प्रशासन में पिंक रिवोल्यूशन: एमपी में पहली बार 17 जिलों में महिला कलेक्टर बनी बॉस

Amresh Kushwaha | Mar 11, 2026, 13:30 IST
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mp administration pink revolution female ias collectors list
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मध्यप्रदेश में पहली बार 17 जिलों की कमान महिला आईएएस अधिकारियों के पास है। इस बदलाव को पिंक रिवोल्यूशन कहा जा सकता है। देखें इन महिला अधिकारियों के नाम और जिलों की पूरी सूची...

BHOPAL. मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नई बयार बह रही है। इसे यदि प्रशासन का पिंक रिवोल्यूशन कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब सूबे के 55 में से 17 जिलों की कमान महिला आईएएस (IAS) अधिकारियों के पास है। यह बदलाव न केवल महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि यह प्रशासनिक दक्षता में उनके बढ़ते भरोसे को भी दर्शाता है।

मोहन सरकार में बढ़ा महिलाओं पर भरोसा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में महिला आईएएस अफसरों को फील्ड पोस्टिंग के सबसे ज्यादा अवसर मिले हैं। सरकार की इसी नीति का परिणाम है कि बड़वानी, झाबुआ और डिंडोरी जैसे जिलों में लगातार महिला अफसरों को ही कलेक्टर (Collector) नियुक्त किया जा रहा है।

आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2011 से 2017 बैच की लगभग 45 महिला आईएएस अफसरों में से एक दर्जन से अधिक अधिकारियों को जल्द ही पहली बार कमान मिलने की संभावना जताई जा रही है।

2014 बैच की महिला अफसरों का दबदबा

वर्तमान प्रशासनिक ढांचे में 2014 बैच की महिला अधिकारियों का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है। इस बैच की 10 में से 8 महिला अधिकारी प्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों को संभाल रही हैं।

इनमें आईएएस शीतला पटले (सिवनी), आईएएस नेहा मीना (झाबुआ), आईएएस ऋजु बाफना (शाजापुर), आईएएस भव्या मित्तल (खरगोन), आईएएस रानी बाटड़ (मैहर), आईएएस नीतू माथुर (आलीराजपुर), आईएएस अंजू पवन भदौरिया (डिंडोरी) और आईएएस जमुना भिड़े (निवाड़ी) शामिल हैं। वहीं, 2016 बैच की भी तीन महिला अधिकारी वर्तमान में कलेक्टर की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

संभागवार स्थिति: इंदौर और उज्जैन सबसे आगे

यदि हम नक्शे पर नजर डालें, तो इंदौर और उज्जैन संभाग (Division) में महिला कलेक्टरों की संख्या सबसे अधिक है। इंदौर संभाग के आठ में से चार जिलों और उज्जैन संभाग के भी सात में से चार जिलों की कमान महिलाओं के हाथ में है।

ग्वालियर संभाग में आईएएस रुचिका चौहान ग्वालियर की बागडोर संभाल रही हैं, जबकि रीवा और सागर संभाग में भी दो-दो जिलों की जिम्मेदारी महिला अफसरों के पास है। नर्मदापुरम में आईएएस सोनिया मीना और जबलपुर संभाग में तीन महिला कलेक्टर तैनात हैं। हालांकि, भोपाल और चंबल संभाग में वर्तमान में एक भी महिला कलेक्टर नहीं है।

क्र.सं.संभागजिलामहिला कलेक्टर का नाम
1.इंदौरखरगोन आईएएस भव्या मित्तल
2.बड़वानी आईएएस ज्योति सिंह
3.झाबुआ आईएएस नेहा मीना
4.आलीराजपुर आईएएस नीतू माथुर
5.उज्जैनरतलाम आईएएस मीशा सिंह
6.शाजापुरआईएएस ऋजु बाफना
7.आगर मालवाआईएएस प्रीति यादव
8.मंदसौरआईएएस अदिति गर्ग
9.ग्वालियरग्वालियरआईएएस रुचिका चौहान
10.रीवारीवाआईएएस प्रतिभा पाल
11.मैहरआईएएस रानी बाटड
12.सागरपन्नाआईएएस ऊषा परमार
13.निवाड़ीआईएएस जमुना भिड़े
14.नर्मदापुरमनर्मदापुरमआईएएस सोनिया मीना
15.जबलपुरनरसिंहपुरआईएएस रजनी सिंह
16.सिवनीआईएएस शीतला पटले
17.डिंडोरीआईएएस अंजू पवन भदौरिया

बदला पूर्व ब्यूरोक्रेट्स का नजरिया

इस बदलाव को लेकर पूर्व अपर मुख्य सचिव अरुणा शर्मा का मानना है कि यह स्थिति महिला अफसरों की काबिलियत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि हमारे समय में महिला अधिकारियों की संख्या इतनी अधिक नहीं होती थी।

मध्यप्रदेश सरकार ने कभी भी नियुक्ति में महिला-पुरुष का भेदभाव नहीं किया है। महिला अफसरों ने अपनी कार्यकुशलता साबित की है, यही कारण है कि आज वे प्रदेश के एक-तिहाई जिलों का नेतृत्व कर रही हैं।

अभी भी 12 जिलों को पहली महिला बॉस का इंतजार

भले ही 17 जिलों में महिलाएं बॉस (Boss) की भूमिका में हों, लेकिन प्रदेश के 12 जिले ऐसे भी हैं जहां आज तक किसी महिला आईएएस की पोस्टिंग बतौर कलेक्टर नहीं हुई है। इन जिलों में राजधानी भोपाल और आर्थिक राजधानी इंदौर जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा धार, उज्जैन, ग्वालियर, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, शहडोल, छतरपुर, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा को अभी भी अपनी पहली महिला कलेक्टर का इंतजार है।

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