



हॉस्टलों में क्या-क्या थीं मुख्य कमियां?

बच्चों ने जो बातें सामने रखी हैं, उनसे हॉस्टल प्रबंधन की पोल खुल गई है। विरोध के पीछे की मुख्य वजहें कुछ इस तरह थीं...



  • खराब भोजन: बच्चों को जो खाना दिया जा रहा था, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब थी।
  • पेयजल की समस्या: हॉस्टल में साफ और शुद्ध पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।
  • साफ-सफाई का अभाव : कमरों और परिसर में नियमित सफाई नहीं हो रही थी।
  • अधीक्षकों का रवैया : बच्चों का आरोप था कि अधीक्षकों का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं था। साथ ही शिकायत करने पर ध्यान नहीं दिया जाता था।
  • अव्यवस्थाएं : बिजली, सोने के लिए बिस्तर, स्वास्थ्य जांच और पढ़ाई-लिखाई की सामग्री का भारी अभाव बना हुआ था।

100 से ज्यादा अधघिकारी की लगाई ड्यूटी

जब मामला तूल पकड़ने लगा, तब कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ कर दिया कि बच्चों की देखरेख में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर के 100 से अधिक अफसरों की ड्यूटी लगाई गई है। यह अफसर अचानक हॉस्टल पहुंचेंगे और वहां रहने, खाने, बिजली, पानी, भवन की हालत और अधीक्षकों के बर्ताव तक की पूरी रिपोर्ट तैयार करेंगे।



लापरवाह स्टाफ पर गिरी गाज

प्रशासनिक समीक्षा के बाद लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की गई है।



  • दो छात्रावास अधीक्षकों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
  • दो अधीक्षकों को उनके पद से हटा दिया गया है।
  • तीन अधीक्षकों की सालाना वेतन वृद्धि रोक दी गई है।
  • सात अन्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

इसके अलावा रखरखाव के लिए हर साल मिलने वाले 50 हजार रुपए का सही इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।



क्या अब बदलेगी हॉस्टलों की सूरत?

अधिकारियों की निगरानी और कुछ लोगों पर निलंबन की कार्रवाई से एक उम्मीद जरूर जगी है। दूसरी ओर सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है कि क्या इतने भर से व्यवस्था पूरी तरह सुधर जाएगी। क्या अब बच्चों को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए फिर कभी हॉस्टल की दीवार फांदनी पड़ेगी। या फिर उनकी शिकायतों का निपटारा हॉस्टल की चौखट के भीतर ही समय पर हो जाएगा।



FAQ



1. शहडोल सरकारी छात्रावासों के बच्चे क्यों प्रदर्शन कर रहे थे?



शहडोल के हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राएं खराब खाने से परेशान थे। साथ ही साफ पानी की कमी और गंदगी से भी परेशान थे। वहां पढ़ाई का माहौल भी ठीक नहीं था। अधीक्षकों का व्यवहार भी उनके साथ सहयोग वाला नहीं था। अपनी समस्याएं कलेक्टर तक पहुंचाने के लिए छात्र-छात्राओं को हॉस्टल से बाहर निकलकर पैदल जाना पड़ा।

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