पूर्व विधायक शशांक भार्गव पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप, अग्रिम जमानत पर 1 जून को सुनवाई

Neel Tiwari | May 30, 2026, 15:01 IST
shashank-bhargav
विदिशा सुसाइड केस में आरोपी बनाए गए पूर्व विधायक शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका अब जबलपुर हाईकोर्ट पहुंच गई है। जिला कोर्ट और ग्वालियर बेंच से राहत न मिलने के बाद भार्गव को अब यहीं से उम्मीद है। मामले की अहम सुनवाई 1 जून 2026 को होनी तय हुई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • पूर्व विधायक शशांक भार्गव पर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण (धारा 108 बीएनएस) का मामला दर्ज।
  • ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामला जबलपुर हाईकोर्ट को रेफर किया है।
  • विदिशा जिला अदालत पहले ही अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है।
  • पुलिस जांच में मृतक के वीडियो, कॉल डिटेल और परिजनों के बयान अहम साक्ष्य बताए गए।
  • 1 जून 2026 को जबलपुर हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई प्रस्तावित।

विदिशा के मशहूर सुसाइड केस में फंसे पूर्व विधायक शशांक भार्गव का मामला अब जबलपुर हाई कोर्ट पहुंच गया है। दरअसल, पहले उन्होंने अग्रिम जमानत (गिरफ्तारी से बचने) के लिए हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में अर्जी लगाई थी। लेकिन ग्वालियर बेंच ने इस पर सीधे सुनवाई करने से मना कर दिया और केस को जबलपुर हाई कोर्ट भेज दिया।



ग्वालियर बेंच ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि शशांक भार्गव पूर्व विधायक हैं। बता दें कि नेताओं या जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के लिए खास अदालतें होती हैं। इसके अलावा, विदिशा जिला भोपाल संभाग में आता है और इसका कानूनी कामकाज जबलपुर हाई कोर्ट के दायरे में ही आता है।



अब इस पूरे मामले पर अगला फैसला जबलपुर हाई कोर्ट में ही होगा। बताया जा रहा है कि इस केस की अगली सुनवाई 1 जून 2026 को हो सकती है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि किस जज की कोर्ट में यह मामला सुना जाएगा।





क्या है पूरा मामला, कैसे दर्ज हुआ अपराध

यह पूरा मामला 27 अप्रैल 2026 को सामने आया था। उस दिन विदिशा के बेहलोट गांव के रहने वाले गोविंद सिंह गुर्जर की लाश रेलवे ट्रैक पर बहुत बुरी हालत में मिली थी। शुरुआत में तो सबको यही लगा कि यह कोई रेल हादसा है, लेकिन बाद में कहानी पूरी तरह बदल गई।



दरअसल, घटना से ठीक पहले गोविंद सिंह ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया। पुलिस के मुताबिक, उस वीडियो में गोविंद सिंह ने पूर्व विधायक शशांक भार्गव पर बहुत गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया था कि खेती-किसानी और पैसों के लेन-देन को लेकर उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।



मामले की जांच के दौरान मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल, अंतिम बातचीत और परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुलिस ने शशांक भार्गव के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का मामला दर्ज कर लिया।



VIDISHA Suicide CASE
Case status

जिला अदालत में खुद को निर्दोष बताते रहे भार्गव

विदिशा की द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में दायर अग्रिम जमानत याचिका में शशांक भार्गव ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया था। उनकी ओर से कहा गया कि पुलिस ने केवल कथित वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। जबकि इन वीडियो की फोरेंसिक जांच अभी तक नहीं हुई है।



बचाव पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि मृतक ने कहीं भी स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि वह शशांक भार्गव की प्रताड़ना के कारण आत्महत्या कर रहा है। याचिका में यह भी कहा गया कि मृतक की मौत दुर्घटना भी हो सकती है और उसे ट्रेन से टकराते हुए किसी ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा।



भार्गव की ओर से यह भी दलील दी गई कि उनके और मृतक के बीच केवल संपत्ति और पैसों का विवाद था। जिसे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा था। इसलिए उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के रूप में नहीं देखा जा सकता है।



पुलिस जांच में सामने आए साक्ष्यों ने बढ़ाई मुश्किलें

दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच में मृतक और शशांक भार्गव के बीच लंबे समय से चल रहे आर्थिक विवाद के सबूत मिले हैं। केस डायरी के अनुसार मृतक लगभग 10 से 15 सालों तक भार्गव के यहां काम करता रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि नौकरी से हटाए जाने, पैसों के दबाव और संपत्ति संबंधी विवाद के कारण मृतक मानसिक तनाव में था।



पुलिस ने मृतक की अंतिम फोन बातचीत, परिजनों के बयान और वायरल वीडियो को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। अभियोजन का कहना था कि जांच अभी अधूरी है और आगे भी कई साक्ष्य जुटाए जाने हैं, इसलिए आरोपी की गिरफ्तारी आवश्यक हो सकती है।



जिला अदालत ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत याचिका

विदिशा जिला अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि इस मामले की जांच अभी चल रही है, इसलिए पूछताछ के लिए आरोपी की जरूरत पड़ सकती है। कोर्ट ने यह भी माना कि पुलिस ने अब तक जो सबूत जुटाए हैं। सबूत जैसे कि मरने वाले का वीडियो, फोन के कॉल रिकॉर्ड और गवाहों के बयान, उन्हें इस मोड़ पर अनदेखा नहीं किया जा सकता है।



अदालत ने आरोपी के पुराने रिकॉर्ड, मामले की गंभीरता और जांच के हालात को देखते हुए यह तय किया कि उन्हें अग्रिम जमानत (गिरफ्तारी से छूट) देना ठीक नहीं होगा। इसी वजह से कोर्ट ने 8 मई 2026 को पूर्व विधायक शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत की अर्जी को खारिज कर दिया था।



जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर

विदिशा अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद शशांक भार्गव ने ग्वालियर हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। ग्वालियर हाईकोर्ट ने ऐसी याचिका को जबलपुर ट्रांसफर कर दिया है। अब भार्गव की उम्मीदें जबलपुर हाईकोर्ट पर टिकी हुई हैं।



इस सियासी और कानूनी मामले पर सबकी नजरें लगातार टिकी हुई हैं। एक तरफ जहां पूर्व विधायक खुद को पूरी तरह बेकसूर बता रहे हैं और पुलिस से बचने के लिए जमानत की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और सरकारी वकील उनकी अर्जी का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच में जो सबूत मिले हैं, वे बेहद गंभीर हैं।



अब 1 जून को हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले के लिए बहुत बड़ी मानी जा रही है। इसी दिन तय होगा कि यह केस आगे किस करवट बैठेगा। अब हर कोई यह देखना चाहता है कि जबलपुर हाई कोर्ट पूर्व विधायक को कोई राहत देता है या फिर पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने की हरी झंडी मिल जाती है।



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