कलेक्टर ऋजु बाफना के आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे, कोर्ट ने कहा- कलेक्टर को कानूनी समझ नहीं!
शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना की कार्यप्रणाली एक बार फिर कानूनी कठघरे में है। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कलेक्टर द्वारा एक कर्मचारी की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश पर रोक लगा दी है।
साथ ही, उनकी प्रशासनिक समझ पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि ऐसा लगता है जैसे कलेक्टर को कानून की समझ नहीं है।
एक ही महीने में दूसरी बार कोर्ट की फटकार
न्यायिक गलियारों में यह चर्चा का विषय है कि मार्च के महीने में यह दूसरा मौका है जब शाजापुर कलेक्टर के आदेश को कोर्ट ने मनमाना (Arbitrary) करार दिया है।
इससे पहले 16 मार्च को भी हाईकोर्ट ने जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के नियम विरुद्ध निलंबन पर रोक लगाई थी। अब ताजा मामला सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी जयंत बघेरवाल से जुड़ा है, जहां बिना किसी विभागीय जांच के उन्हें बड़ा दंड दे दिया गया था।
बिना विवेक का इस्तेमाल किए सुनाया फैसला
बुधवार, 25 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने साफ शब्दों में कहा कि कलेक्टर का आदेश उनके अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है।
कोर्ट ने हैरानी जताई कि बिना जांच किए संचयी प्रभाव (Cumulative Effect) के साथ दो वेतनवृद्धि रोकने जैसा कठोर दंड कैसे दिया जा सकता है। अदालत ने यह भी नोट किया कि जब कर्मचारी ने इस मामले की अपील आयुक्त के पास की, तो वहां भी इस कानूनी त्रुटि पर ध्यान नहीं दिया गया।
किडनी के गंभीर मरीज के साथ शक्ति का गलत प्रयोग
यह पूरा विवाद पार्किंग ठेकेदार और वसूली से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ता जयंत बघेरवाल ने ठेकेदार से बकाया वसूलने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद ठेकेदार ने उन पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए थे।
हालांकि, जांच में रिश्वत के आरोप सिद्ध नहीं हुए, फिर भी कलेक्टर ने बघेरवाल की वेतनवृद्धि रोक दी और उनका ट्रांसफर गुलाना एसडीएम कार्यालय कर दिया था।
बता दें कि बघेरवाल किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। याचिका में इस फैसले को शक्ति का गलत प्रयोग बताया गया है।
कोर्ट रूम लाइव: जब जज ने सरकारी वकील को टोका
सुनवाई के दौरान जब सरकारी वकील ने दलील दी कि संचयी प्रभाव शब्द एक प्रिंटिंग मिस्टेक (Printing Mistake) थी। कहा गया कि प्रशासन का इरादा छोटा दंड देने का था, तो जस्टिस पिल्लई ने तीखा सवाल किया।
15 दिन में जवाब दें कलेक्टर- HC
इंदौर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष को सही मानते हुए विवादित आदेशों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही कलेक्टर आईएएस ऋजु बाफना को 15 दिन के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा (Personal Affidavit) पेश करने का निर्देश दिया गया है। इसमें उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि बिना विभागीय जांच के इतना बड़ा दंड किस आधार पर दिया गया।
ये खबर भी पढ़िए...
शाजापुर कलेक्टर आईएएस ऋजु बाफना का आबकारी विभाग से पहले भी विवाद, सीनियर IAS लिख चुके पीएस को पत्र
उज्जैन संभागायुक्त, शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना दोनों के आदेश पर स्टे, रंगशाही को फिर DEO का जिम्मा
महिला IAS वंदना वैद्य के फार्महाउस जुआकांड में अब चार और पुलिसकर्मी निपटे, कूबड़ा ने खोले राज