शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना को हाईकोर्ट से झटका, DEO को सस्पेंड करने से पहले ही प्रभार बदलने पर उठे सवाल
Sanjay Gupta | Mar 16, 2026, 13:54 IST
shajapur collector riju bafna deo vinay rangshahi high court stay
शाजापुर में कलेक्टर ऋजु बाफना और जिला आबकारी अधिकारी (DEO) विनय रंगशाही के बीच चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कलेक्टर के आदेश की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए उस आदेश पर स्टे लगा दिया है
शाजापुर जिले में कलेक्टर ऋजु बाफना और जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने कलेक्टर के फैसले पर प्रारंभिक तौर पर सवाल उठाते हुए आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
दरअसल, कलेक्टर (आईएएस ऋजु बाफना) ने जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही को निलंबित करने की अनुशंसा उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को भेजी थी। इसके बाद 16 फरवरी को रंगशाही को निलंबित कर दिया गया था। इससे पहले कलेक्टर की ओर से उन्हें कई नोटिस भी जारी किए गए थे और प्रमुख सचिव आबकारी व आयुक्त आबकारी को भी पत्र लिखे गए थे।
हालांकि, विवाद तब गहराया जब यह सामने आया कि कलेक्टर ने 20 जनवरी को ही रंगशाही से प्रभार लेकर सहायक जिला आबकारी अधिकारी निमिषा परमार को जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार सौंप दिया था। इसी निर्णय को लेकर हाईकोर्ट ने कलेक्टर की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
याचिकाकर्ता विनय रंगशाही ने अपनी याचिका में मध्यप्रदेश शासन, आबकारी आयुक्त, शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना, सहायक जिला आबकारी अधिकारी निमिषा परमार, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह और उज्जैन जिला आबकारी अधिकारी निधि जैन को पक्षकार बनाया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि कलेक्टर लगातार रंगशाही को नोटिस जारी कर रही थीं और निलंबन आदेश में तकनीकी त्रुटियां भी हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कलेक्टर ने जब संभागायुक्त को निलंबन की अनुशंसा भेजी, उससे पहले ही अधीनस्थ अधिकारी को प्रभार दे दिया गया था।
कोर्ट ने कहा कि यदि कलेक्टर संभागायुक्त के निलंबन आदेश के बाद यह कदम उठातीं तो स्थिति अलग होती, लेकिन उससे पहले ऐसा करना निर्णय की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल 20 जनवरी को जारी उस आदेश पर स्टे लगा दिया है, जिसमें निमिषा परमार को प्रभार सौंपा गया था। हालांकि, संभागायुक्त द्वारा जारी निलंबन आदेश पर भी रोक लगी है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।
लिखित आदेश आने के बाद ही स्थिति साफ होगी। यदि निलंबन आदेश पर भी रोक लगती है तो रंगशाही फिर से जिला आबकारी अधिकारी का पद संभाल सकते हैं।
कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी के बीच विवाद सितंबर-अक्टूबर 2025 से चल रहा था। इस दौरान रंगशाही पर मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर में फूड बास्केट नहीं रखने और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे थे।
इसके बाद कलेक्टर की ओर से उन्हें कई बार नोटिस जारी किए गए, जिनमें टीएल बैठक और जनसुनवाई में अनुपस्थित रहने, फोन नहीं उठाने और ड्यूटी में लापरवाही जैसे आरोप शामिल थे। विवाद बढ़ने के बाद आखिरकार कलेक्टर ने उनका प्रभार बदलते हुए निलंबन की अनुशंसा कर दी, जिसके खिलाफ रंगशाही हाईकोर्ट पहुंच गए।
ये खबर भी पढ़िए...
DEO विनय रंगशाही को क्या शराब माफियाओं ने गुजरात लाइन के लिए फंसाया था
MP News: प्रशासन में पिंक रिवोल्यूशन: एमपी में पहली बार 17 जिलों में महिला कलेक्टर बनी बॉस
महिला IAS के फार्महाउस जुआकांड में SI, ASI की भूमिका संदिग्ध, हटाए गए TI के साथ क्राइम ब्रांच में थे
शराब ठेकेदारों से मिलीभगत कर आबकारी अधिकारी खरे, झा, रंगशाही, चंद्रावत सभी ने जमकर की कमाई, सभी जांच में उलझे
दरअसल, कलेक्टर (आईएएस ऋजु बाफना) ने जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही को निलंबित करने की अनुशंसा उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को भेजी थी। इसके बाद 16 फरवरी को रंगशाही को निलंबित कर दिया गया था। इससे पहले कलेक्टर की ओर से उन्हें कई नोटिस भी जारी किए गए थे और प्रमुख सचिव आबकारी व आयुक्त आबकारी को भी पत्र लिखे गए थे।
हालांकि, विवाद तब गहराया जब यह सामने आया कि कलेक्टर ने 20 जनवरी को ही रंगशाही से प्रभार लेकर सहायक जिला आबकारी अधिकारी निमिषा परमार को जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार सौंप दिया था। इसी निर्णय को लेकर हाईकोर्ट ने कलेक्टर की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
इन अधिकारियों को बनाया गया पक्षकार
कलेक्टर के आदेश पर कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि यदि कलेक्टर संभागायुक्त के निलंबन आदेश के बाद यह कदम उठातीं तो स्थिति अलग होती, लेकिन उससे पहले ऐसा करना निर्णय की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
हाईकोर्ट ने आदेश पर लगाया स्टे
लिखित आदेश आने के बाद ही स्थिति साफ होगी। यदि निलंबन आदेश पर भी रोक लगती है तो रंगशाही फिर से जिला आबकारी अधिकारी का पद संभाल सकते हैं।
सितंबर से चल रहा था विवाद
इसके बाद कलेक्टर की ओर से उन्हें कई बार नोटिस जारी किए गए, जिनमें टीएल बैठक और जनसुनवाई में अनुपस्थित रहने, फोन नहीं उठाने और ड्यूटी में लापरवाही जैसे आरोप शामिल थे। विवाद बढ़ने के बाद आखिरकार कलेक्टर ने उनका प्रभार बदलते हुए निलंबन की अनुशंसा कर दी, जिसके खिलाफ रंगशाही हाईकोर्ट पहुंच गए।
ये खबर भी पढ़िए...
DEO विनय रंगशाही को क्या शराब माफियाओं ने गुजरात लाइन के लिए फंसाया था
MP News: प्रशासन में पिंक रिवोल्यूशन: एमपी में पहली बार 17 जिलों में महिला कलेक्टर बनी बॉस
महिला IAS के फार्महाउस जुआकांड में SI, ASI की भूमिका संदिग्ध, हटाए गए TI के साथ क्राइम ब्रांच में थे
शराब ठेकेदारों से मिलीभगत कर आबकारी अधिकारी खरे, झा, रंगशाही, चंद्रावत सभी ने जमकर की कमाई, सभी जांच में उलझे
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari